लक्सर (हरिद्वार)। उत्तराखंड के हरिद्वार जनपद अंतर्गत लक्सर क्षेत्र से एक बेहद संवेदनशील और कानून को ठेंगा दिखाने वाला मामला सामने आया है। यहाँ के रणसूरा गांव में एक विवाहिता पर उसके ही पति और उसके दो साथियों द्वारा घर में घुसकर जानलेवा हमला करने, गाली-गलौज करने और सरेआम कानूनन प्रतिबंधित ‘तीन तलाक’ देने का गंभीर मामला प्रकाश में आया है। इस घटना ने एक बार फिर समाज में महिलाओं की सुरक्षा और दहेज जैसी कुरीतियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पीड़ित महिला की लिखित तहरीर के आधार पर स्थानीय लक्सर कोतवाली पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी पति और उसके दो सहयोगियों के खिलाफ संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि आरोपियों की धरपकड़ के लिए टीमें रवाना कर दी गई हैं और मामले की बारीकी से तफ्तीश की जा रही है।
निकाह के बाद से ही शुरू हो गया था दहेज का तांडव
यह कहानी सिर्फ एक शारीरिक हमले की नहीं है, बल्कि इसके पीछे महीनों से छिपी मानसिक प्रताड़ना और एक मां का दर्द भी शामिल है। पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार, रणसूरा गांव निवासी पीड़िता का निकाह 15 मार्च 2023 को मंगलौर क्षेत्र के बिजौली गांव निवासी एक युवक के साथ पूरे मुस्लिम रीति-रिवाज और धूमधाम के साथ हुआ था।
विवाहिता का आरोप है कि निकाह के कुछ दिनों बाद से ही ससुराल पक्ष का असली रंग सामने आने लगा। कम दहेज लाने का ताना देकर उसे शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा। पीड़िता ने हर जुल्म इस उम्मीद में सहा कि शायद वक्त के साथ चीजें बदल जाएंगी, लेकिन लालच की आग ठंडी नहीं हुई।
नवजात की मौत का गम और मायके में शरण
पीड़िता की जिंदगी में दुखों का पहाड़ तब टूटा जब उसने एक बच्चे को जन्म दिया। शिकायत में बताया गया है कि 3 अक्टूबर 2025 को उसने एक सुंदर पुत्र को जन्म दिया था। घर में किलकारियां गूंजीं तो लगा कि शायद अब सब ठीक हो जाएगा, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। जन्म के महज कुछ दिनों बाद ही, 10 अक्टूबर को उस मासूम नवजात की मृत्यु हो गई।
“एक तरफ नवजात बच्चे को खोने का गम और दूसरी तरफ ससुराल वालों की बेरुखी ने महिला को भीतर से तोड़ दिया।”
इस असहनीय दुख और ससुराल पक्ष के लगातार बढ़ते उत्पीड़न से तंग आकर पीड़िता 18 अक्टूबर 2025 से अपने मायके (रणसूरा गांव) में आकर रहने लगी। वह अपने इस गहरे सदमे से उबरने की कोशिश कर ही रही थी कि उसके पति ने इस खौफनाक वारदात को अंजाम दे डाला।
मायके में घुसकर कांच की बोतल से हमला, लहूलुहान हुई पीड़िता
घटना वाले दिन शाम के करीब पांच बजे, जब पीड़िता अपने मायके के घर पर मौजूद थी, तभी उसका पति अपने दो अन्य साथियों के साथ अचानक वहां धमक पड़ा। घर में घुसते ही तीनों आरोपियों ने गाली-गलौज शुरू कर दी। जब महिला और उसके परिजनों ने इस अभद्र व्यवहार का विरोध किया, तो आरोपी पति आगबबूला हो गया।
आरोप है कि गुस्से में तमतमाए पति ने पास ही पड़ी कांच की एक टूटी हुई बोतल उठाई और अपनी पत्नी पर जानलेवा हमला कर दिया। इस अचानक हुए हमले में कांच के टुकड़े महिला के दाहिने कान और गर्दन पर जा लगे, जिससे वह लहूलुहान हो गई और जोर-जोर से चीखने लगी। महिला की चीख-पुकार और शोरशराबा सुनकर आसपास के ग्रामीण और पड़ोसी तुरंत मौके की तरफ दौड़े। ग्रामीणों को आता देख हमलावर बैकफुट पर आए, जिसके बाद मामला शांत हो सका।
साथियों के उकसाने पर सरेआम दिया ‘तीन तलाक’
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे हैरान करने वाला मोड़ तब आया जब मारपीट के बाद भी पति का गुस्सा शांत नहीं हुआ। आरोप है कि मौके पर मौजूद पति के दोनों साथियों ने उसे और ज्यादा भड़काना शुरू किया। साथियों के उकसावे में आकर पति ने कानून की परवाह किए बिना, पत्नी की इच्छा के विरुद्ध सरेआम उसे ‘तीन तलाक’ (तलाक, तलाक, तलाक) कह दिया और वहां से फरार हो गया।
उल्लेखनीय है कि देश में तीन तलाक (Triple Talaq) को कानूनी रूप से प्रतिबंधित और दंडनीय अपराध घोषित किया जा चुका है, इसके बावजूद इस तरह की घटनाएं कानूनी सख्ती को चुनौती देती नजर आ रही हैं। यही वजह है कि यह लक्सर तीन तलाक मामला 2026 स्थानीय स्तर पर चर्चा का मुख्य विषय बन गया है।
क्या कहना है पुलिस प्रशासन का?
इस पूरे मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए लक्सर कोतवाली पुलिस पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रही है। मामले की जानकारी देते हुए कोतवाली प्रभारी प्रवीण सिंह कोश्यारी ने बताया:
“महिला की तहरीर के आधार पर मुख्य आरोपी पति समेत तीन लोगों के खिलाफ संबंधित गंभीर धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कर लिया गया है। पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया गया है। मामले की निष्पक्ष और गहनता से जांच की जा रही है। विवेचना में जो भी तथ्य और साक्ष्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आरोपियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।”
न्याय की उम्मीद में पीड़ित परिवार
यह घटना समाज के उस काले चेहरे को उजागर करती है जहाँ आज भी बेटियों को अपनी जान बचाने के लिए मायके की शरण लेनी पड़ती है, और वहाँ भी वे सुरक्षित नहीं हैं। एक मां जिसने कुछ समय पहले ही अपने कलेजे के टुकड़े को खोया हो, उस पर इस तरह का जानलेवा हमला और मानसिक आघात करना अमानवीयता की पराकाष्ठा है। फिलहाल, पीड़िता का परिवार डरा हुआ है लेकिन उन्हें कानून और पुलिस प्रशासन पर पूरा भरोसा है कि उन्हें इस घिनौने कृत्य के खिलाफ न्याय जरूर मिलेगा। देखना होगा कि लक्सर पुलिस कितनी जल्दी इन आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचाती है।
