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Reading: नैनीताल हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: गैंगस्टर एक्ट में सजा पाए दो युवकों को दी बड़ी राहत, कहा- ‘केवल आपराधिक इतिहास सजा का आधार नहीं’
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The Hill India > Blog > उत्तराखंड > नैनीताल हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: गैंगस्टर एक्ट में सजा पाए दो युवकों को दी बड़ी राहत, कहा- ‘केवल आपराधिक इतिहास सजा का आधार नहीं’
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नैनीताल हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: गैंगस्टर एक्ट में सजा पाए दो युवकों को दी बड़ी राहत, कहा- ‘केवल आपराधिक इतिहास सजा का आधार नहीं’

The Hill India News
Last updated: April 23, 2026 1:36 pm
The Hill India News
Published: April 23, 2026
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नैनीताल: उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने गैंगस्टर एक्ट (Gangster Act) के क्रियान्वयन और उसकी कानूनी बारीकियों को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। न्यायालय ने नैनीताल जिले के दो निवासियों—हेमू पंत उर्फ हेमू कालू और मनीष उर्फ कंचू मटियानी—की दोषसिद्धि और निचली अदालत द्वारा दी गई सजा को पूरी तरह से रद्द कर दिया है। न्यायमूर्ति आशीष नैथानी की एकलपीठ ने इस मामले की गंभीरता से समीक्षा करते हुए स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के विरुद्ध गैंगस्टर एक्ट की अनिवार्य शर्तों को वैधानिक रूप से सिद्ध करने में विफल रहा है।

Contents
निचली अदालत के फैसले को दी चुनौतीकोर्ट की सख्त टिप्पणी: ‘गैंग चार्ट’ और ‘हिस्ट्री’ ही काफी नहींगवाहों की कमी और अभियोजन की विफलतासंगठित अपराध बनाम व्यक्तिगत अपराध: अंतर स्पष्ट

निचली अदालत के फैसले को दी चुनौती

यह मामला वर्ष 2013 का है, जब विशेष न्यायाधीश (गैंगस्टर एक्ट) नैनीताल ने 19 अगस्त को हेमू पंत और मनीष मटियानी को दोषी करार दिया था। उस समय अदालत ने दोनों को तीन वर्ष के कठोर कारावास और 10,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी। पिछले एक दशक से भी अधिक समय से जारी इस कानूनी लड़ाई में अब हाईकोर्ट ने हस्तक्षेप करते हुए न्याय के सिद्धांतों को रेखांकित किया है। अपीलकर्ताओं ने निचली अदालत के इस आदेश को चुनौती देते हुए तर्क दिया था कि उनकी दोषसिद्धि तथ्यों के बजाय धारणाओं पर आधारित थी।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी: ‘गैंग चार्ट’ और ‘हिस्ट्री’ ही काफी नहीं

सुनवाई के दौरान अपीलकर्ताओं के अधिवक्ता ने प्रभावी ढंग से पक्ष रखते हुए कहा कि पुलिस ने केवल पुराने मामलों के आधार पर एक ‘गैंग चार्ट’ तैयार किया और उसी के आधार पर इन्हें गैंगस्टर घोषित कर दिया गया। हाईकोर्ट ने इस दलील में दम पाया और अपने आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया कि नैनीताल हाईकोर्ट गैंगस्टर एक्ट फैसला इस बात पर जोर देता है कि किसी व्यक्ति की केवल आपराधिक पृष्ठभूमि होना ही उसे गैंगस्टर एक्ट के तहत सजा देने के लिए पर्याप्त आधार नहीं हो सकता।

अदालत ने कहा, “किसी भी व्यक्ति को तब तक इस कठोर अधिनियम के तहत दोषी नहीं माना जा सकता, जब तक कि यह साक्ष्यों के साथ साबित न हो जाए कि वह आरोपी किसी संगठित गिरोह के सदस्य के रूप में निरंतर और सक्रिय रूप से गैर-कानूनी गतिविधियों में संलिप्त था।”

गवाहों की कमी और अभियोजन की विफलता

कोर्ट ने इस बात पर भी हैरानी जताई कि अभियोजन पक्ष का पूरा मामला मात्र पुलिस अधिकारियों की गवाही पर टिका हुआ था। सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि पुलिस ने किसी भी स्वतंत्र सार्वजनिक गवाह (Independent Witness) का परीक्षण नहीं किया था। कानून की नजर में, केवल पुलिसकर्मियों के बयानों के आधार पर किसी को गंभीर धाराओं में सजा देना न्यायसंगत नहीं माना गया, विशेषकर तब जब जनता के बीच से कोई भी गवाह सामने न लाया गया हो।

इसके अतिरिक्त, न्यायालय ने एक और महत्वपूर्ण बिंदु पर ध्यान केंद्रित किया। इस मामले के अन्य सह-आरोपी पहले ही बरी हो चुके थे। कानूनी सिद्धांत के अनुसार, यदि एक ही गिरोह के रूप में आरोपित किए गए अन्य व्यक्ति रिहा हो जाते हैं, तो वही लाभ समान परिस्थितियों वाले शेष आरोपियों को भी मिलना चाहिए।

संगठित अपराध बनाम व्यक्तिगत अपराध: अंतर स्पष्ट

नैनीताल हाईकोर्ट के इस फैसले ने ‘संगठित अपराध’ और ‘व्यक्तिगत आपराधिक रिकॉर्ड’ के बीच की धुंधली रेखा को स्पष्ट कर दिया है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय के बाद पुलिस प्रशासन को गैंगस्टर एक्ट लगाने से पहले ठोस साक्ष्य जुटाने होंगे। केवल कागजी गैंग चार्ट और पुराने मुकदमों की सूची अब सजा सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त नहीं होगी।

न्यायमूर्ति आशीष नैथानी की पीठ ने अपील स्वीकार करते हुए आदेश दिया कि यदि इन आरोपियों ने जुर्माने की राशि जमा की है, तो उसे वापस किया जाए और यदि वे किसी अन्य मामले में वांछित नहीं हैं, तो उन्हें तत्काल मुक्त माना जाए।

हेमू पंत और मनीष मटियानी के लिए यह फैसला एक बड़ी राहत लेकर आया है। 2013 से चली आ रही मानसिक और कानूनी जद्दोजहद का अंत करते हुए हाईकोर्ट ने यह संदेश दिया है कि सजा का आधार ठोस कानूनी साक्ष्य होने चाहिए, न कि केवल पुलिस की थ्योरी। नैनीताल हाईकोर्ट गैंगस्टर एक्ट फैसला भविष्य में इस तरह के अन्य मामलों के लिए एक नजीर (Precedent) साबित होगा, जहाँ पुलिसिया कार्रवाई और वास्तविक अपराध के बीच के अंतर को परखा जाएगा।

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