अल्मोड़ा/देहरादून: उत्तराखंड में शुक्रवार को राष्ट्रीयकृत बैंकों की बैंकिंग सेवाओं पर एक दिवसीय हड़ताल का व्यापक असर देखने को मिला। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के आह्वान पर बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों ने अपनी छह सूत्रीय मांगों को लेकर कामकाज का बहिष्कार किया और विभिन्न स्थानों पर बैंकों के बाहर प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए लंबे समय से लंबित मांगों का जल्द समाधान किए जाने की मांग उठाई।
हड़ताल के चलते प्रदेश के कई बैंक शाखाओं में सामान्य बैंकिंग कार्य प्रभावित रहा। जमा-निकासी, चेक से जुड़े काम, खातों से संबंधित जरूरी प्रक्रियाएं और अन्य बैंकिंग सेवाओं के लिए पहुंचे ग्राहकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। कई ग्राहक बैंक शाखाओं तक पहुंचे, लेकिन वहां हड़ताल होने की जानकारी मिलने के बाद उन्हें बिना काम कराए ही वापस लौटना पड़ा।
देहरादून में सेंट्रल बैंक के बाहर कर्मचारियों का प्रदर्शन
राजधानी देहरादून में भी बैंक कर्मचारियों ने एक दिवसीय हड़ताल के दौरान एश्ले हॉल चौक स्थित सेंट्रल बैंक के सामने प्रदर्शन किया। इस दौरान कर्मचारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की और सरकार से जल्द निर्णय लेने की अपील की।
प्रदर्शन के दौरान ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कन्फेडरेशन के संयोजक और यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस देहरादून यूनिट के ऑर्गेनाइजिंग जनरल सेक्रेटरी इंदर रावत ने कहा कि बैंकिंग क्षेत्र के कर्मचारी हड़ताल और प्रदर्शन का रास्ता अपनाना नहीं चाहते। उनका कहना था कि कर्मचारी चाहते हैं कि बैंकिंग व्यवस्था सामान्य रूप से चलती रहे और ग्राहकों को किसी तरह की परेशानी न हो, लेकिन लंबे समय से मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के कारण कर्मचारियों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है।
उन्होंने कहा कि फाइव-डे बैंकिंग की मांग कोई नई मांग नहीं है। कर्मचारी संगठन वर्ष 2012 से लगातार पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू करने की मांग कर रहे हैं। वर्ष 2015 में महीने के दो शनिवार को अवकाश की व्यवस्था लागू की गई थी। इसके बाद सभी शनिवार को बैंक अवकाश घोषित किए जाने की उम्मीद जताई गई थी, लेकिन अभी तक यह मांग पूरी नहीं हो सकी है।
फाइव-डे बैंकिंग की मांग सबसे प्रमुख
बैंक कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू करना शामिल है। कर्मचारियों का कहना है कि जब सप्ताह के कई क्षेत्रों में पांच दिवसीय कार्य व्यवस्था लागू हो चुकी है, तो बैंक कर्मचारियों को भी सप्ताह में दो दिन अवकाश की सुविधा मिलनी चाहिए।
कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि इससे कर्मचारियों को बेहतर कार्य-जीवन संतुलन मिलेगा और लंबे समय में बैंकिंग सेवाओं की कार्यक्षमता पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि, इस मांग को लेकर लंबे समय से सरकार और बैंक कर्मचारी संगठनों के बीच सहमति का इंतजार है।
PLI योजना को लेकर भी नाराजगी
अल्मोड़ा में प्रदर्शन कर रहे बैंक कर्मचारियों ने सरकार की परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव यानी PLI योजना को लेकर भी नाराजगी जताई। कर्मचारियों ने इसे एकतरफा और भेदभावपूर्ण बताते हुए योजना को वापस लेने की मांग की।
