देहरादून: उत्तराखंड में उपनल के माध्यम से विभिन्न सरकारी विभागों में आउटसोर्सिंग के आधार पर लंबे समय से सेवाएं दे रहे कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने उपनल कर्मचारियों को न्यूनतम वेतनमान और महंगाई भत्ते का लाभ दिए जाने की प्रक्रिया को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। शासन के इस फैसले से बड़ी संख्या में कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद है। खास बात यह है कि कर्मचारियों को उनकी नियुक्ति अवधि के आधार पर अलग-अलग चरणों में न्यूनतम वेतनमान और महंगाई भत्ते का लाभ देने की व्यवस्था तय की गई है।
सैनिक कल्याण विभाग की ओर से 14 सितंबर 2026 को जारी निर्देश में उपनल के माध्यम से कार्यरत कर्मचारियों के भुगतान, समायोजन और सेवा से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं को स्पष्ट किया गया है। यह कार्रवाई हाईकोर्ट के आदेशों के अनुपालन तथा पूर्व में जारी शासनादेशों के क्रम में की गई है। सरकार ने अलग-अलग समय अवधि में नियुक्त हुए उपनल कर्मचारियों के लिए लाभ देने की समयसीमा भी निर्धारित कर दी है।
तीन चरणों में मिलेगा न्यूनतम वेतनमान और महंगाई भत्ता
शासन के नए निर्देशों में उपनल कर्मचारियों को न्यूनतम वेतनमान और महंगाई भत्ते का लाभ देने के लिए तीन अलग-अलग चरण निर्धारित किए गए हैं। इसका मतलब यह है कि सभी कर्मचारियों को एक साथ लाभ देने के बजाय उनकी नियुक्ति की अवधि के आधार पर क्रमवार कार्रवाई की जाएगी।
पहले चरण में उन उपनल कर्मचारियों को रखा गया है, जो 1 जनवरी 2016 से पहले नियुक्त हुए थे और वर्तमान में भी सेवाएं दे रहे हैं। इन कर्मचारियों के संबंध में शासन स्तर पर कार्रवाई पहले से जारी है। लंबे समय से सेवा दे रहे इन कर्मचारियों के लिए यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दूसरे चरण में 1 जनवरी 2016 से 12 नवंबर 2018 के बीच नियुक्त हुए उपनल कर्मचारियों को शामिल किया गया है। शासन के निर्देश के अनुसार इन कर्मचारियों को न्यूनतम वेतनमान और महंगाई भत्ते का लाभ देने की कार्रवाई 9 नवंबर 2026 से शुरू की जाएगी।
वहीं तीसरे चरण में 13 नवंबर 2018 से 15 अक्टूबर 2024 के बीच नियुक्त किए गए उपनल कर्मचारियों को रखा गया है। इन कर्मचारियों को न्यूनतम वेतनमान और महंगाई भत्ते का लाभ देने की कार्रवाई 1 अप्रैल 2027 से शुरू की जाएगी।
इस तरह सरकार ने उपनल कर्मचारियों को उनकी नियुक्ति अवधि के आधार पर तीन श्रेणियों में बांटते हुए लाभ दिए जाने की प्रक्रिया और समयसीमा स्पष्ट कर दी है।
2016 से पहले के कर्मचारियों को Artificial Break पर बड़ी राहत
उपनल कर्मचारियों की सेवा में आने वाले Artificial Break यानी कृत्रिम सेवा व्यवधान का मुद्दा लंबे समय से महत्वपूर्ण रहा है। नए निर्देशों में इस मामले को लेकर भी स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास किया गया है।
सैनिक कल्याण विभाग की ओर से जारी निर्देश में 20 फरवरी 2026 के शासनादेश में उल्लेखित संबंधित निरंतर योजनित शर्त/प्रतिबंध को विलोपित करते हुए 1 जनवरी 2016 से पहले से कार्यरत और वर्तमान में भी सेवाएं दे रहे उपनल कर्मचारियों को न्यूनतम वेतनमान तथा महंगाई भत्ते का लाभ देने की व्यवस्था की गई है।
इस फैसले को उन कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है, जो वर्षों से विभागों में सेवाएं दे रहे हैं और जिनकी सेवा निरंतरता को लेकर कृत्रिम ब्रेक जैसी स्थिति सामने आती रही है। ऐसे कर्मचारियों को अब निर्धारित व्यवस्था के तहत लाभ मिलने का रास्ता साफ हुआ है।
स्वीकृत पदों से अधिक कर्मचारी हैं तो होगा समायोजन
सरकार ने उन विभागों के लिए भी व्यवस्था तय की है, जहां स्वीकृत पदों की संख्या की तुलना में उपनल के माध्यम से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं। यानी किसी विभाग में जितने पद स्वीकृत हैं, उससे अधिक संख्या में उपनल कर्मचारी काम कर रहे हैं तो उनके समायोजन के लिए भी प्रक्रिया निर्धारित की गई है।
शासन के निर्देश के अनुसार ऐसे मामलों में Date of Joining यानी नियुक्ति/कार्यभार ग्रहण करने की तारीख के आधार पर वरिष्ठता क्रम निर्धारित किया जाएगा। पहले वरिष्ठ कर्मचारियों को उपलब्ध स्वीकृत पदों के सापेक्ष समायोजित किया जाएगा।
इसके बाद जो कर्मचारी स्वीकृत पदों की संख्या से अतिरिक्त रह जाएंगे, उनके लिए दूसरे विभागों में उपलब्ध समकक्ष रिक्त पदों के सापेक्ष समायोजन की व्यवस्था की जाएगी। यदि दूसरे विभागों में भी समायोजन संभव नहीं हो पाता है, तो ऐसे मामलों में अधिसंख्यक पदों के सृजन की व्यवस्था की जाएगी।
