
मैदुगुरी (नाइजीरिया): अफ्रीका महाद्वीप की सबसे बड़ी आबादी वाले देश नाइजीरिया में सुरक्षा संकट एक बार फिर गहरा गया है। उत्तर-पूर्वी नाइजीरिया के बोर्नो राज्य में मंगलवार देर रात इस्लामिक उग्रवादियों ने एक सुदूरवर्ती गांव को निशाना बनाते हुए भीषण नरसंहार को अंजाम दिया। इस कायराना हमले में 11 ग्रामीणों की मौत हो गई है, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं। स्थानीय अधिकारियों और चश्मदीदों के अनुसार, इस हमले के पीछे कुख्यात आतंकी संगठन ‘बोको हराम’ का हाथ माना जा रहा है।
यह हमला बोर्नो राज्य के पुबागु गांव में हुआ, जो कुख्यात साम्बिसा जंगल के किनारे स्थित है। साम्बिसा जंगल लंबे समय से आतंकवादी समूहों का सुरक्षित ठिकाना रहा है।
अंधेरे का फायदा उठाकर गांव में घुसे हमलावर
स्थानीय प्रशासन से प्राप्त जानकारी के अनुसार, हमलावरों ने मंगलवार की आधी रात को उस समय गांव पर धावा बोला जब अधिकांश ग्रामीण गहरी नींद में थे। अत्याधुनिक हथियारों से लैस आतंकवादियों ने पहले अंधाधुंध गोलीबारी शुरू की और फिर घरों को आग लगाना शुरू कर दिया। हमले की अचानक हुई इस कार्रवाई से गांव में अफरा-तफरी मच गई।
स्थानीय काउंसिल के चेयरमैन मवादा सैदू उबा ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया को बताया कि पुबागु गांव अब तक सुरक्षित इलाकों में गिना जाता था। उन्होंने कहा, “यह हमारे काउंसिल क्षेत्र का एक ऐसा स्थान है जहाँ कल रात से पहले कभी इस तरह की हिंसा नहीं हुई थी। इस हमले ने पूरे इलाके में दहशत पैदा कर दी है।“
मकानों को बनाया निशाना, 11 की मौत
स्थानीय वार्ड अधिकारी उस्मान रुमिरगो ने बताया कि आतंकियों का उद्देश्य केवल हत्या करना नहीं, बल्कि गांव को तबाह करना था। उन्होंने कई घरों को आग के हवाले कर दिया, जिससे ग्रामीणों की जीवनभर की जमा-पूंजी राख हो गई। हमले में घायल हुए दो व्यक्तियों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जिनकी हालत नाजुक बनी हुई है। बुधवार सुबह जब सूरज निकला, तो गांव का दृश्य हृदयविदारक था। ग्रामीणों ने सिसकियों के बीच अपने परिजनों को सामूहिक रूप से सुपुर्द-ए-खाक किया।
बोर्नो: इस्लामिक विद्रोह का केंद्र
नाइजीरिया का बोर्नो राज्य पिछले डेढ़ दशक से अधिक समय से नाइजीरिया बोको हराम हमला 2026 जैसे चरमपंथी संकटों का सामना कर रहा है। यह क्षेत्र बोको हराम और उसके अलग हुए गुट ‘इस्लामिक स्टेट वेस्ट अफ्रीका प्रोविंस’ (ISWAP) के बीच शक्ति संघर्ष का गवाह रहा है।
बोको हराम, जिसका अर्थ है ‘पश्चिमी शिक्षा हराम है’, ने 2009 से नाइजीरिया में अपनी हिंसक गतिविधियां शुरू की थीं। तब से लेकर अब तक हज़ारों लोग मारे जा चुके हैं और लाखों लोग विस्थापित हुए हैं। पुबागु गांव की यह ताज़ा घटना दर्शाती है कि सुरक्षा बलों की तमाम कोशिशों के बावजूद दूरदराज के इलाके आज भी इन उग्रवादियों के निशाने पर हैं।
सुरक्षा की खामियां और ‘बैंडिट’ समूहों का खौफ
नाइजीरिया की सुरक्षा एजेंसियां वर्तमान में कई मोर्चों पर जूझ रही हैं। एक तरफ उत्तर-पूर्व में बोको हराम और ISWAP का खतरा है, तो दूसरी तरफ देश के अन्य हिस्सों में “लकुरावा” जैसे नए गुट और “बैंडिट” (डाकू) समूह सक्रिय हैं। ये समूह फिरौती के लिए अपहरण, अवैध खनन और लूटपाट जैसी घटनाओं को अंजाम देते हैं। नाइजीरिया के विशाल ग्रामीण इलाकों में सुरक्षा बलों की सीमित पहुंच का फायदा उठाकर ये आतंकी समूह अक्सर ऐसे गांवों को चुनते हैं जहां प्रतिरोध कम हो।
वैश्विक चिंता और मानवीय संकट
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने इस हमले की कड़ी निंदा की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नाइजीरियाई सरकार ने अपनी सीमा सुरक्षा और ग्रामीण निगरानी तंत्र को मजबूत नहीं किया, तो नाइजीरिया बोको हराम हमला 2026 की घटनाओं में और वृद्धि हो सकती है। अफ्रीका के इस पावरहाउस में अस्थिरता का असर पूरे पश्चिम अफ्रीकी क्षेत्र की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर पड़ रहा है।
पुबागु गांव में हुए इस हमले के बाद स्थानीय लोगों में भारी रोष है। ग्रामीणों का कहना है कि वे सरकार से सुरक्षा की गुहार लगाते-लगाते थक गए हैं। प्रशासन ने हालांकि इलाके में अतिरिक्त सुरक्षा बल भेजने का दावा किया है, लेकिन साम्बिसा जंगल की भौगोलिक परिस्थितियां आतंकियों को भागने में मदद करती हैं।
नाइजीरिया के लिए यह घटना एक वेक-अप कॉल की तरह है। पुबागु गांव का नरसंहार यह याद दिलाता है कि जब तक साम्बिसा जंगल जैसे सुरक्षित ठिकानों को पूरी तरह खत्म नहीं किया जाता, तब तक निर्दोष ग्रामीणों की जान जोखिम में रहेगी। फिलहाल, समूचे बोर्नो राज्य में मातम पसरा हुआ है और लोग इस डर के साये में जी रहे हैं कि अगली रात किस गांव की बारी होगी।



