धारचूला-तवाघाट-गुंजी मार्ग बंद, आदि कैलाश यात्रा मार्ग पर लगातार गिर रहे बोल्डर और मलबा; एक दर्जन सड़कें बंद, सीमांत क्षेत्रों में बढ़ी मुश्किलें
पिथौरागढ़। उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ में लगातार हो रही बारिश ने हालात बेहद चुनौतीपूर्ण बना दिए हैं। भारी बारिश के साथ पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और नदियों-गाड़-गधेरों के उफान पर आने से कई इलाकों में आपदा जैसे हालात पैदा हो गए हैं। धारचूला क्षेत्र में ऊंचाई वाले इलाकों में हुई तेज बारिश के बाद कुलागाड़ नदी में आई बाढ़ ने 170 फीट लंबे बैली ब्रिज को बहा दिया। इस पुल के बह जाने से चीन सीमा से जुड़े इलाकों के साथ-साथ व्यास, दारमा और चौदास घाटियों का जिला मुख्यालय और तहसील मुख्यालय से संपर्क एक बार फिर प्रभावित हो गया है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने धारचूला-तवाघाट-गुंजी मार्ग को सुरक्षा की दृष्टि से बंद कर दिया है। लोगों को भारी वाहन, यात्री वाहन या किसी भी अन्य वाहन से इस मार्ग पर आवाजाही न करने की सलाह दी गई है। दूसरी ओर, आदि कैलाश यात्रा मार्ग पर भी कई स्थानों पर पहाड़ी से अचानक बड़े-बड़े बोल्डर और मलबा गिरने की घटनाएं सामने आई हैं। ऐसे में सीमांत क्षेत्र में रहने वाले ग्रामीणों के साथ-साथ आदि कैलाश यात्रा पर जाने वाले यात्रियों की सुरक्षा को लेकर भी प्रशासन की चुनौती बढ़ गई है।
बाढ़ के तेज बहाव में बह गया 170 फीट लंबा बैली ब्रिज
धारचूला के ऊंचाई वाले इलाकों में हुई भारी बारिश के बाद कुलागाड़ नदी अचानक उफान पर आ गई। नदी का बहाव इतना तेज था कि उसने 170 फीट लंबे बैली ब्रिज को अपने साथ बहा दिया। यह पुल कुछ दिन पहले ही युद्धस्तर पर तैयार किया गया था और इसके जरिए प्रभावित सीमांत क्षेत्रों में दोबारा यातायात बहाल किया गया था।
पुल के बह जाने से एक बार फिर दारमा, व्यास और चौदास घाटियों के लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। इन क्षेत्रों का संपर्क पहले भी प्राकृतिक आपदा के कारण बाधित हो चुका है। ऐसे में कुछ ही समय के भीतर दोबारा पुल के क्षतिग्रस्त होने से स्थानीय लोगों के सामने आवागमन की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है।
खास बात यह है कि यह वही पुल था जिसे बीआरओ ने बेहद कम समय में तैयार किया था। इससे पहले 18 अगस्त को पहाड़ी से भारी बोल्डर गिरने के कारण कुलागाड़ का पुल ध्वस्त हो गया था। इसके बाद सीमांत घाटियों का तहसील मुख्यालय से करीब दो दिनों तक संपर्क पूरी तरह कट गया था।
बीआरओ ने दिन-रात मेहनत कर बनाया था नया पुल
पुराना पुल टूटने के बाद सीमा सड़क संगठन यानी बीआरओ ने युद्धस्तर पर काम शुरू किया था। बीआरओ ने सात सीमेंटेड कलवर्ट डालकर अस्थायी मार्ग तैयार किया और इसके बाद नए बैली ब्रिज के निर्माण का काम शुरू किया गया।
