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The Hill India > Blog > उत्तराखंड > आस्था का सैलाब और मौसम की चुनौती: तुंगनाथ धाम में उमड़ा श्रद्धालुओं का हुजूम, चंद्रशिला ट्रैक पर दोपहर 12 बजे के बाद नो-एंट्री
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आस्था का सैलाब और मौसम की चुनौती: तुंगनाथ धाम में उमड़ा श्रद्धालुओं का हुजूम, चंद्रशिला ट्रैक पर दोपहर 12 बजे के बाद नो-एंट्री

The Hill India News
Last updated: June 13, 2026 3:16 pm
The Hill India News
Published: June 13, 2026
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रुद्रप्रयाग: उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्र में स्थित और विश्व के सर्वाधिक ऊंचाई पर प्रतिष्ठित शिव मंदिरों में शुमार, तृतीय केदार श्री तुंगनाथ धाम में इन दिनों आस्था का अभूतपूर्व जनसैलाब उमड़ रहा है। कपाट खुलने और चारधाम यात्रा सीजन की शुरुआत के बाद से ही इस पवित्र धाम में दर्शन के लिए न केवल देश के कोने-कोने से, बल्कि विदेशों से भी भारी संख्या में शिवभक्त पहुंच रहे हैं। अब तक 60 हजार से अधिक श्रद्धालु बाबा तुंगनाथ के चरणों में शीश नवा चुके हैं, जो इस वर्ष श्रद्धालुओं के बढ़ते उत्साह और अटूट आस्था का जीवंत प्रमाण है।

Contents
सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद: पुलिस ने जारी की सख्त गाइडलाइंसमौसम विभाग का गंभीर अलर्ट: दोपहर 12 बजे के बाद चंद्रशिला ट्रैक पूरी तरह बंद“श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोपरि”: एसएचओ मनोज नेगी की भावुक व सतर्क अपीलडिजिटल और जमीनी स्तर पर समन्वय

हालांकि, इस भारी भीड़ के बीच हिमालयी क्षेत्र के पल-पल बदलते मौसम ने प्रशासन और तीर्थयात्रियों के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। मौसम विभाग द्वारा जारी भारी बारिश और ओलावृष्टि के अलर्ट के बाद जिला प्रशासन ने सुरक्षा के लिहाज से बेहद कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।

सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद: पुलिस ने जारी की सख्त गाइडलाइंस

श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती आमद को देखते हुए उत्तराखंड पुलिस (रुद्रप्रयाग) और स्थानीय जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। संकरे पहाड़ी रास्तों और मंदिर परिसर की सीमित क्षमता को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ कर दिया गया है।

रुद्रप्रयाग पुलिस ने तीर्थयात्रियों के लिए एक महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है। पुलिस प्रशासन ने अपील की है कि:

  • सभी श्रद्धालु मंदिर परिसर में अनुशासित होकर केवल निर्धारित कतार में लगकर ही दर्शन करें।

  • दर्शन लाभ प्राप्त करने के बाद अनावश्यक रूप से मंदिर परिसर या संकरे रास्तों पर भीड़ एकत्र न करें, ताकि पीछे से आ रहे अन्य भक्तों को असुविधा न हो।

  • स्थानीय प्रशासन और तैनात सुरक्षाकर्मियों के निर्देशों का पूरी तरह पालन करें।

प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि प्रत्येक श्रद्धालु को सुगम, व्यवस्थित और सुरक्षित ढंग से बाबा के दर्शन कराना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है, लेकिन इसके लिए देवभूमि आने वाले सभी तीर्थयात्रियों का सक्रिय सहयोग अनिवार्य है।

मौसम विभाग का गंभीर अलर्ट: दोपहर 12 बजे के बाद चंद्रशिला ट्रैक पूरी तरह बंद

आस्था के इस उल्लास के बीच मौसम विभाग (IMD) की हालिया चेतावनी ने प्रशासन की चिंताएं बढ़ा दी हैं। मौसम वैज्ञानिकों ने उत्तराखंड के उच्च हिमालयी और पर्वतीय क्षेत्रों में भारी वर्षा, ओलावृष्टि (Hailstorm) और आकाशीय बिजली (Lightning) गिरने की गंभीर आशंका जताई है। तुंगनाथ धाम की अत्यधिक ऊंचाई (समुद्र तल से लगभग 3,680 मीटर) को देखते हुए यहां मौसम का मिजाज पल भर में बदल जाता है।

