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Reading: पश्चिम एशिया संकट के बीच महंगाई का खतरा: RBI की ‘वेट एंड वॉच’ रणनीति से बढ़ी चिंता
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पश्चिम एशिया संकट के बीच महंगाई का खतरा: RBI की ‘वेट एंड वॉच’ रणनीति से बढ़ी चिंता

The Hill India News
Last updated: April 21, 2026 6:17 am
The Hill India News
Published: April 21, 2026
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नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में गहराते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर सतर्क रुख अपनाया है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि फिलहाल केंद्रीय बैंक “वेट एंड वॉच” यानी ‘रुको और देखो’ की नीति पर काम कर रहा है। उनका मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष अगर लंबा खिंचता है, तो इसका असर भारत की महंगाई, आपूर्ति श्रृंखला और व्यापार पर गंभीर रूप से पड़ सकता है।

Contents
आपूर्ति बाधाएं और महंगाई का दबावपश्चिम एशिया पर भारत की निर्भरतारुपये पर दबाव और विदेशी मुद्रा भंडारमजबूत घरेलू आधार: डिजिटल और राजकोषीय स्थिति

प्रिंसटन यूनिवर्सिटी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान गवर्नर मल्होत्रा ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में जल्दबाजी में कोई भी मौद्रिक निर्णय लेना जोखिम भरा हो सकता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि केंद्रीय बैंक महंगाई के रुझानों और वैश्विक घटनाक्रमों पर बारीकी से नजर बनाए हुए है।

आपूर्ति बाधाएं और महंगाई का दबाव

गवर्नर ने चेतावनी दी कि पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण उत्पन्न होने वाले आपूर्ति संकट से भारत में महंगाई बढ़ सकती है। उन्होंने विशेष रूप से “सेकंड-राउंड इफेक्ट्स” का जिक्र करते हुए कहा कि शुरुआती झटका भले ही केवल आपूर्ति तक सीमित लगे, लेकिन समय के साथ यह व्यापक महंगाई का रूप ले सकता है। उदाहरण के तौर पर, कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि से परिवहन लागत बढ़ती है, जिससे खाद्य और अन्य आवश्यक वस्तुओं के दाम भी ऊपर जाते हैं।

यही कारण है कि आरबीआई फिलहाल ब्याज दरों को लेकर कोई ठोस संकेत देने से बच रहा है। अगर महंगाई तेजी से बढ़ती है, तो केंद्रीय बैंक को सख्त कदम उठाने पड़ सकते हैं, जिससे आम लोगों पर EMI और कर्ज का बोझ भी बढ़ सकता है।

पश्चिम एशिया पर भारत की निर्भरता

भारत की अर्थव्यवस्था पश्चिम एशिया पर काफी हद तक निर्भर है, और यही इस संकट को और गंभीर बनाता है। गवर्नर मल्होत्रा के अनुसार, भारत के कुल निर्यात का लगभग छठा हिस्सा इसी क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। वहीं, कुल आयात का करीब पांचवां हिस्सा और कच्चे तेल का लगभग 50% आयात पश्चिम एशिया से होता है।

इसके अलावा, उर्वरकों के आयात का लगभग 40% हिस्सा भी इसी क्षेत्र से आता है, जो कृषि क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इतना ही नहीं, विदेशों से भारत आने वाले कुल रेमिटेंस का लगभग 40% पश्चिम एशिया से ही आता है, जिससे लाखों भारतीय परिवारों की आय जुड़ी हुई है।

रुपये पर दबाव और विदेशी मुद्रा भंडार

पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद भारतीय रुपये पर भी दबाव देखने को मिला है। मार्च से अब तक रुपये में 4% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, इस स्थिति से निपटने के लिए आरबीआई सक्रिय रूप से विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप कर रहा है।

गवर्नर ने भरोसा दिलाया कि भारत के पास लगभग 710 अरब डॉलर का मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार है, जो 11 महीनों से अधिक के आयात को कवर करने के लिए पर्याप्त है। यह भंडार किसी भी बाहरी झटके से निपटने में देश को मजबूती प्रदान करता है।

मजबूत घरेलू आधार: डिजिटल और राजकोषीय स्थिति

वैश्विक संकट के बावजूद भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है। डिजिटल भुगतान प्रणाली यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ने मार्च महीने में 22 अरब लेनदेन का रिकॉर्ड बनाकर देश की डिजिटल ताकत को साबित किया है।

इसके साथ ही, आरबीआई ‘यूनिफाइड लेंडिंग इंटरफेस’ (ULI) पर भी काम कर रहा है, जिससे छोटे किसानों और व्यापारियों को तुरंत और आसान ऋण उपलब्ध कराया जा सकेगा। यह कदम ग्रामीण और छोटे व्यवसायिक क्षेत्रों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में मदद करेगा।

राजकोषीय मोर्चे पर भी भारत ने सुधार दिखाया है। सरकार का राजकोषीय घाटा 2020-21 के 9.2% से घटकर 2025-26 में 4.4% तक आ गया है, जो आर्थिक अनुशासन और स्थिरता का संकेत है।

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