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बेंगलुरु: नाबालिग बच्चों से बर्बरता और यौन दुराचार के आरोप में कांग्रेस नेता आनंद नायडू गिरफ्तार, POCSO के तहत कार्रवाई

बेंगलुरु: कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु से एक बेहद विचलित करने वाली घटना सामने आई है, जिसने राजनीतिक गलियारों और सामाजिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है। बेंगलुरु के स्थानीय कांग्रेस नेता आनंद नायडू को पुलिस ने नाबालिग बच्चों के साथ मारपीट, शारीरिक प्रताड़ना और यौन दुराचार के गंभीर आरोपों में गिरफ्तार किया है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए अन्नपूर्णेश्वरी नगर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ ‘यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम’ (POCSO एक्ट) के तहत मुकदमा दर्ज कर उसे हिरासत में ले लिया है।

रूह कंपा देने वाली घटना: विरोध करने पर रॉड से हमला

इस पूरे मामले की जड़ें एक जटिल पारिवारिक और अवैध संबंधों की कहानी से जुड़ी बताई जा रही हैं। पुलिस में दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, आरोपी आनंद नायडू के शिकायतकर्ता की पत्नी के साथ कथित तौर पर अवैध संबंध थे। जानकारी के मुताबिक, जब घर के नाबालिग बच्चों को इस अनैतिक रिश्ते की भनक लगी और उन्होंने इस पर आपत्ति जताई, तो आरोपी ने संवेदनशीलता की सभी हदें पार कर दीं।

आरोप है कि बच्चों द्वारा विरोध किए जाने पर आनंद नायडू उग्र हो गया और उसने नाबालिगों पर लोहे की रॉड से हमला कर दिया। बच्चों ने अपने बयान में बताया कि मारपीट के दौरान आरोपी ने उन्हें दांतों से काटा और उन्हें गंभीर शारीरिक चोटें पहुंचाईं। बच्चों की चीख-पुकार और उनकी आपबीती सुनकर हर कोई दंग है।

पुलिस की कार्रवाई और POCSO एक्ट का समावेश

घटना की सूचना मिलते ही अन्नपूर्णेश्वरी नगर पुलिस हरकत में आई। घायल नाबालिगों ने पुलिस के समक्ष उपस्थित होकर अपना बयान दर्ज कराया, जिसमें उन्होंने उस खौफनाक मंजर का पूरा विवरण दिया। बच्चों के बयानों में केवल शारीरिक हिंसा ही नहीं, बल्कि यौन दुराचार (Sexual Misconduct) के संकेत भी मिले, जिसके बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मामले में कठोर धाराओं को जोड़ा।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, बेंगलुरु कांग्रेस नेता POCSO केस की जांच अब वैज्ञानिक और कानूनी दोनों पहलुओं से की जा रही है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, यह मामला नाबालिगों के प्रति अत्यधिक क्रूरता और उनके अधिकारों के हनन का है। शारीरिक चोटों के अलावा यौन शोषण के आरोपों की पुष्टि के लिए मेडिकल परीक्षण और विस्तृत जांच जारी है।

संपत्ति विवाद और मां की संदिग्ध भूमिका

इस मामले में एक और चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब शिकायतकर्ता (बच्चों के पिता) ने अपनी पत्नी की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इन बच्चों की मां भी इस पूरे घटनाक्रम और अपराध में शामिल थी। पुलिस इस बात की भी गहनता से जांच कर रही है कि क्या बच्चों को प्रताड़ित करने के पीछे कोई बड़ी साजिश थी।

मामले में एक आर्थिक एंगल भी उभर कर सामने आया है। पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार, आरोपी आनंद नायडू और बच्चों की मां ने कथित तौर पर मिलीभगत करके शिकायतकर्ता की संपत्ति को अपने नाम पर हस्तांतरित (Transfer) करवा लिया था। पुलिस अब इस ‘प्रॉपर्टी एंगल’ की भी जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या संपत्ति हड़पने के उद्देश्य से ही बच्चों को डराने-धमकाने और उनके साथ दुर्व्यवहार करने का सिलसिला शुरू हुआ था।

राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया

चूंकि आरोपी आनंद नायडू कांग्रेस का स्थानीय नेता बताया जा रहा है, इसलिए इस मामले ने राजनीतिक तूल भी पकड़ लिया है। विपक्षी दलों ने राज्य सरकार और सत्ताधारी पार्टी पर निशाना साधते हुए मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं, स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर गहरा आक्रोश है। बाल अधिकार कार्यकर्ताओं ने इस मामले में त्वरित न्याय और बच्चों को उचित परामर्श (Counseling) व सुरक्षा देने की मांग की है।

आगे की राह: क्या कहती है कानूनी प्रक्रिया?

फिलहाल आनंद नायडू पुलिस की हिरासत में है और उससे पूछताछ जारी है। बेंगलुरु कांग्रेस नेता POCSO केस में पुलिस अब साक्ष्य जुटाने के लिए डिजिटल सबूतों और कॉल रिकॉर्ड्स की भी पड़ताल कर रही है। कानून विशेषज्ञों का कहना है कि यदि POCSO और संपत्ति धोखाधड़ी के आरोप साबित हो जाते हैं, तो आरोपी को लंबे समय तक जेल की सलाखों के पीछे रहना पड़ सकता है।

यह घटना समाज के लिए एक चेतावनी है कि कैसे सत्ता और अनैतिक संबंधों का गठजोड़ मासूम जिंदगियों को तबाह कर सकता है। बेंगलुरु पुलिस ने आश्वासन दिया है कि मामले की तह तक जाकर सभी दोषियों को कड़ी सजा दिलाई जाएगी, चाहे उनकी राजनीतिक हैसियत कुछ भी हो। बच्चों को फिलहाल सुरक्षित स्थान पर रखा गया है और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है।

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