
महाराष्ट्र के नासिक में सामने आए कथित टीसीएस (TCS) उत्पीड़न और धर्मांतरण से जुड़े मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। इस हाई-प्रोफाइल केस में पुलिस जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे कई गंभीर आरोप और चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। जांच एजेंसियों का कहना है कि तकनीकी साक्ष्यों और डिजिटल डेटा के विश्लेषण से पूरे मामले की परतें खुल सकती हैं।
इस मामले में सबसे अहम प्रगति आरोपी दानिश एजाज शेख के मोबाइल फोन के अनलॉक होने के रूप में सामने आई है। फॉरेंसिक टीम को अब तक जिस डिवाइस तक पहुंचने में कठिनाई हो रही थी, उसे विशेष अनुमति के बाद एक्सेस किया गया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने अपने मोबाइल में कई स्तरों की सुरक्षा व्यवस्था जैसे अलग-अलग एप्लिकेशन लॉक, फाइल लॉक और फेस आईडी का इस्तेमाल किया था, जिससे शुरुआती जांच काफी जटिल हो गई थी।
मोबाइल अनलॉक होने के बाद तेज हुई जांच
सूत्रों के अनुसार, अदालत से अनुमति मिलने के बाद आरोपी को फॉरेंसिक लैब ले जाया गया, जहां उसके फेस आईडी के जरिए मोबाइल अनलॉक किया गया। इसके बाद पुलिस और तकनीकी विशेषज्ञों ने डिवाइस से डेटा निकालने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। माना जा रहा है कि इस डेटा में चैट रिकॉर्ड, कॉल डिटेल्स, लोकेशन हिस्ट्री और अन्य डिजिटल सबूत शामिल हो सकते हैं, जो मामले की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
पुलिस का कहना है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें एक संगठित नेटवर्क की आशंका भी जताई जा रही है। इसी वजह से जांच को अब व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाया जा रहा है।
गिरफ्तार आरोपी और जांच का दायरा
इस मामले में पुलिस ने अब तक कई आरोपियों को हिरासत में लिया है और कुछ पर गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। जिन आरोपियों के नाम सामने आए हैं, उनमें दानिश एजाज शेख, तौसीफ बिलाल अत्तार, रजा रफीक मेमन और शाहरुख हुसैन शौकत कुरैशी प्रमुख हैं। इसके अलावा कुछ अन्य लोगों पर भी जांच चल रही है, जिनमें एक फरार महिला आरोपी का नाम भी शामिल बताया जा रहा है।
पुलिस ने सभी आरोपियों को ट्रांजिट वारंट के जरिए हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। जांच एजेंसियों का कहना है कि इन सभी से अलग-अलग पहलुओं पर सवाल पूछे जा रहे हैं, खासकर कथित धर्मांतरण की प्रक्रिया और उसके पीछे की रणनीति को लेकर।
‘क्रोनोलॉजी’ और आरोपों की परतें
जांच में यह दावा किया जा रहा है कि आरोपियों ने एक सुनियोजित तरीके से पीड़ित को अपने जाल में फंसाने की कोशिश की। आरोपों के अनुसार, पहले दोस्ती और भरोसे का संबंध बनाया गया, जिसके बाद पीड़ित की व्यक्तिगत और मानसिक स्थिति का फायदा उठाने की बात कही जा रही है।
इसके बाद कथित रूप से उसे ‘शीर खुरमा’ जैसे खाद्य पदार्थ में नशीला पदार्थ मिलाकर देने के आरोप भी सामने आए हैं। हालांकि पुलिस अभी इस दावे की वैज्ञानिक पुष्टि कर रही है और फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
इसके अलावा जांच में यह भी सामने आया है कि पीड़ित को ‘ब्लैक मैजिक’ यानी काले जादू से संबंधित बातें बताकर मानसिक रूप से प्रभावित करने की कोशिश की गई। पुलिस इस एंगल को भी गंभीरता से जांच रही है, लेकिन फिलहाल इसे आरोपों के तौर पर ही देखा जा रहा है, जिसकी पुष्टि बाकी साक्ष्यों पर निर्भर करेगी।
डिजिटल स्टॉकिंग और धमकी के आरोप
इस केस में एक चौथी पीड़िता के बयान ने जांच को और जटिल बना दिया है। महिला आयोग के सामने दिए गए बयान में उसने आरोप लगाया कि उसे डिजिटल माध्यमों से लगातार ट्रैक किया गया और उसकी निजी जानकारी को लेकर अफवाहें फैलाई गईं।
पीड़िता का यह भी कहना है कि कुछ आरोपियों द्वारा उसे मानसिक दबाव में लाने और डराने-धमकाने की कोशिश की गई। इन आरोपों की भी पुलिस अलग से जांच कर रही है और संबंधित डिजिटल रिकॉर्ड को खंगाला जा रहा है।
पुलिस की आगे की रणनीति
मुंबई नाका पुलिस और विशेष जांच टीम (SIT) इस पूरे मामले को एक संगठित अपराध के तौर पर देख रही है। पुलिस का कहना है कि मोबाइल से प्राप्त डेटा इस केस में निर्णायक साबित हो सकता है, क्योंकि इससे आरोपियों के बीच संपर्क, योजना और गतिविधियों का पूरा नेटवर्क सामने आ सकता है।
फिलहाल सभी आरोपियों से गहन पूछताछ जारी है और फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह मामला संवेदनशील है, इसलिए हर सबूत की बारीकी से जांच की जा रही है।



