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Reading: IMA की 158वीं पासिंग आउट परेड आज, पहली बार 9 महिला कैडेट्स ‘अंतिम पग’ पार कर रचेंगी इतिहास; राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू होंगी गवाह
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The Hill India > Blog > उत्तराखंड > IMA की 158वीं पासिंग आउट परेड आज, पहली बार 9 महिला कैडेट्स ‘अंतिम पग’ पार कर रचेंगी इतिहास; राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू होंगी गवाह
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IMA की 158वीं पासिंग आउट परेड आज, पहली बार 9 महिला कैडेट्स ‘अंतिम पग’ पार कर रचेंगी इतिहास; राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू होंगी गवाह

The Hill India News
Last updated: June 13, 2026 1:41 am
The Hill India News
Published: June 13, 2026
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देहरादून (ब्यूरो)। भारतीय सैन्य कौशल, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति का सबसे अनुपम नजारा आज उत्तराखंड की वादियों में स्थित देहरादून के भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) में देखने को मिल रहा है। देश की इस प्रतिष्ठित सैन्य संस्था में आज 158वीं आईएमए पासिंग आउट परेड (IMA Passing Out Parade 2026) का भव्य आगाज हो चुका है। चटक धूप और देशभक्ति के तरानों के बीच, जब भारतीय सेना के भावी नायकों ने कदमताल शुरू की, तो पूरा चैटवुड हॉल परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

Contents
कुल 515 जांबाज कैडेट्स होंगे पास आउट, 34 विदेशी मित्र भी शामिलइतिहास में पहली बार: 9 महिला कैडेट्स की ‘कदमताल’ से कांपा चैटवुड परिसरचैटवुड बिल्डिंग में गूंजी ‘धीमी चाल’ की धुन, राष्ट्रपति ने थपथपाई पीठकैडेट्स की संख्या का मुख्य विवरण:कठिन तपस्या का अंत: जब आंसुओं और मुस्कान के साथ पार हुआ ‘अंतिम पग’नए भारत की नई सेना: चुनौतियों से निपटने को तैयार युवा नेतृत्व

इस बार की पासिंग आउट परेड न केवल भारतीय सेना के इतिहास में एक नया अध्याय लिख रही है, बल्कि यह नारी शक्ति के एक नए युग की शुरुआत की भी गवाह बन रही है। इस ऐतिहासिक अवसर पर देश की प्रथम नागरिक और सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमांडर, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद हैं और परेड की सलामी ले रही हैं।

कुल 515 जांबाज कैडेट्स होंगे पास आउट, 34 विदेशी मित्र भी शामिल

आज देहरादून का आईएमए परिसर उन पिताओं के सीने को गर्व से चौड़ा कर रहा है और उन माताओं की आंखों में खुशी के आंसू ला रहा है, जिनके लाडले आज देश की संप्रभुता की रक्षा की कसम खा रहे हैं। इस ऐतिहासिक आईएमए पासिंग आउट परेड 2026 में कुल 515 अधिकारी कैडेट पास आउट होकर सेना की मुख्यधारा में शामिल हो रहे हैं।

इन 515 जांबाज अधिकारियों में से 481 भारतीय अधिकारी कैडेट हैं, जो देश के कोने-कोने से आकर कठोर प्रशिक्षण के बाद आज इस मुकाम पर पहुंचे हैं। वहीं, भारत की वैश्विक कूटनीति और मजबूत सैन्य संबंधों की बानगी पेश करते हुए, 16 मित्र देशों के 34 विदेशी अधिकारी कैडेट भी आज प्रशिक्षण पूरा कर पास आउट हो रहे हैं। ये विदेशी कैडेट अब अपने-अपने देशों की सेनाओं में शीर्ष पदों पर बैठकर भारत में सीखे गए सैन्य कौशल का परचम लहराएंगे।

इतिहास में पहली बार: 9 महिला कैडेट्स की ‘कदमताल’ से कांपा चैटवुड परिसर

इस साल की परेड कई मायनों में अनूठी और ऐतिहासिक है, जो इसे सालों साल तक याद रखे जाने योग्य बनाती है। आईएमए के इतिहास में यह पहली बार हो रहा है जब अकादमी से प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली 9 महिला कैडेट्स भी मुख्य पासिंग आउट परेड में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कदमताल कर रही हैं।

“यह सिर्फ एक परेड नहीं है, बल्कि यह रूढ़ियों को तोड़कर देश की रक्षा में आधी आबादी की पूरी हिस्सेदारी का शंखनाद है।”

