मुंबई: मायानगरी मुंबई में साइबर अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। तकनीक के इस दौर में जहाँ ऑनलाइन शॉपिंग हमारी जीवनशैली का हिस्सा बन चुकी है, वहीं साइबर ठग इसे मासूम लोगों को लूटने का हथियार बना रहे हैं। ताजा मामला मुंबई के एक निजी अस्पताल में कार्यरत एक नर्स से जुड़ा है, जिसे फेसबुक पर मात्र 299 रुपये की ड्रेस का लालच देकर ऑनलाइन शॉपिंग स्कैम के जरिए 1 लाख रुपये की चपत लगा दी गई। देवनार पुलिस ने इस संबंध में मामला दर्ज कर तकनीकी जांच शुरू कर दी है।
फेसबुक विज्ञापन से शुरू हुआ ठगी का खेल
यह पूरी घटना 16 अप्रैल से 20 अप्रैल के बीच की है। पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़िता मुंबई के एक नामी निजी अस्पताल में नर्स के रूप में सेवाएं देती है। 16 अप्रैल को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक स्क्रॉल करते समय उसकी नजर एक बेहद आकर्षक विज्ञापन पर पड़ी। विज्ञापन में एक खूबसूरत ड्रेस की कीमत महज 299 रुपये बताई गई थी। कम कीमत और आकर्षक डिजाइन देखकर पीड़िता ने उस पर क्लिक किया, जो उसे सीधे जालसाजों के जाल की ओर ले गया।
किस्तों में लूटा पैसा: शिपिंग से लेकर एड्रेस कन्फर्मेशन तक का झांसा
साइबर ठगों की कार्यप्रणाली (Modus Operandi) इतनी शातिर थी कि पीड़िता को शुरू में संदेह तक नहीं हुआ। ड्रेस बुक करने की प्रक्रिया शुरू होते ही ठगों ने नर्स से व्हाट्सएप के जरिए संपर्क साधा। शुरुआत में केवल 299 रुपये मांगे गए, लेकिन खेल यहीं खत्म नहीं हुआ। अगले पांच दिनों के भीतर ठगों ने मनोवैज्ञानिक दबाव और तकनीकी शब्दावली का सहारा लेकर पीड़िता की गाढ़ी कमाई ऐंठनी शुरू कर दी।
जालसाजों ने पीड़िता को डराने और समझाने के लिए विभिन्न बहानों की एक लंबी सूची तैयार कर रखी थी, जिसमें शामिल थे:
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शिपिंग और हैंडलिंग चार्ज: डिलीवरी शुरू करने के नाम पर पैसे मांगे गए।
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जीपीएस (GPS) शुल्क: ठगों ने दावा किया कि रियल-टाइम लोकेशन ट्रैकिंग के लिए यह शुल्क अनिवार्य है।
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वेरिफिकेशन कोड और एड्रेस कन्फर्मेशन: सुरक्षा के नाम पर पीड़िता को झांसे में लेकर बार-बार ट्रांजेक्शन कराए गए।
चौंकाने वाली बात यह है कि ठगों ने हर बार यह आश्वासन दिया कि ड्रेस की डिलीवरी होते ही, यानी सामान हाथ में आते ही अतिरिक्त ली गई पूरी राशि (Refund) वापस कर दी जाएगी। इसी भरोसे में आकर नर्स ने 16 से 20 अप्रैल के बीच किस्तों में कुल 1 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए।
जब तक खुला राज, तब तक बहुत देर हो चुकी थी
लगातार पैसे भेजने के बाद भी जब ऑर्डर पीड़िता के पास नहीं पहुंचा और कथित ‘डिलीवरी एजेंट’ ने फोन उठाना बंद कर दिया, तब उसे अहसास हुआ कि वह एक सुनियोजित ऑनलाइन शॉपिंग स्कैम का शिकार हो चुकी है। ठगों ने न केवल फेसबुक विज्ञापन, बल्कि फर्जी व्हाट्सएप प्रोफाइल और जाली डिलीवरी क्रेडेंशियल्स का इस्तेमाल कर इस पूरी वारदात को अंजाम दिया था।
पुलिस की कार्रवाई और सुरक्षा सलाह
धोखाधड़ी का अहसास होते ही पीड़िता ने सूझबूझ दिखाई और तुरंत भारत सरकार के राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल कर शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद देवनार पुलिस स्टेशन में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया।
देवनार पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि अपराधी फर्जी विज्ञापनों के जरिए लोगों को निशाना बना रहे हैं। हम उन बैंक खातों और व्हाट्सएप नंबरों की जांच कर रहे हैं, जिनका उपयोग ट्रांजेक्शन के लिए किया गया था।”
साइबर विशेषज्ञों की चेतावनी: कैसे बचें?
विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर आने वाले हर विज्ञापन पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। यदि कोई वस्तु अपनी वास्तविक बाजार कीमत से अत्यधिक सस्ती मिल रही है, तो वह ऑनलाइन शॉपिंग स्कैम होने की पूरी संभावना है। भुगतान के लिए कभी भी अनजान क्यूआर (QR) कोड स्कैन न करें और न ही रिफंड के लालच में बार-बार पैसे भेजें।
मुंबई की यह घटना एक सबक है कि डिजिटल युग में थोड़ी सी असावधानी भी आपके बैंक खाते को खाली कर सकती है। सतर्क रहें, सुरक्षित रहें।


