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सितारगंज तहसील में रिश्वत कांड पर बवाल: विजिलेंस टीम रातभर रही ‘कैद’, 20 घंटे तक ठप रहा सरकारी कामकाज, वार्ता के बाद खुला गतिरोध

The Hill India News
Last updated: July 30, 2026 11:22 am
The Hill India News
Published: July 30, 2026
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खटीमा/सितारगंज। उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर जिले की सितारगंज तहसील में रिश्वतखोरी के एक मामले ने ऐसा तूल पकड़ा कि पूरी तहसील करीब 20 घंटे तक ठप रही। विजिलेंस टीम द्वारा तहसील के दो कर्मचारियों को कथित रूप से 14 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किए जाने के बाद राजस्व कर्मियों का गुस्सा फूट पड़ा। विरोध में कर्मचारियों ने तहसील कार्यालय के मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया और अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया। स्थिति ऐसी बन गई कि कार्रवाई करने पहुंची विजिलेंस टीम पूरी रात तहसील परिसर के अंदर ही फंसी रही। आखिरकार प्रशासन, कर्मचारी संगठनों और वरिष्ठ अधिकारियों के बीच कई दौर की वार्ता के बाद गतिरोध समाप्त हुआ और तहसील में सामान्य कामकाज बहाल हो सका।

Contents
रिश्वत के आरोप में हुई कार्रवाई, फिर भड़का विरोध20 घंटे तक ठप रहा तहसील का पूरा कामकाजरातभर चलता रहा हाई-वोल्टेज ड्रामासहमति बनने के बाद खत्म हुआ आंदोलनआम जनता को मिली राहतभविष्य में फिर आंदोलन की चेतावनीएसडीएम ने कहा— अब स्थिति सामान्यपूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना मामला

रिश्वत के आरोप में हुई कार्रवाई, फिर भड़का विरोध

मामले की शुरुआत 29 जुलाई को हुई, जब विजिलेंस विभाग ने सितारगंज तहसील में एक योजनाबद्ध कार्रवाई करते हुए वरिष्ठ सहायक और संग्रह अमीन को 14 हजार रुपये की कथित रिश्वत लेने के आरोप में हिरासत में लिया। विजिलेंस की इस कार्रवाई की खबर फैलते ही तहसील परिसर में मौजूद राजस्व कर्मचारी बड़ी संख्या में एकत्र हो गए और उन्होंने कार्रवाई को एकतरफा तथा विभागीय नियमों की अनदेखी बताते हुए इसका विरोध शुरू कर दिया।

कुछ ही देर में विरोध प्रदर्शन धरने में बदल गया। कर्मचारियों ने तत्काल प्रभाव से कार्य बहिष्कार की घोषणा कर दी और तहसील के मुख्य प्रवेश द्वार पर ताला जड़ दिया। इसके चलते विजिलेंस टीम के अधिकारी और कर्मचारी रातभर तहसील परिसर से बाहर नहीं निकल सके। यह घटनाक्रम पूरे जिले में चर्चा का विषय बन गया।

20 घंटे तक ठप रहा तहसील का पूरा कामकाज

धरना और कार्य बहिष्कार का सबसे अधिक असर आम लोगों पर पड़ा। करीब 20 घंटे तक तहसील का पूरा प्रशासनिक कामकाज ठप रहा। नामांतरण, आय प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, खतौनी की नकल, भूमि अभिलेखों से जुड़े कार्य और अन्य राजस्व सेवाएं पूरी तरह प्रभावित रहीं।

दूर-दराज के गांवों से अपने जरूरी दस्तावेज बनवाने या भूमि संबंधी कार्यों के लिए पहुंचे लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ा। कई लोग बिना काम कराए मायूस होकर वापस लौट गए। सरकारी कार्यालय में कामकाज ठप होने से लोगों में नाराजगी भी देखने को मिली।

रातभर चलता रहा हाई-वोल्टेज ड्रामा

तहसील परिसर में देर रात तक तनावपूर्ण माहौल बना रहा। एक ओर विजिलेंस टीम अंदर मौजूद रही, तो दूसरी ओर कर्मचारी संगठन अपने आंदोलन पर अड़े रहे। प्रशासनिक अधिकारियों ने कई बार कर्मचारियों से बातचीत की कोशिश की, लेकिन देर रात तक कोई समाधान नहीं निकल पाया।