इस चेतावनी को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन ने एक बड़ा और कड़ा निर्णय लिया है। तुंगनाथ मंदिर से आगे बढ़ने वाले प्रसिद्ध चंद्रशिला ट्रैक को प्रतिदिन दोपहर 12:00 बजे के बाद पूर्ण रूप से बंद करने का आदेश जारी किया गया है।

रुद्रप्रयाग पुलिस ने स्पष्ट और सख्त निर्देश जारी किए हैं कि दोपहर 12 बजे के बाद किसी भी श्रद्धालु या ट्रैकर को चंद्रशिला शिखर की ओर जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके पीछे मुख्य कारण यह है कि दोपहर के बाद ऊंचाई वाले इन क्षेत्रों में अचानक घना कोहरा छा जाता है, तेज बर्फीली हवाएं चलने लगती हैं और खड़ी चट्टानी रास्तों पर अत्यधिक फिसलन हो जाती है। ऐसे में ट्रेक पर फंसे यात्रियों की जान जोखिम में पड़ सकती है, और विषम परिस्थितियों के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन चलाना भी बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

“श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोपरि”: एसएचओ मनोज नेगी की भावुक व सतर्क अपील

पवित्र यात्रा को सुरक्षित और निर्बाध बनाने के लिए जमीनी स्तर पर तैनात पुलिस बल लगातार यात्रियों को जागरूक कर रहा है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए स्थानीय थाना प्रभारी (एसएचओ) मनोज नेगी ने तीर्थयात्रियों से बेहद भावुक और सतर्क रहने वाली अपील की है।

“बाबा के दर पर आने वाले हर भक्त की सुरक्षा हमारे लिए सर्वोपरि है। हम चाहते हैं कि आप यहां से सुखद यादें लेकर लौटें, न कि किसी हादसे का शिकार बनें। इसलिए, यात्रा शुरू करने से पहले उस दिन के मौसम की सटीक जानकारी अवश्य प्राप्त कर लें। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में तापमान तेजी से गिरता है, अतः अपने साथ पर्याप्त गर्म कपड़े, रेनकोट और आवश्यक जीवन रक्षक दवाइयां जरूर रखें।”

— मनोज नेगी, एसएचओ

अधिकारियों ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि पहाड़ी रास्तों पर की गई थोड़ी सी भी लापरवाही या सुरक्षा मानकों की अनदेखी किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। मौसम संबंधी चेतावनियों को हल्के में न लेकर उन्हें गंभीरता से लेना अत्यंत आवश्यक है।

डिजिटल और जमीनी स्तर पर समन्वय

प्रशासन इस बार केवल भौतिक रूप से ही नहीं, बल्कि डिजिटल माध्यमों से भी यात्रियों को पल-पल की अपडेट दे रहा है। रुद्रप्रयाग पुलिस के सोशल मीडिया हैंडल और यात्रा मार्गों पर लगे लाउडस्पीकरों के माध्यम से लगातार चंद्रशिला ट्रैक की समय-सीमा और मौसम के मिजाज की घोषणा की जा रही है। स्थानीय होटल व्यवसायियों और होमस्टे संचालकों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने यहां ठहरे मेहमानों को दोपहर 12 बजे वाले नियम से अवगत कराएं ताकि किसी को भी असुविधा का सामना न करना पड़े।

तृतीय केदार की यह यात्रा आत्मिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र है। यदि श्रद्धालु प्रशासन की इस निर्धारित कतार और समय-सीमा संबंधी गाइडलाइंस का पालन करते हैं, तो वे न केवल स्वयं सुरक्षित रहेंगे बल्कि देवभूमि की पावन व्यवस्था को बनाए रखने में भी अपना अमूल्य योगदान देंगे।

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