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बंगाल चुनाव प्रचार के दौरान सांसद पप्पू यादव की तबीयत बिगड़ी, आज ही मिला था महिला आयोग का नोटिस

मालदा/पटना | विशेष संवाददाता पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के प्रथम चरण के रण में आज उस वक्त हड़कंप मच गया, जब बिहार की पूर्णिया सीट से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव चुनाव प्रचार के दौरान अचानक अस्वस्थ हो गए। मालदा में भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों के बीच जनसभाओं को संबोधित कर रहे पप्पू यादव को अचानक चक्कर आया, जिसके बाद उन्हें तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई। एक ओर जहाँ उनके स्वास्थ्य को लेकर समर्थक चिंतित हैं, वहीं दूसरी ओर बिहार राज्य महिला आयोग द्वारा जारी एक कड़े नोटिस ने उनकी राजनीतिक मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

भीषण गर्मी बनी बाधा: मालदा में बिगड़ी सांसद की स्थिति

पश्चिम बंगाल में पहले चरण के मतदान के लिए प्रचार का आज अंतिम दिन था। सभी राजनीतिक दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक रखी थी। इसी कड़ी में पूर्णिया सांसद पप्पू यादव भी मालदा के विभिन्न क्षेत्रों में मैराथन रैलियां कर रहे थे। दोपहर के समय जब पारा अपने चरम पर था, तब अचानक सांसद पप्पू यादव की तबीयत बिगड़ने लगी।

मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सांसद को अत्यधिक पसीना आने और घबराहट की शिकायत हुई। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में देखा जा सकता है कि पप्पू यादव एक बिस्तर पर लेटे हुए हैं और उनके सहयोगी उनके सिर पर पानी डालकर शरीर का तापमान कम करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्हें आनन-फानन में स्थानीय डॉक्टरों के पास ले जाया गया, जहाँ फिलहाल उन्हें ‘ऑब्जर्वेशन’ में रखा गया है। डॉक्टरों का कहना है कि अत्यधिक थकान और ‘हीट स्ट्रोक’ के कारण उनकी स्थिति बिगड़ी है।

बिहार महिला आयोग का सख्त रुख: सदस्यता रद्द करने की चेतावनी

स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के बीच पप्पू यादव के लिए पटना से एक और बुरी खबर आई। बिहार राज्य महिला आयोग ने सांसद द्वारा महिलाओं को लेकर की गई एक कथित विवादित टिप्पणी पर स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने इस मामले को अत्यंत गंभीर मानते हुए पप्पू यादव को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

महिला आयोग ने अपने नोटिस में कड़े सवाल पूछते हुए तीन दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है। आयोग ने पूछा है कि:

  1. महिलाओं के सम्मान को ठेस पहुँचाने वाला यह बयान किस संदर्भ में दिया गया?

  2. मर्यादा का उल्लंघन करने के आरोप में आपकी लोकसभा सदस्यता रद्द करने की सिफारिश केंद्र सरकार से क्यों न की जाए?

आयोग की इस सक्रियता ने बिहार और बंगाल दोनों राज्यों के सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। विरोधियों ने जहाँ इसे सांसद की संकीर्ण मानसिकता बताया है, वहीं पप्पू यादव के समर्थकों का कहना है कि यह केवल राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा है।


बंगाल चुनाव: पहले चरण के प्रचार का शोर थमा

पश्चिम बंगाल में इस बार विधानसभा चुनाव दो चरणों में संपन्न होने हैं। आज पहले चरण के प्रचार का आखिरी दिन था, जिस कारण मालदा सहित कई जिलों में भारी भीड़ और रैलियों का आयोजन किया गया। सांसद पप्पू यादव की तबीयत बिगड़ने की घटना ने चुनावी शोर के बीच सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर भी सवाल खड़े किए हैं। बंगाल की तपती गर्मी में प्रचार करना दिग्गज नेताओं के लिए भी बड़ी चुनौती साबित हो रहा है।

पप्पू यादव की टीम का आधिकारिक बयान

सांसद की टीम ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए समर्थकों से धैर्य बनाए रखने की अपील की है। टीम ने कहा, सांसद जी जनता के बीच रहने के अपने संकल्प के कारण विश्राम नहीं कर रहे थे। मालदा की भीषण गर्मी ने उनके स्वास्थ्य पर असर डाला है। फिलहाल वे डॉक्टरों की देखरेख में हैं और उनकी स्थिति स्थिर है। वे जल्द ही स्वस्थ होकर पुनः जनता के बीच लौटेंगे।


सियासी गलियारों में चर्चा: दोहरी मार का सामना

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पप्पू यादव इस समय ‘दोहरी मार’ का सामना कर रहे हैं। एक तरफ उन्हें शारीरिक अस्वस्थता ने घेरा है, तो दूसरी तरफ महिला आयोग का नोटिस उनके संसदीय करियर के लिए कानूनी पेच फंसा सकता है। निर्दलीय सांसद होने के नाते उनके पास किसी बड़े सांगठनिक ढांचे का सहारा नहीं है, ऐसे में उन्हें व्यक्तिगत स्तर पर ही इन चुनौतियों से निपटना होगा।

क्या होगा अगला कदम?

अब सभी की निगाहें दो चीजों पर टिकी हैं: पहला, पप्पू यादव के स्वास्थ्य में सुधार और दूसरा, महिला आयोग को उनके द्वारा दिया जाने वाला जवाब। यदि आयोग उनके जवाब से संतुष्ट नहीं होता है, तो मामला संसद की एथिक्स कमेटी तक भी पहुँच सकता है।

पश्चिम बंगाल चुनाव के इस हाई-वोल्टेज ड्रामे में पप्पू यादव की यह घटना चर्चा का केंद्र बनी हुई है। क्या वे समय सीमा के भीतर आयोग को संतुष्ट कर पाएंगे या फिर यह विवाद उनकी राजनीतिक साख पर भारी पड़ेगा? यह आने वाला वक्त ही बताएगा।

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