स्थिति को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों ने भी हस्तक्षेप किया। गुरुवार सुबह से लेकर दोपहर तक कई दौर की वार्ता चली, जिसमें प्रशासन, कर्मचारी संगठनों और संबंधित अधिकारियों ने समाधान तलाशने का प्रयास किया। लंबे मंथन के बाद आखिरकार दोनों पक्षों के बीच सहमति बन गई।

सहमति बनने के बाद खत्म हुआ आंदोलन

वार्ता सफल होने के बाद कर्मचारी संगठनों ने अपना धरना और कार्य बहिष्कार समाप्त करने की घोषणा कर दी। इसके बाद तहसील कार्यालय के मुख्य गेट पर लगाया गया ताला खोला गया और अधिकारी तथा कर्मचारी अपने-अपने कार्यालयों में लौट आए।

सहमति बनने के बाद विजिलेंस टीम ने कार्रवाई के दौरान पकड़े गए दोनों कर्मचारियों को रिहा कर दिया। इसके बाद विजिलेंस टीम भी तहसील परिसर से बाहर निकल सकी और पूरे घटनाक्रम का पटाक्षेप हुआ। हालांकि, इस पूरे मामले ने विजिलेंस की कार्रवाई और कर्मचारियों के विरोध को लेकर कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं।

आम जनता को मिली राहत

करीब 20 घंटे तक सरकारी कामकाज प्रभावित रहने के बाद जब तहसील में सामान्य व्यवस्था बहाल हुई तो सबसे बड़ी राहत आम नागरिकों को मिली। जिन लोगों के प्रमाण पत्र, भूमि अभिलेख या अन्य जरूरी कार्य लंबित रह गए थे, वे दोबारा कार्यालय पहुंचकर अपना काम करा सके।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी विभागों के बीच टकराव का खामियाजा आम जनता को नहीं भुगतना चाहिए। प्रशासनिक विवादों का समाधान बातचीत से होना चाहिए ताकि नागरिक सेवाएं बाधित न हों।

भविष्य में फिर आंदोलन की चेतावनी

कर्मचारी संगठनों ने स्पष्ट किया है कि यदि भविष्य में कर्मचारियों के हितों की अनदेखी की गई या बिना उचित प्रक्रिया के किसी प्रकार की कार्रवाई की गई तो वे दोबारा आंदोलन का रास्ता अपनाने से पीछे नहीं हटेंगे। उनका कहना है कि विभागीय कार्रवाई पूरी पारदर्शिता और निर्धारित नियमों के तहत होनी चाहिए।

दूसरी ओर, विजिलेंस विभाग की कार्रवाई को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। भ्रष्टाचार के मामलों में सख्ती जरूरी मानी जा रही है, लेकिन इस कार्रवाई के बाद जिस तरह का टकराव सामने आया, उसने प्रशासनिक व्यवस्था पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

एसडीएम ने कहा— अब स्थिति सामान्य

इस पूरे घटनाक्रम पर एसडीएम तुषार सैनी ने कहा कि सभी पक्षों के साथ सकारात्मक वार्ता के माध्यम से समाधान निकाल लिया गया है। उन्होंने बताया कि अब तहसील में सामान्य व्यवस्था बहाल हो चुकी है और सभी राजस्व सेवाएं पहले की तरह संचालित की जा रही हैं।

उन्होंने नागरिकों से अपील की कि जिन लोगों के कार्य आंदोलन के कारण प्रभावित हुए थे, वे निश्चिंत होकर तहसील पहुंचें। प्रशासन उनकी समस्याओं का शीघ्र समाधान करने के लिए प्रतिबद्ध है।

पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना मामला

सितारगंज तहसील का यह घटनाक्रम उत्तराखंड के प्रशासनिक हलकों में दिनभर चर्चा का विषय बना रहा। एक ओर रिश्वत के आरोप में विजिलेंस की कार्रवाई, दूसरी ओर कर्मचारियों का विरोध और फिर पूरी रात चला गतिरोध—इन सबने इस मामले को प्रदेश की सबसे चर्चित घटनाओं में शामिल कर दिया। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि भ्रष्टाचार के आरोपों की आगे क्या जांच होती है और प्रशासन भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए क्या कदम उठाता है।

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