
देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर तेजी देखने को मिली है। 19 मई को जारी नए रेट्स ने आम जनता की चिंता बढ़ा दी है क्योंकि लगभग सभी प्रमुख शहरों में ईंधन के दामों में ₹0.50 से लेकर ₹1.70 प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। लगातार दूसरी बार हुई इस बढ़ोतरी ने परिवहन लागत से लेकर रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों तक पर असर डालना शुरू कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह ट्रेंड जारी रहा तो आने वाले दिनों में महंगाई और अधिक बढ़ सकती है।
तेल कंपनियों की ओर से जारी नए रेट्स के अनुसार दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, पटना, लखनऊ, जयपुर और हैदराबाद जैसे बड़े शहरों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें नए रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच गई हैं। पिछले कुछ दिनों में यह दूसरा मौका है जब ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। इससे पहले शुक्रवार को भी पेट्रोल और डीजल के दामों में लगभग ₹3 प्रति लीटर की बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई थी, जिसने पहले ही आम उपभोक्ताओं के बजट पर दबाव बढ़ा दिया था।
दिल्ली में पेट्रोल की कीमत बढ़कर ₹98.64 प्रति लीटर हो गई है, जबकि डीजल ₹91.58 प्रति लीटर तक पहुंच गया है। आर्थिक राजधानी मुंबई में पेट्रोल ₹107.59 प्रति लीटर और डीजल ₹94.08 प्रति लीटर के स्तर पर बिक रहा है। कोलकाता में पेट्रोल ₹109.70 और डीजल ₹96.07 प्रति लीटर तक पहुंच चुका है। वहीं चेन्नई में भी पेट्रोल ₹104.46 और डीजल ₹96.11 प्रति लीटर के आसपास दर्ज किया गया है।
एनसीआर क्षेत्र की बात करें तो गुरुग्राम और नोएडा जैसे शहरों में भी ईंधन की कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखी गई है। नोएडा में पेट्रोल ₹98.91 प्रति लीटर और डीजल ₹92.21 प्रति लीटर हो गया है। गुरुग्राम में पेट्रोल ₹99.29 और डीजल ₹91.80 प्रति लीटर दर्ज किया गया है। इस बढ़ोतरी का असर सीधे तौर पर दैनिक यात्रियों, टैक्सी चालकों और ट्रांसपोर्ट व्यवसाय से जुड़े लोगों पर पड़ रहा है।
पूर्वी भारत में भी स्थिति कुछ अलग नहीं है। पटना में पेट्रोल की कीमत ₹110.02 प्रति लीटर तक पहुंच गई है जबकि डीजल ₹96.05 प्रति लीटर हो गया है। यह बढ़ोतरी उन राज्यों के लिए ज्यादा चिंता का विषय है जहां पहले से ही परिवहन और लॉजिस्टिक लागत अधिक है। भुवनेश्वर में भी पेट्रोल ₹105.09 और डीजल ₹96.68 प्रति लीटर के आसपास पहुंच चुका है।
राजस्थान की राजधानी जयपुर में भी कीमतों में बड़ी छलांग देखने को मिली है। यहां पेट्रोल ₹109.32 प्रति लीटर और डीजल ₹94.50 प्रति लीटर तक पहुंच गया है। चंडीगढ़ में पेट्रोल ₹98.10 और डीजल ₹86.09 प्रति लीटर दर्ज किया गया है। वहीं लखनऊ में पेट्रोल ₹98.40 और डीजल ₹91.73 प्रति लीटर हो गया है।
दक्षिण भारत में भी तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का सिलसिला जारी है। हैदराबाद में पेट्रोल ₹111.88 प्रति लीटर और डीजल ₹99.95 प्रति लीटर के करीब पहुंच गया है, जो देश के बड़े शहरों में सबसे अधिक दरों में से एक है। बेंगलुरु में भी पेट्रोल ₹107.12 और डीजल ₹95.04 प्रति लीटर दर्ज किया गया है।
लगातार बढ़ते ईंधन के दामों का असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका प्रभाव पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। पेट्रोल और डीजल महंगे होने से ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ जाती है, जिसका सीधा असर सब्जियों, अनाज, दूध, कपड़े और अन्य रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर पड़ता है। यही कारण है कि ईंधन की कीमतों में हल्की सी बढ़ोतरी भी महंगाई दर को प्रभावित कर देती है।
पिछले कुछ समय से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। मिडिल ईस्ट में तनाव और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव के कारण क्रूड ऑयल की कीमतें काफी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। हालांकि हाल ही में कुछ गिरावट देखने को मिली है, लेकिन इसके बावजूद कीमतें अभी भी पिछले सामान्य स्तरों से काफी ऊपर हैं।
ब्रेंट क्रूड और अमेरिकी WTI में हालिया गिरावट के बावजूद भारत में ईंधन की कीमतों पर इसका तत्काल प्रभाव नहीं पड़ा है। इसका मुख्य कारण यह है कि भारतीय बाजार में पहले के बढ़े हुए दामों का बोझ अभी तक पूरी तरह से उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जा रहा है। इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी भी एक बड़ा कारण है, जिससे भारत के लिए कच्चे तेल का आयात महंगा हो गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें कई कारकों पर निर्भर करती हैं, जिनमें अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत, डॉलर-रुपया विनिमय दर, टैक्स संरचना और राज्यों द्वारा लगाए गए वैट शामिल हैं। यही वजह है कि देश के अलग-अलग राज्यों में ईंधन की कीमतें अलग-अलग होती हैं।
भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें लंबे समय से स्थिरता के बाद अब फिर से तेजी की ओर बढ़ती दिख रही हैं। इससे पहले अप्रैल 2022 के बाद लंबे समय तक कीमतों में अपेक्षाकृत स्थिरता बनी रही थी, लेकिन अब हालात बदलते नजर आ रहे हैं। हाल ही में हुई बढ़ोतरी को पिछले चार वर्षों में सबसे बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
सरकार और तेल कंपनियों के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है क्योंकि एक तरफ अंतरराष्ट्रीय बाजार का दबाव है और दूसरी तरफ घरेलू स्तर पर महंगाई को नियंत्रित रखने की आवश्यकता है। अगर आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में राहत नहीं मिलती है तो भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम और अधिक बढ़ सकते हैं।
आम जनता के लिए यह स्थिति काफी मुश्किलें खड़ी कर रही है। दैनिक आवागमन से लेकर छोटे व्यापारियों तक सभी पर इसका असर पड़ रहा है। कई लोग पहले ही बढ़े हुए किराए और महंगे सामानों से परेशान हैं और अब ईंधन की कीमतों में यह नई बढ़ोतरी उनके बजट को और अधिक प्रभावित कर सकती है।
कुल मिलाकर देखा जाए तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों में यह नया उछाल सिर्फ एक आर्थिक संकेत नहीं बल्कि आने वाले दिनों में महंगाई के संभावित बढ़ते दबाव का संकेत भी है। अगर स्थिति ऐसी ही बनी रही तो इसका असर देश की पूरी अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जेब पर गहरा पड़ सकता है।



