By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
The Hill IndiaThe Hill IndiaThe Hill India
Notification Show More
Font ResizerAa
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Reading: देहरादून के ‘फुटहिल्स’ पर संकट: नैनीताल हाईकोर्ट की बड़ी सख्ती, अवैध निर्माण पर राज्य सरकार और MDDA से 3 हफ्ते में मांगा जवाब
Share
Font ResizerAa
The Hill IndiaThe Hill India
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Search
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Have an existing account? Sign In
Follow US
The Hill India > Blog > उत्तराखंड > देहरादून के ‘फुटहिल्स’ पर संकट: नैनीताल हाईकोर्ट की बड़ी सख्ती, अवैध निर्माण पर राज्य सरकार और MDDA से 3 हफ्ते में मांगा जवाब
उत्तराखंडफीचर्ड

देहरादून के ‘फुटहिल्स’ पर संकट: नैनीताल हाईकोर्ट की बड़ी सख्ती, अवैध निर्माण पर राज्य सरकार और MDDA से 3 हफ्ते में मांगा जवाब

The Hill India News
Last updated: April 23, 2026 2:48 am
The Hill India News
Published: April 23, 2026
Share
SHARE

नैनीताल/देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून, जो कभी अपनी हरी-भरी वादियों और बागों के लिए जानी जाती थी, आज अनियोजित शहरीकरण और कंक्रीट के जंगल में तब्दील हो रही है। इस गंभीर पारिस्थितिक संकट पर नैनीताल हाईकोर्ट ने एक बार फिर कड़ा रुख अपनाया है। देहरादून जिले की पहाड़ियों की तलहटी (Foot-hills) में बड़े पैमाने पर हो रहे अवैध निर्माण के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने प्रशासन को आड़े हाथों लिया है।

Contents
संवेदनशील ढलानों पर धड़ल्ले से निर्माण: याचिकाकर्ता की दलील2019 के बाद फिर गरमाया मामलाकंक्रीट के जंगल में बदलता देहरादून: एक चेतावनीMDDA और जैव विविधता बोर्ड की भूमिका पर सवालक्या होगा अगला कदम?विकास बनाम विनाश की बहस

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार, मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA), और राज्य जैव विविधता बोर्ड को नोटिस जारी कर तीन सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।

संवेदनशील ढलानों पर धड़ल्ले से निर्माण: याचिकाकर्ता की दलील

यह पूरा मामला देहरादून निवासी रेनू पॉल द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने अदालत के समक्ष चौंकाने वाले तथ्य पेश किए हैं। शपथ पत्र के माध्यम से बताया गया कि देहरादून के फुटहिल क्षेत्रों में, जहाँ ढलान 30 डिग्री से अधिक है, वहां नियमों को ताक पर रखकर बहुमंजिला इमारतें और व्यावसायिक परिसर खड़े कर दिए गए हैं।

याचिका में कहा गया है कि ये क्षेत्र ‘इकोलॉजिकल सेंसिटिव ज़ोन’ (ESZ) के अंतर्गत आते हैं और भूस्खलन की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील हैं। देहरादून फुटहिल अवैध निर्माण हाईकोर्ट के इस मामले में यह तर्क दिया गया है कि यदि इन निर्माणों को तत्काल नहीं रोका गया, तो आने वाले समय में हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र को अपूरणीय क्षति पहुँच सकती है।

2019 के बाद फिर गरमाया मामला

हैरानी की बात यह है कि यह मामला साल 2021 से लंबित था, लेकिन संबंधित विषयों पर साल 2019 के बाद से कोई प्रभावी सुनवाई नहीं हो सकी थी। याचिकाकर्ता रेनू पॉल ने दोबारा विस्तृत शपथ पत्र पेश कर अदालत को अवगत कराया कि पिछले कुछ वर्षों में स्थिति सुधरने के बजाय और बिगड़ी है।

अदालत ने पूर्व में भी इन क्षेत्रों के लिए एक विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी, जिसे लेकर प्रशासन की सुस्ती पर अब हाईकोर्ट ने नाराजगी जाहिर की है। खंडपीठ ने स्पष्ट किया है कि पर्यावरण के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी निर्माण को संरक्षण नहीं दिया जा सकता।

कंक्रीट के जंगल में बदलता देहरादून: एक चेतावनी

देहरादून का भौगोलिक स्वरूप तेजी से बदल रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि दून घाटी की तलहटी में स्थित पहाड़ियाँ शहर के लिए ‘स्पंज’ का काम करती हैं, जो वर्षा जल को सोखती हैं। लेकिन अब वहां बिछ रही कंक्रीट की चादर ने जल संचयन की प्रक्रिया को रोक दिया है।

अवैध निर्माण का प्रभाव:

  • भूस्खलन का खतरा: 30 डिग्री से अधिक ढलान वाली मिट्टी निर्माण का भार सहने में सक्षम नहीं है।

  • जैव विविधता का ह्रास: जैव विविधता बोर्ड की अनदेखी के कारण दुर्लभ वनस्पतियां नष्ट हो रही हैं।

  • जल भराव की समस्या: प्राकृतिक नालों और जल निकासी क्षेत्रों पर अतिक्रमण से मानसून के दौरान बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो रही है।

MDDA और जैव विविधता बोर्ड की भूमिका पर सवाल

हाईकोर्ट ने इस मामले में MDDA (मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण) की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। यह प्राधिकरण शहर के नियोजन और अवैध निर्माण रोकने के लिए जिम्मेदार है, लेकिन फुटहिल क्षेत्रों में बढ़ती इमारतों की कतार इसकी कार्यप्रणाली पर संदेह पैदा करती है। इसके साथ ही, जैव विविधता बोर्ड से भी पूछा गया है कि पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण इन क्षेत्रों में निर्माण की अनुमति कैसे दी जा रही है या उनके संरक्षण के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।

क्या होगा अगला कदम?

