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पश्चिम बंगाल में टीएमसी को एक और करारा झटका: जबरन रंगदारी मामले में वरिष्ठ नेता सब्यसाची दत्ता गिरफ्तार, जांच एजेंसियों की कार्रवाई से सियासी भूचाल

कोलकाता:  पश्चिम बंगाल की राजनीति इस समय अपने सबसे बड़े और अभूतपूर्व बदलाव के दौर से गुजर रही है। पहले विधायकों और सांसदों की बगावत, फिर सत्ता परिवर्तन और अब लगातार हो रही गिरफ्तारियों ने राज्य की राजनीतिक फिजा को पूरी तरह गरमा दिया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) को सोमवार देर रात उस वक्त एक और तगड़ा झटका लगा, जब पार्टी के कद्दावर नेता और बिधाननगर के पूर्व मेयर सब्यसाची दत्ता को जांच एजेंसियों ने गिरफ्तार कर लिया।

सब्यसाची दत्ता को सोमवार देर रात कथित तौर पर जबरन रंगदारी (Extortion) और वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोपों के तहत हिरासत में लिया गया और लंबी पूछताछ के बाद औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया। गौर करने वाली बात यह है कि दत्ता हालिया 2026 के विधानसभा चुनाव में बारासात सीट से टीएमसी के आधिकारिक उम्मीदवार भी थे। ऐसे में उनकी गिरफ्तारी को तृणमूल कांग्रेस के जमीनी संगठन और साख के लिए एक बहुत बड़ा रणनीतिक नुकसान माना जा रहा है।

आधी रात को हुआ एक्शन: ममता के पूर्व करीबी पर गाज

पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही पूर्ववर्ती सरकार के कई रडार पर आए नेताओं के खिलाफ कानूनी शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। इसी कड़ी में अब सब्यसाची दत्ता पर यह बड़ी गाज गिरी है। दत्ता बंगाल की राजनीति का कोई छोटा नाम नहीं हैं, बल्कि साल्ट लेक और बिधाननगर के पूरे बेल्ट में उनका अच्छा-खासा राजनीतिक रसूख माना जाता है। वह बिधाननगर नगर निगम के पहले मेयर रह चुके हैं और एक समय में उन्हें ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में गिना जाता था।

सब्यसाची दत्ता का राजनीतिक सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। साल 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद उन्होंने टीएमसी नेतृत्व से मतभेदों के चलते पार्टी छोड़ दी थी और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का दामन थाम लिया था। हालांकि, साल 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद उन्होंने घर वापसी करते हुए फिर से टीएमसी का झंडा थाम लिया था। लेकिन अब भ्रष्टाचार और जबरन वसूली के संगीन मामलों ने उनके राजनीतिक भविष्य पर सवालिया निशान लगा दिया है।

क्या है पूरा मामला? क्यों रडार पर आए सब्यसाची?

जांच एजेंसियों से जुड़े आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, सब्यसाची दत्ता पर नगर निकाय (Municipal Corporation) से जुड़े कुछ फैसलों, सरकारी ठेकों के आवंटन और वित्तीय लेन-देन में पद का दुरुपयोग कर जबरन वसूली करने का आरोप है। एजेंसियों का दावा है कि बिधाननगर के मेयर और टीएमसी के वरिष्ठ पद पर रहने के दौरान उन्होंने कई बड़े बिल्डरों और ठेकेदारों से अनुचित लाभ लिया।

“अधिकारियों ने मीडिया को बताया कि लंबी चली प्राथमिक जांच के दौरान उनके हाथ कुछ ऐसे पुख्ता दस्तावेज और डिजिटल सबूत लगे हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता था। इन्हीं सबूतों के आधार पर देर रात उनके आवास पर छापेमारी की गई और फिर उन्हें अरेस्ट किया गया। हालांकि, दूसरी तरफ सब्यसाची दत्ता और उनके वकीलों ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है और इसे राजनीति से प्रेरित कार्रवाई करार दिया है।”

इन बड़े टीएमसी नेताओं पर भी कस चुका है शिकंजा

पश्चिम बंगाल की कमान मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के हाथों में आने के बाद से ही राज्य की कानून व्यवस्था और जांच प्रणालियों में भारी आक्रामकता देखी जा रही है। सब्यसाची दत्ता की यह गिरफ्तारी कोई इकलौता मामला नहीं है, बल्कि पिछले कुछ हफ्तों के भीतर टीएमसी के कई बड़े दिग्गज सलाखों के पीछे जा चुके हैं:

  • सुजीत बोस: कुछ ही दिनों पहले टीएमसी सरकार में कद्दावर मंत्री रह चुके सुजीत बोस को कथित नगरपालिका भर्ती घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में केंद्रीय एजेंसी ने गिरफ्तार किया था।

  • जयप्रकाश मजूमदार: टीएमसी के वरिष्ठ नेता जयप्रकाश मजूमदार को कथित रूप से अवैध सरकारी और निजी संपत्तियों पर कब्जा करने और वित्तीय धोखाधड़ी के मामले में कानून का सामना करना पड़ा और उन्हें अरेस्ट किया गया।

  • जहांगीर खान: रंगदारी, धमकी और सिंडिकेट राज चलाने के आरोपी जहांगीर खान को सुरक्षा एजेंसियों ने भारत-नेपाल सीमा (Border) के पास से उस वक्त धर दबोचा था, जब वे देश छोड़कर भागने की फिराक में थे।

इन ताबड़तोड़ कार्रवाइयों से साफ है कि आने वाले दिनों में टीएमसी के कई अन्य क्षेत्रीय क्षत्रप भी जांच के दायरे में आ सकते हैं, जिससे पार्टी के भीतर जमीनी स्तर पर भारी असंतोष और डर का माहौल देखा जा रहा है।

टीएमसी का आरोप- ‘बदले की भावना से काम कर रही है सरकार’

इस पूरी प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई पर तृणमूल कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का कहना है कि यह पूरी कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और विपक्ष की आवाज को दबाने के लिए सरकारी मशीनरी का नंगा नाच किया जा रहा है। टीएमसी प्रवक्ताओं का तर्क है कि चुनाव के ठीक बाद जानबूझकर उनके उम्मीदवारों और मजबूत नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है ताकि संगठन को पंगु किया जा सके।

बहरहाल, कोलकाता की सियासत इस समय पूरी तरह से कोर्ट-कचहरी और जांच एजेंसियों के इर्द-गिर्द सिमट गई है। सब्यसाची दत्ता को आज कोर्ट में पेश किया जाएगा, जहां जांच एजेंसियां उनकी रिमांड की मांग करेंगी ताकि सिंडिकेट और जबरन वसूली के इस कथित नेटवर्क की परतों को और गहराई से खंगाला जा सके। पूरे राज्य की जनता की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि इस सियासी रार का ऊंट किस करवट बैठता है।

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