इन 9 महिला कैडेट्स ने पिछले एक वर्ष के दौरान आईएमए के उस बेहद कठिन और थका देने वाले सैन्य प्रशिक्षण को पूरा किया है, जिसे दुनिया के सबसे कड़े सैन्य ट्रेनिंग प्रोग्राम्स में गिना जाता है। कीचड़, पहाड़, कड़कड़ाती ठंड और मानसिक दबाव की हर कसौटी पर खरी उतरने के बाद आज ये बेटियां ‘अंतिम पग’ (The Final Step) पार कर भारतीय सेना और अपने संबंधित देशों की सेनाओं में एक पूर्ण अधिकारी के रूप में अपनी नई और चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारियां संभालेंगी।

चैटवुड बिल्डिंग में गूंजी ‘धीमी चाल’ की धुन, राष्ट्रपति ने थपथपाई पीठ

कार्यक्रम की शुरुआत बेहद अनुशासित और तय सैन्य प्रोटोकॉल के साथ हुई। सेना के परंपरा के अनुसार, कंपनी सार्जेंट मेजर सबसे पहले ऐतिहासिक चैटवुड बिल्डिंग के मुख्य परिसर (ड्रिल स्क्वायर) में पहुंचे। इसके बाद जैसे ही राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का आगमन हुआ, पूरा परिसर ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम’ के उद्घोष से गुंजायमान हो गया।

राष्ट्रपति मुर्मू ने परेड का निरीक्षण किया और कैडेट्स के शानदार टर्नआउट और मार्च पास्ट की सराहना की। इस दौरान शानदार प्रदर्शन करने वाले कैडेट्स को ‘स्वॉर्ड ऑफ ऑनर’ और गोल्ड, सिल्वर व ब्रॉन्ज मेडल से नवाजा गया। राष्ट्रपति ने युवा अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज का दिन देश के लिए गौरव का दिन है, और सेना में महिलाओं की यह बढ़ती भागीदारी नए भारत की सक्षम तस्वीर को बयां करती है।

कैडेट्स की संख्या का मुख्य विवरण:

कैडेट्स की श्रेणी कुल संख्या मुख्य जिम्मेदारी
भारतीय अधिकारी कैडेट 481 भारतीय सेना के विभिन्न विंग्स में तैनाती
विदेशी मित्र देशों के कैडेट 34 (16 देश) अपने गृह देशों की सेनाओं में नेतृत्व
महिला अधिकारी कैडेट 09 (ऐतिहासिक) सेना में पहली बार आईएमए से सीधी कमान
कुल पास आउट कैडेट्स 515 वैश्विक सैन्य कमान

कठिन तपस्या का अंत: जब आंसुओं और मुस्कान के साथ पार हुआ ‘अंतिम पग’

आईएमए की पासिंग आउट परेड का सबसे भावुक क्षण वह होता है, जब कैडेट्स ‘धीमी चाल’ से चलते हुए चैटवुड हॉल के मुख्य द्वार पर बने ‘अंतिम पग’ को पार करते हैं। जैसे ही इन 515 कैडेट्स के कदम इस अंतिम रेखा के पार पड़े, वे कैडेट से सीधे ‘लेफ्टिनेंट’ बन गए।

इस पल को देखने के लिए देश-विदेश से आए कैडेट्स के माता-पिता की आंखें नम थीं। किसी का बेटा देश का रखवाला बन चुका था, तो किसी की बेटी इतिहास रचकर भारत मां की सेवा के लिए तैयार खड़ी थी। ‘पीपिंग सेरेमनी’ (Pipping Ceremony) के दौरान जब माता-पिता ने अपने बच्चों के कंधों पर चमचमाते हुए सितारे लगाए, तो युवाओं के चेहरों पर एक वर्ष की कड़ी तपस्या की थकान पल भर में गायब हो गई और उसकी जगह देश सेवा के गौरव ने ले ली।

नए भारत की नई सेना: चुनौतियों से निपटने को तैयार युवा नेतृत्व

आज पास आउट होने वाले ये युवा अधिकारी ऐसे समय में भारतीय सेना का हिस्सा बन रहे हैं, जब वैश्विक परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। आधुनिक युद्ध केवल सीमाओं पर आमने-सामने की लड़ाई तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि इसमें साइबर वॉरफेयर, ड्रोन टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी तकनीकें भी शामिल हो चुकी हैं। आईएमए से मिले आधुनिक प्रशिक्षण के बूते ये नए अधिकारी इन समकालीन चुनौतियों से निपटने के लिए पूरी तरह सक्षम हैं।

आज देहरादून की पावन धरती से कसम खाकर देश की सीमाओं पर तैनात होने जा रहे इन 515 जांबाज अधिकारियों को पूरे देश की तरफ से सलाम। विशेषकर उन 9 महिला अधिकारियों को, जिन्होंने आने वाली पीढ़ियों के लिए सेना के दरवाजे और चौड़े कर दिए हैं। निश्चित रूप से, आज का यह दिन इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया है।

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