जोरदार धमाके के बाद आसमान में छाया धुआं, अल-मुत्ताकीन मस्जिद को बनाया गया निशाना; इजरायली सेना और फिलिस्तीनी अधिकारियों के दावों में बड़ा अंतर
गाजा पट्टी में जारी संघर्ष के बीच एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। बुधवार, 29 जुलाई को गाजा सिटी में एक मस्जिद पर हुए हवाई हमले के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमले के समय जोरदार धमाका हुआ और देखते ही देखते आसमान में आग की लपटें और धुएं का बड़ा गुबार दिखाई देने लगा।
बताया जा रहा है कि इजरायली सेना ने अल-मुत्ताकीन मस्जिद को निशाना बनाया। हमले के बाद आसपास मौजूद विस्थापित फिलिस्तीनी लोगों के टेंटों में भी दहशत फैल गई और लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। घटना के बाद कई लोग मलबे और टूटे हुए हिस्सों के बीच अपने सामान और संभावित पीड़ितों की तलाश करते नजर आए।
इजरायली सेना का दावा- मस्जिद में था हमास का हथियार भंडार
इजरायली सेना ने इस हमले को लेकर दावा किया है कि जिस मस्जिद को निशाना बनाया गया, उसका इस्तेमाल हमास हथियारों के भंडारण केंद्र के रूप में कर रहा था। सेना के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में गाजा पट्टी के मध्य और उत्तरी हिस्सों में हमास के कई हथियार गोदामों को निशाना बनाया गया है।
इजरायली सेना का कहना है कि इन ठिकानों में से एक उत्तरी गाजा पट्टी की एक मस्जिद के अंदर बनाया गया था। सेना ने दावा किया कि कार्रवाई से पहले आम लोगों को क्षेत्र खाली करने की चेतावनी दी गई थी, ताकि नागरिकों को नुकसान से बचाया जा सके।
हालांकि, फिलिस्तीनी अधिकारियों ने इजरायल के इन दावों को खारिज किया है और कहा है कि धार्मिक स्थलों को निशाना बनाना किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
फिलिस्तीनी अधिकारियों ने लगाया गंभीर आरोप
गाजा पट्टी के धार्मिक मामलों और वक्फ मंत्रालय के महानिदेशक आमिर अबू अल-अमरैन ने आरोप लगाया कि इजरायली सेना ने हवाई हमले में मस्जिद को पूरी तरह नष्ट कर दिया।
उन्होंने कहा कि सैन्य ठिकानों की मौजूदगी का दावा करके धार्मिक स्थलों पर किए जा रहे हमलों को सही ठहराने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि धार्मिक स्थलों और आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाए जाएं।
फिलिस्तीनी अधिकारियों का कहना है कि लगातार हो रहे हमलों से आम लोगों का जीवन बेहद कठिन हो गया है और बड़ी संख्या में लोग विस्थापन की स्थिति में पहुंच चुके हैं।
युद्धविराम के बावजूद नहीं थम रही हिंसा
इजरायल और हमास के बीच कमजोर युद्धविराम लागू होने के बावजूद गाजा में हिंसा पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से चल रहा संघर्ष अब भी जारी है और स्थायी शांति समझौते की कोशिशें कई बार रुक चुकी हैं।
गाजा में रहने वाले लोगों का कहना है कि युद्धविराम के बावजूद उन्हें हर समय हमले का डर बना रहता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, बमबारी और सैन्य कार्रवाई ने सामान्य जीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है।
एक प्रत्यक्षदर्शी शेहादेह बदावी ने कहा कि अगर लगातार हमले जारी हैं तो इसे वास्तविक युद्धविराम नहीं कहा जा सकता। उनके अनुसार, लोग हर समय भय और अनिश्चितता के माहौल में जी रहे हैं।
धार्मिक स्थलों को नुकसान पर बढ़ी अंतरराष्ट्रीय चिंता
गाजा संघर्ष के दौरान धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों को पहुंचे नुकसान को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता जताई जाती रही है। संयुक्त राष्ट्र की सांस्कृतिक संस्था यूनेस्को के अनुसार, युद्ध के दौरान कई ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुंचा है।
यूनेस्को ने 7 अक्टूबर 2023 के बाद शुरू हुए गाजा युद्ध में कई स्थानों को नुकसान पहुंचने की पुष्टि की है, जिनमें धार्मिक स्थल भी शामिल हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध के दौरान सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक स्थानों की सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण होती है।
इजरायल-हमास संघर्ष में बढ़ती मानवीय चिंता
गाजा में जारी संघर्ष केवल सैन्य कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि इसका सबसे बड़ा असर आम नागरिकों पर पड़ा है। बड़ी संख्या में लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं और भोजन, चिकित्सा सुविधाओं तथा सुरक्षित स्थानों की कमी जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं।
वहीं, इजरायल का कहना है कि उसकी सैन्य कार्रवाई का लक्ष्य हमास के ठिकानों और लड़ाकों को निशाना बनाना है। इजरायल लगातार यह दावा करता रहा है कि हमास नागरिक क्षेत्रों का इस्तेमाल सैन्य गतिविधियों के लिए करता है।
दूसरी ओर, फिलिस्तीनी पक्ष का आरोप है कि इन हमलों में आम नागरिकों और महत्वपूर्ण स्थलों को नुकसान पहुंच रहा है।
आगे क्या? शांति प्रयासों पर टिकी दुनिया की नजर
गाजा में मस्जिद पर हुए इस हमले ने एक बार फिर इजरायल-हमास संघर्ष की गंभीरता को सामने ला दिया है। जहां एक तरफ इजरायल सुरक्षा कारणों का हवाला दे रहा है, वहीं फिलिस्तीनी अधिकारी इसे नागरिक और धार्मिक स्थलों पर हमला बता रहे हैं।
अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस बात पर है कि क्या दोनों पक्ष स्थायी शांति की दिशा में आगे बढ़ पाएंगे या फिर हिंसा का यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। गाजा के लोगों के लिए सबसे बड़ी उम्मीद यही है कि संघर्ष जल्द खत्म हो और क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित हो सके।
