
भागलपुर/सुल्तानगंज। बिहार के भागलपुर जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने राज्य की कानून व्यवस्था और सुशासन के दावों की धज्जियां उड़ा कर रख दी हैं। मंगलवार, 28 अप्रैल को सुल्तानगंज नगर परिषद कार्यालय गोलियों की तड़तड़ाहट से थर्रा उठा। अज्ञात नकाबपोश अपराधियों ने कार्यालय के भीतर घुसकर अंधाधुंध फायरिंग की, जिसमें कार्यपालक पदाधिकारी (EO) कृष्णा भूषण कुमार और नगर परिषद सभापति राज कुमार गुड्डू को निशाना बनाया गया। इस दुस्साहसिक हमले में गंभीर रूप से घायल कार्यपालक पदाधिकारी ने अस्पताल ले जाते समय दम तोड़ दिया, जबकि सभापति की स्थिति नाजुक बनी हुई है।
कार्यालय के भीतर मचा कोहराम: फिल्मी अंदाज में पहुंचे हमलावर
घटना मंगलवार दोपहर की है, जब नगर परिषद कार्यालय में रोजमर्रा का सरकारी कामकाज चल रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अचानक कुछ हथियारबंद अपराधी कार्यालय परिसर में दाखिल हुए। इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, अपराधियों ने सभापति राज कुमार गुड्डू और कार्यपालक पदाधिकारी कृष्णा भूषण कुमार के चैंबर को निशाना बनाते हुए गोलियों की बौछार कर दी।
इस सुल्तानगंज नगर परिषद गोलीबारी के दौरान कार्यालय में मौजूद कर्मचारियों और वार्ड पार्षदों के बीच भगदड़ मच गई। अपराधी वारदात को अंजाम देने के बाद बड़े आराम से हथियार लहराते हुए मौके से फरार होने में सफल रहे। जमीन पर खून से लथपथ पड़े दोनों अधिकारियों को आनन-फानन में स्थानीय लोगों की मदद से सुल्तानगंज रेफरल अस्पताल पहुंचाया गया।
EO को लगी तीन गोलियां, अस्पताल ले जाते समय हुई मौत
रेफरल अस्पताल के डॉक्टर कुंदन भाई पटेल ने प्राथमिक उपचार के बाद बताया कि कार्यपालक पदाधिकारी कृष्णा भूषण कुमार की स्थिति अत्यंत चिंताजनक थी, उन्हें शरीर में तीन गोलियां लगी थीं। वहीं, सभापति राज कुमार गुड्डू के सिर के पास गोली लगी थी। दोनों की नाजुक हालत को देखते हुए उन्हें तुरंत भागलपुर के मायागंज (JLNMCH) अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया।
दुर्भाग्यवश, मायागंज अस्पताल पहुंचने से पहले ही कार्यपालक पदाधिकारी कृष्णा भूषण कुमार ने दम तोड़ दिया। वहीं, ताजा अपडेट के अनुसार, नगर सभापति का इलाज चल रहा है और डॉक्टरों ने उन्हें खतरे से बाहर बताया है, हालांकि वह अभी भी सघन चिकित्सा निगरानी में हैं।
पुरानी रंजिश या वर्चस्व की जंग? पुलिस की जांच तेज
वारदात की गंभीरता को देखते हुए भागलपुर पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। सूचना मिलते ही प्रशिक्षु एसपी सायम रजा और इंस्पेक्टर मृत्युंजय कुमार भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने तुरंत पूरे नगर परिषद कार्यालय को सील कर दिया है और साक्ष्य जुटाने के लिए एफएसएल की टीम को भी बुलाया गया है।
प्रारंभिक जांच और स्थानीय सूत्रों से मिल रही जानकारियों के अनुसार, इस खूनी संघर्ष के पीछे सभापति और उपसभापति के बीच लंबे समय से चली आ रही रंजिश की बात सामने आ रही है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है ताकि हमलावरों की पहचान की जा सके। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि अपराधी स्थानीय स्तर के ही हैं और उनकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है।
सियासी बवाल: तेजस्वी यादव ने घेरी सरकार
सुल्तानगंज की इस घटना ने बिहार की राजनीति में भी भूचाल ला दिया है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इस मुद्दे पर राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने सोशल मीडिया और मीडिया बयानों के जरिए सरकार पर तंज कसते हुए इसे ‘जंगलराज’ नहीं बल्कि ‘अपराधियों का राज’ करार दिया।
तेजस्वी यादव ने कहा, “जब प्रदेश के मुख्यमंत्री ही अपराधियों के मनोबल के आगे नतमस्तक हों, तो सरकारी कार्यालयों में हत्या होना अब भाजपा-नीति सरकार के लिए ‘मंगलराज’ की श्रेणी में आता है।” उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में अब अधिकारी और जनप्रतिनिधि भी सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता का क्या हाल होगा।
इलाके में तनाव: भारी पुलिस बल तैनात
दिनदहाड़े हुए इस हत्याकांड के बाद सुल्तानगंज और आसपास के इलाकों में भारी तनाव व्याप्त है। स्थानीय लोगों में पुलिस के प्रति भारी आक्रोश है। सुरक्षा की दृष्टि से पूरे शहर में गश्त बढ़ा दी गई है और नगर परिषद कार्यालय के बाहर भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है। प्रशासनिक हल्कों में भी एक ईमानदार कार्यपालक पदाधिकारी की मौत से शोक और भय की लहर है।
सुल्तानगंज नगर परिषद गोलीबारी की यह घटना बिहार पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। यह देखना होगा कि पुलिस कितनी जल्दी इन दुर्दांत अपराधियों को सलाखों के पीछे भेजती है और इस साजिश के पीछे के असली चेहरों को बेनकाब करती है।