यह प्रावधान उन विभागों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां लंबे समय से स्वीकृत पदों और वास्तविक रूप से कार्यरत उपनल कर्मचारियों की संख्या के बीच अंतर बना हुआ है।
समायोजन तक कर्मचारियों को मिलता रहेगा मानदेय
शासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि जब तक उपनल कर्मचारियों का दूसरे विभागों में स्वीकृत अथवा अधिसंख्यक पदों के सापेक्ष समायोजन नहीं हो जाता, तब तक उन्हें निर्धारित व्यवस्था के तहत मानदेय का भुगतान किया जाएगा।
इस अवधि में कर्मचारियों को अचानक भुगतान संबंधी परेशानी न हो, इसके लिए सैनिक कल्याण विभाग के 3 फरवरी 2026 के शासनादेश के अनुसार मानदेय भुगतान की व्यवस्था जारी रखने की बात कही गई है।
इतना ही नहीं, समायोजन अथवा अधिसंख्यक पद सृजित होने के बाद 1 मार्च 2026 से वास्तविक समायोजन तक की अवधि में देय अंतर की धनराशि का एरियर भी भुगतान किए जाने की व्यवस्था की गई है।
यानी संबंधित कर्मचारियों को केवल भविष्य में मिलने वाले लाभ की ही बात नहीं की गई है, बल्कि निर्धारित अवधि के अंतर की धनराशि के भुगतान को लेकर भी व्यवस्था तय की गई है।
शासन स्तर पर बनेगी अलग व्यवस्था और समिति
अतिरिक्त उपनल कर्मचारियों के समायोजन के लिए शासन स्तर पर अलग व्यवस्था किए जाने और समिति गठित किए जाने की बात भी निर्देशों में कही गई है। इसका उद्देश्य ऐसे कर्मचारियों के समायोजन की प्रक्रिया को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाना है।
इस व्यवस्था के तहत पहले स्वीकृत पदों की स्थिति देखी जाएगी। इसके बाद जरूरत के अनुसार दूसरे विभागों में उपलब्ध समकक्ष रिक्त पदों की जानकारी ली जाएगी। यदि वहां भी समायोजन की संभावना नहीं बनती है तो अधिसंख्यक पद सृजित करने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
इससे उन कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिनकी सेवाएं विभागीय जरूरत के कारण जारी तो हैं, लेकिन उनके सापेक्ष स्वीकृत पद उपलब्ध नहीं हैं।
बोर्ड-निगम और स्वायत्त संस्थाओं के लिए भी निर्देश
सरकार ने निगमों, परिषदों और स्वायत्तशासी संस्थाओं में उपनल के माध्यम से कार्यरत कर्मचारियों के संबंध में भी स्थिति स्पष्ट कर दी है।
हाईकोर्ट के आदेशों के अनुपालन में इन संस्थाओं को अपने स्तर पर निर्णय लेना होगा कि उनके यहां उपनल के माध्यम से कार्यरत कर्मचारियों को न्यूनतम वेतनमान और महंगाई भत्ते का लाभ किस प्रकार दिया जाए।
हालांकि यहां एक महत्वपूर्ण बात यह है कि इसका आर्थिक भार संबंधित निगम, परिषद या स्वायत्तशासी संस्था को अपने संसाधनों से उठाना होगा। राज्य सरकार की ओर से इन संस्थाओं को इसके लिए अतिरिक्त धनराशि उपलब्ध नहीं कराई जाएगी।
इसका मतलब यह हुआ कि सरकारी विभागों और बोर्ड-निगमों के लिए भुगतान की वित्तीय व्यवस्था अलग-अलग तरीके से लागू होगी।
लंबे समय से चल रही मांग के बीच अहम कदम
उपनल कर्मचारियों की ओर से लंबे समय से न्यूनतम वेतनमान, महंगाई भत्ता, सेवा निरंतरता और अन्य सुविधाओं को लेकर मांग उठती रही है। ऐसे में शासन की ओर से जारी यह विस्तृत दिशा-निर्देश कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सबसे बड़ी बात यह है कि सरकार ने केवल लाभ देने की बात नहीं कही है, बल्कि अलग-अलग नियुक्ति अवधि के कर्मचारियों के लिए कार्रवाई शुरू करने की निश्चित तारीखें भी निर्धारित की हैं। इससे कर्मचारियों को यह समझने में आसानी होगी कि उनकी श्रेणी के अनुसार प्रक्रिया कब शुरू होगी।
1 जनवरी 2016 से पहले के कर्मचारियों पर कार्रवाई जारी है, 1 जनवरी 2016 से 12 नवंबर 2018 तक नियुक्त कर्मचारियों के लिए 9 नवंबर 2026 से और 13 नवंबर 2018 से 15 अक्टूबर 2024 तक नियुक्त कर्मचारियों के लिए 1 अप्रैल 2027 से प्रक्रिया शुरू होगी।
कुल मिलाकर, उत्तराखंड के उपनल कर्मचारियों के लिए शासन के ये निर्देश काफी महत्वपूर्ण हैं। न्यूनतम वेतनमान और महंगाई भत्ते का लाभ, Artificial Break को लेकर राहत, अतिरिक्त कर्मचारियों के समायोजन, अधिसंख्यक पदों के सृजन और एरियर भुगतान जैसी व्यवस्थाओं ने इस पूरे मामले को नई दिशा दी है। अब कर्मचारियों की नजर इस बात पर रहेगी कि शासन के निर्देशों के अनुसार संबंधित विभागों में आगे की कार्रवाई किस गति से होती है और उन्हें वास्तविक रूप से इसका लाभ कब से मिलना शुरू होता है।