कर्मचारियों का कहना है कि बैंकिंग क्षेत्र में काम करने वाले सभी कर्मचारियों के हितों और योगदान को ध्यान में रखते हुए ऐसी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए, जिससे किसी वर्ग के कर्मचारियों के साथ भेदभाव न हो। प्रदर्शनकारियों ने PLI से जुड़ी विसंगतियों को दूर करने की मांग भी उठाई।
वेतन समझौते और पेंशन से जुड़े मुद्दे भी उठाए
हड़ताल के दौरान बैंक कर्मचारियों ने 11वें और 12वें द्विपक्षीय वेतन समझौते से जुड़े लंबित प्रावधानों को लागू करने की मांग की। इसके साथ ही पेंशन अपडेट करने और पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई।
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि कर्मचारियों से जुड़े कई मुद्दे लंबे समय से लंबित हैं। उनका कहना है कि इन मामलों पर जल्द निर्णय लिया जाना जरूरी है, ताकि बैंकिंग क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों के हितों की रक्षा हो सके और उन्हें न्यायपूर्ण कार्य व्यवस्था मिल सके।
तीन दिन बैंक बंद रहने से बढ़ी ग्राहकों की परेशानी
शुक्रवार की हड़ताल के बाद शनिवार और रविवार को नियमित अवकाश होने के कारण बैंकिंग सेवाओं पर लगातार तीन दिनों तक असर पड़ा। ऐसे में बैंक से जुड़े जरूरी काम कराने वाले ग्राहकों को सोमवार तक इंतजार करना पड़ा।
विशेष रूप से वे लोग प्रभावित हुए जिन्हें तत्काल नकद लेनदेन, चेक संबंधी काम, खाते से जुड़े दस्तावेज या अन्य बैंकिंग प्रक्रिया पूरी करनी थी। कुछ ग्राहकों को बैंक पहुंचने के बाद हड़ताल की जानकारी मिली, जिससे उन्हें परेशानी के साथ-साथ अपना समय भी गंवाना पड़ा।
हालांकि, डिजिटल बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और एटीएम जैसी सेवाएं कई ग्राहकों के लिए वैकल्पिक माध्यम बनी रहीं, लेकिन ऐसे बैंकिंग कार्य जिन्हें शाखा में जाकर पूरा करना जरूरी था, उनके लिए हड़ताल के कारण इंतजार करना पड़ा।
मांगें पूरी नहीं हुईं तो सितंबर में तीन दिन की हड़ताल
बैंक कर्मचारी संगठनों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। कर्मचारियों के अनुसार 28, 29 और 30 सितंबर को तीन दिवसीय हड़ताल की जाएगी।
इस चेतावनी से साफ है कि यदि सरकार और बैंक कर्मचारी संगठनों के बीच जल्द समाधान नहीं निकलता है तो आने वाले दिनों में बैंकिंग सेवाओं पर और बड़ा असर पड़ सकता है।
26 अक्टूबर से देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी
कर्मचारियों ने यह भी कहा है कि यदि तीन दिवसीय हड़ताल के बाद भी उनकी मांगों का समाधान नहीं किया गया, तो 26 अक्टूबर से देशभर में व्यापक आंदोलन और हड़ताल शुरू की जाएगी।
कर्मचारी संगठनों ने सरकार से फाइव-डे बैंकिंग लागू करने, PLI से जुड़ी विसंगतियों को दूर करने, वेतन समझौते के लंबित प्रावधानों को लागू करने, पेंशन अपडेट करने और पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करने समेत अन्य मांगों पर जल्द फैसला लेने की अपील की है।
फिलहाल शुक्रवार की एक दिवसीय हड़ताल के बाद बैंकिंग सेवाएं सोमवार से सामान्य होने की उम्मीद है, लेकिन कर्मचारियों की चेतावनी ने साफ कर दिया है कि उनकी मांगों पर जल्द समाधान नहीं हुआ तो आने वाले हफ्तों में बैंकिंग क्षेत्र में आंदोलन और तेज हो सकता है। ऐसे में सरकार और बैंक कर्मचारी संगठनों के बीच होने वाली आगामी बातचीत पर कर्मचारियों के साथ-साथ बैंकिंग सेवाओं पर निर्भर लाखों ग्राहकों की भी नजर रहेगी।
