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पिथौरागढ़ में कोहराम: ढाई साल पहले हुई थी शादी, अब फंदे से लटकी मिली विवाहिता; खाई में मिला लापता युवक का शव

पिथौरागढ़। उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ से दो हृदयविदारक घटनाएं सामने आई हैं, जिन्होंने स्थानीय प्रशासन और निवासियों को स्तब्ध कर दिया है। पहली घटना ऐंचोली क्षेत्र की है, जहां एक नवविवाहिता ने संदिग्ध परिस्थितियों में फांसी लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। वहीं, दूसरी घटना में खड़कोट क्षेत्र से तीन दिनों से लापता एक युवक का शव उसके घर से करीब 10 किलोमीटर दूर गहरी खाई में बरामद हुआ है। पुलिस दोनों ही मामलों की गहनता से जांच कर रही है।


ऐंचोली में मातम: मासूम के सिर से उठा मां का साया

जनपद के ऐंचोली क्षेत्र में गुरुवार को उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक विवाहिता का शव उसके कमरे में फंदे से लटका पाया गया। जैसे ही परिजनों की नजर शव पर पड़ी, घर में चीख-पुकार मच गई। आनन-फानन में परिजन महिला को जिला अस्पताल ले गए, लेकिन वहां मौजूद चिकित्सकों ने परीक्षण के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।

ढाई साल के वैवाहिक जीवन का दुखद अंत

मृतका का विवाह महज ढाई साल पहले हुआ था और उसका डेढ़ साल का एक छोटा बेटा भी है। घटना की सूचना मिलते ही ऐंचोली चौकी प्रभारी उप निरीक्षक कमलेश जोशी के नेतृत्व में पुलिस बल और फॉरेंसिक टीम ने मौके पर पहुंचकर साक्ष्य जुटाए।

पिथौरागढ़ पुलिस के अनुसार, परिजनों ने पूछताछ में बताया कि परिवार में किसी भी प्रकार का कलह या तनाव नहीं था। दो दिन पहले ही महिला ने अपनी बहन से फोन पर सामान्य बातचीत की थी। ऐसे में यह सवाल पुलिस के लिए पहेली बना हुआ है कि आखिर खुशहाल दिख रहे परिवार की बहू ने यह आत्मघाती कदम क्यों उठाया?

“प्रारंभिक जांच में यह मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है। मृतका के मायके पक्ष को सूचना दे दी गई है। हर पहलू की जांच की जा रही है ताकि ठोस वजह सामने आ सके।” — रेखा यादव, पुलिस अधीक्षक (SP), पिथौरागढ़


खड़कोट के दिग्विजय की संदिग्ध मौत: 70 मीटर गहरी खाई में मिला शव

पिथौरागढ़ में दूसरी बड़ी घटना ने खड़कोट क्षेत्र को शोक में डुबो दिया है। 32 वर्षीय दिग्विजय चंद, जो 3 फरवरी से रहस्यमय तरीके से लापता थे, उनका शव चेसर गांव के पास एक गहरी खाई में मिला। दिग्विजय मूल रूप से जलतुरी गांव के निवासी थे और वर्तमान में अपने माता-पिता और भाई के साथ खड़कोट में रह रहे थे।

दुबई में कर चुके थे नौकरी, कोरोना काल में लौटे थे घर

दिग्विजय एक मेधावी और कर्मठ युवक थे। उन्होंने होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई की थी और वह दुबई में नौकरी भी कर चुके थे। हालांकि, कोरोना काल के दौरान वह वापस अपने घर लौट आए थे। उनके पिता अशोक चंद राजस्व विभाग से सेवानिवृत्त हैं। मिलनसार स्वभाव के दिग्विजय की मौत की खबर ने पूरे जलतुरी और खड़कोट क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ दी है।

रेस्क्यू ऑपरेशन और बरामदगी

परिजनों ने दिग्विजय के लापता होने के बाद कोतवाली में गुमशुदगी दर्ज कराई थी। गुरुवार को चेसर गांव के पास खेतों के किनारे सड़क से करीब 70 मीटर नीचे उनका शव देखा गया। SDRF और पुलिस की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद शव को खाई से बाहर निकाला। बेटे का शव देखते ही मां बेसुध हो गई, जिसे स्थानीय महिलाओं ने बमुश्किल संभाला।


पुलिस की जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार

दोनों ही मामलों में पिथौरागढ़ पुलिस अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक साक्ष्यों पर टिकी है। दिग्विजय के मामले में SP रेखा यादव ने बताया कि प्रथम दृष्टया यह संतुलन बिगड़ने के कारण खाई में गिरने का मामला लग रहा है, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट और परिजनों की तहरीर के बाद ही आधिकारिक पुष्टि की जाएगी।

सामाजिक सरोकारों से जुड़े थे दिग्विजय

जलतुरी के ग्राम प्रधान जगमोहन चंद ने बताया कि दिग्विजय केवल एक शिक्षित युवक ही नहीं, बल्कि सामाजिक कार्यों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने वाले व्यक्ति थे। शुक्रवार को गांव के घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।


सीमांत जिले में सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य पर सवाल

पिथौरागढ़ की इन दो घटनाओं ने पर्वतीय क्षेत्रों में बढ़ रहे मानसिक तनाव और सुरक्षा व्यवस्था पर फिर से बहस छेड़ दी है। जहां एक ओर एक युवा मां का जाना समाज के लिए अपूरणीय क्षति है, वहीं एक होनहार युवक की संदिग्ध मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस प्रशासन ने अपील की है कि किसी भी प्रकार के तनाव की स्थिति में परामर्श लें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल विभाग को दें।

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