बताया गया कि 23 अगस्त से नए बैली ब्रिज का निर्माण शुरू हुआ था। 67 आरसीसी, ग्रेफ के ओसी चंद्र गुप्त के नेतृत्व में एक एई और छह जेई की टीम ने करीब 35 मजदूरों के साथ दिन-रात काम किया। निर्माण कार्य में एक क्रेन, एक लोडर और एक जेसीबी की मदद ली गई।
कड़ी मेहनत के बाद 27 अगस्त को 170 फीट लंबा नया बैली ब्रिज तैयार कर दिया गया था। इसके बाद 28 अगस्त से इस पुल पर यातायात भी शुरू कर दिया गया। पुल बनने के बाद सीमांत क्षेत्र के ग्रामीणों, सुरक्षा कर्मियों और स्थानीय प्रशासन ने राहत की सांस ली थी।
लेकिन प्रकृति ने एक बार फिर मुश्किल खड़ी कर दी। शुक्रवार रात कुलागाड़ में आई बाढ़ के तेज बहाव ने कुछ ही दिनों पहले तैयार किए गए इस पुल को भी बहा दिया। इससे क्षेत्र में एक बार फिर आवागमन व्यवस्था चरमरा गई है।
आदि कैलाश मार्ग पर भी मंडरा रहा खतरा
धारचूला क्षेत्र में केवल बाढ़ ही समस्या नहीं बनी हुई है, बल्कि आदि कैलाश यात्रा मार्ग पर भी लगातार भूस्खलन और बोल्डर गिरने की घटनाएं हो रही हैं। शुक्रवार को गस्कू के पास पहाड़ी से अचानक भारी बोल्डर गिरने लगे, जिसके कारण करीब एक घंटे तक यातायात बाधित रहा।
मौके पर काम कर रहे जेसीबी ऑपरेटर ने पहाड़ी से लगातार गिरते बोल्डरों को देखते हुए समय रहते मशीन को सुरक्षित स्थान पर हटा लिया। उसकी सूझबूझ के कारण एक बड़ा हादसा टल गया।
पहाड़ी से बोल्डर गिरने का सिलसिला कुछ देर थमने के बाद बीआरओ की टीम ने मौके पर पहुंचकर सड़क पर पड़े मलबे और पत्थरों को हटाया। इसके बाद यातायात को बहाल किया गया, लेकिन कुछ ही समय बाद पहाड़ी से दोबारा बड़ी मात्रा में बोल्डर गिरने लगे और सड़क फिर बंद हो गई।
बीआरओ कर्मियों ने जोखिम को देखते हुए बेहद सावधानी के साथ सड़क खोलने का काम किया। बोल्डरों का गिरना पूरी तरह रुकने के बाद ही मशीनों को प्रभावित हिस्से में भेजा गया। इस दौरान सड़क पर मौजूद लोगों और यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई।
कुलागाड़ और एलागाड़ में भी सड़कें प्रभावित
आदि कैलाश यात्रा मार्ग पर गस्कू ही एकमात्र संवेदनशील स्थान नहीं है। बारिश के कारण कुलागाड़ और एलागाड़ में भी सड़क बाधित हुई। इसके बाद मलघाट में भी सड़क पर मलबा आने से यातायात प्रभावित रहा।
पहाड़ों में लगातार बारिश के कारण जमीन और चट्टानों में नमी बढ़ने से भूस्खलन का खतरा लगातार बना हुआ है। कई स्थानों पर बिना किसी पूर्व संकेत के पहाड़ी से पत्थर और बोल्डर गिर रहे हैं। यही कारण है कि सीमांत मार्गों पर सफर करना इस समय बेहद जोखिम भरा हो गया है।
आदि कैलाश यात्रा के बीच मार्ग पर इस तरह की घटनाएं प्रशासन और बीआरओ के लिए भी बड़ी चुनौती हैं। यात्रा मार्ग को सुचारू रखने के साथ-साथ यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी जरूरी है।
धारचूला-तवाघाट-गुंजी मार्ग किया गया बंद
कुलागाड़ बैली ब्रिज के बह जाने और जगह-जगह भूस्खलन की घटनाओं के बाद पुलिस ने सुरक्षा की दृष्टि से धारचूला-तवाघाट-गुंजी मार्ग को आवागमन के लिए बंद कर दिया है।