अदालत ने अब इस मामले की अगली सुनवाई तीन हफ्ते बाद तय की है। कानून के जानकारों का मानना है कि यदि प्रशासन संतोषजनक जवाब नहीं दे पाता है, तो हाईकोर्ट निर्माणाधीन परियोजनाओं पर ‘स्टे’ (रोक) लगाने या अवैध घोषित की गई इमारतों को गिराने का आदेश दे सकता है।

देहरादून के नागरिकों और पर्यावरणविदों ने हाईकोर्ट के इस हस्तक्षेप का स्वागत किया है। उनका कहना है कि देहरादून फुटहिल अवैध निर्माण हाईकोर्ट की यह सख्ती ही दून की पहाड़ियों को विनाश से बचा सकती है।

विकास बनाम विनाश की बहस

उत्तराखंड में ‘विकास’ और ‘पर्यावरण संरक्षण’ के बीच का संतुलन हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है। देहरादून के फुटहिल में हो रहा निर्माण इसी संघर्ष का हिस्सा है। जहाँ एक ओर बिल्डर और रियल एस्टेट लॉबी मुनाफे के लिए नियमों को मरोड़ रही है, वहीं दूसरी ओर प्रकृति अपना संतुलन खो रही है। नैनीताल हाईकोर्ट का यह ताजा आदेश न केवल देहरादून के लिए, बल्कि पूरे उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों के लिए एक नजीर साबित हो सकता है।

अब सबकी निगाहें तीन हफ्ते बाद होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जहाँ सरकार को यह साबित करना होगा कि वह राज्य के प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए कितनी गंभीर है।

You Might Also Like

नई दिल्ली : मनीष सिसोदिया और सतेंद्र जैन ने दिल्ली कैबिनेट से दिया इस्‍तीफा
बीजेपी नेता शाजिया इल्मी का बड़ा आरोप, ‘कोलकाता रेप-मर्डर पीड़िता के माता-पिता पर दबाव बना रही पुलिस़’
Weather Update: राजधानी दिल्ली में आज भी झमाझम बारिश, जानें अन्य राज्यों का हाल
ऐतिहासिक कदम का एक साल: उत्तराखंड में 27 जनवरी को मनेगा ‘यूसीसी दिवस’; CM धामी ने नैनीताल से भरी हुंकार
मुंबई में भारी बारिश से शहर का हुआ बुरा हाल, लोकल ट्रेनें भी हुईं प्रभावित
TAGGED:Dehradun Master Plan ViolationMussoorie Dehradun Development Authority (MDDA) News.Nainital High Court PILRenu Paul PIL DehradunUttarakhand Landslide Prone Area
Share This Article
Facebook Email Print
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
YoutubeSubscribe
TelegramFollow
Popular News
उत्तराखंडफीचर्ड

UTU पेपर लीक कांड में बड़ा एक्शन: असिस्टेंट प्रोफेसर पर मुकदमा, अगस्त में दोबारा होगी परीक्षा; शिक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

The Hill India News
The Hill India News
July 23, 2026
TET पर सरकार का बड़ा ऐलान: लाखों सरकारी शिक्षकों को नहीं मिलेगी छूट, संसद में साफ कहा- परीक्षा पास करना रहेगा अनिवार्य
छात्रों से बातचीत को तैयार केंद्र सरकार, NEET विवाद के बीच संवाद से समाधान निकालने की पहल तेज
पेपर लीक और लाठीचार्ज के विरोध में बिहार उबल पड़ा: कई जिलों में छात्रों का प्रदर्शन तेज, शिक्षा व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल
5 करोड़ शिवभक्तों के स्वागत को तैयार हरिद्वार: कांवड़ मेले में 32 अस्थायी अस्पताल, जंगलों में वनकर्मियों की चौकसी और सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतज़ाम
‘बटवारा 1947’ को बिना किसी कट के मिली सेंसर बोर्ड की मंजूरी, 14 अगस्त को बड़े पर्दे पर दिखेगी विभाजन की दर्दभरी कहानी
रेल यात्रियों के लिए बड़ा बदलाव: अब TTE की टिकट जांच होगी बॉडी कैमरे की निगरानी में, बातचीत और विवाद की पूरी रिकॉर्डिंग होगी
अग्निवीरों के लिए बड़ी खुशखबरी! सेना के बाद CAPFs में 50% आरक्षण, जानिए आर्मी और अर्धसैनिक बलों की नौकरी में क्या है सबसे बड़ा अंतर
उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय में पेपर लीक का बड़ा खुलासा: परीक्षा रद्द, हजारों छात्रों का भविष्य अधर में
ग्वालियर में बनेगी देश की पहली ‘3-इन-1’ हाईटेक फ्लोरीकल्चर नर्सरी, खेती, रिसर्च और पर्यटन का बनेगा नया राष्ट्रीय मॉडल
© The Hill India. All Rights Reserved | Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?