प्रशासन की ओर से लोगों से अपील की गई है कि जब तक मार्ग सुरक्षित घोषित नहीं किया जाता, तब तक इस क्षेत्र में अनावश्यक आवाजाही न करें। खास तौर पर भारी वाहनों और यात्री वाहनों को इस मार्ग से गुजरने से बचने की सलाह दी गई है।
सीमांत क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियां पहले से ही चुनौतीपूर्ण हैं। ऐसे में बारिश के दौरान सड़क पर मलबा आने, पहाड़ी से बोल्डर गिरने और नदी-नालों के अचानक उफान पर आने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
जिले में एक दर्जन सड़कें बंद, लगातार चल रहा मार्ग खोलने का काम
पिथौरागढ़ जिले में बारिश का असर व्यापक स्तर पर देखने को मिल रहा है। प्रशासन के अनुसार बारिश के कारण करीब एक दर्जन सड़कें बंद हैं। संबंधित विभागों की टीमें लगातार प्रभावित मार्गों को खोलने में जुटी हुई हैं।
जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी भूपेंद्र महर ने लोगों से अपील की है कि बारिश और भूस्खलन के बीच सुरक्षित यात्रा करें। उनका कहना है कि बंद सड़कों को खोलने के लिए विभाग लगातार प्रयास कर रहे हैं, लेकिन मौसम और भूस्खलन की स्थिति को देखते हुए लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
प्रशासन की चुनौती इसलिए भी बड़ी है क्योंकि एक तरफ सड़कें बंद हो रही हैं, वहीं दूसरी तरफ खोले गए मार्ग पर दोबारा मलबा और बोल्डर आने का खतरा बना हुआ है। ऐसे में सड़क खोलने वाली टीमों को भी लगातार जोखिम उठाना पड़ रहा है।
सीमांत क्षेत्रों में बढ़ी चिंता
कुलागाड़ बैली ब्रिज के बहने का असर सिर्फ यातायात तक सीमित नहीं है। व्यास, दारमा और चौदास जैसी सीमांत घाटियों में रहने वाले लोगों के लिए सड़क संपर्क जीवन की बुनियादी जरूरतों से जुड़ा हुआ है। राशन, स्वास्थ्य सेवाएं, जरूरी सामान और अन्य आवश्यक सुविधाओं के लिए सड़क संपर्क बेहद महत्वपूर्ण है।
चीन सीमा से जुड़े संवेदनशील इलाकों में सड़क और पुलों की स्थिति रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में प्राकृतिक आपदा के कारण बार-बार संपर्क मार्ग बाधित होना प्रशासन और सीमा सड़क संगठन के लिए गंभीर चुनौती है।
फिलहाल प्रशासन और बीआरओ की प्राथमिकता प्रभावित मार्गों को सुरक्षित तरीके से खोलना और सीमांत क्षेत्रों में आवागमन बहाल करना है। लेकिन लगातार बारिश के बीच यह काम आसान नहीं है।
पिथौरागढ़ में मौसम की मार ने एक बार फिर पहाड़ों की संवेदनशीलता उजागर कर दी है। एक तरफ बाढ़ के तेज बहाव में कुछ ही दिनों पहले बनाया गया 170 फीट लंबा बैली ब्रिज बह गया, तो दूसरी तरफ आदि कैलाश मार्ग पर पहाड़ियों से गिरते बोल्डर लोगों के लिए खतरा बने हुए हैं। ऐसे में प्रशासन की अपील साफ है—बारिश और भूस्खलन के बीच अनावश्यक यात्रा से बचें और स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करें।
