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उत्तराखंड: केदारनाथ यात्रा 2026 का शुभारंभ, ओंकारेश्वर मंदिर में भुकुंट भैरव पूजा के साथ शुरू हुई पवित्र परंपरा, कल रवाना होगी डोली

ओंकारेश्वर मंदिर में क्षेत्र रक्षक भुकुंट भैरव की विधिवत पूजा-अर्चना के साथ विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम की यात्रा का औपचारिक शुभारंभ हो गया है। उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान ने चारधाम यात्रा 2026 की पवित्र शुरुआत का संकेत दे दिया है। श्रद्धा, परंपरा और आस्था के इस अद्भुत संगम ने पूरे क्षेत्र को भक्ति के रंग में रंग दिया है।

चारधाम यात्रा का आधिकारिक आगाज 19 अप्रैल को गंगोत्री धाम और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ होगा, लेकिन उससे पहले केदारनाथ यात्रा की परंपरागत शुरुआत ओंकारेश्वर मंदिर से हो चुकी है। यह मंदिर भगवान केदारनाथ का शीतकालीन गद्दी स्थल माना जाता है, जहां सर्दियों के दौरान भगवान की पूजा-अर्चना की जाती है।

शनिवार को आयोजित विशेष पूजा में क्षेत्र रक्षक देवता भुकुंट भैरव की आराधना की गई। इस दौरान स्थानीय श्रद्धालुओं और मंदिर समिति के सहयोग से मंदिर को करीब आठ क्विंटल विभिन्न प्रकार के फूलों से सजाया गया, जिससे पूरा परिसर भव्य और दिव्य नजर आया। धार्मिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक विधियों के बीच संपन्न हुए इस आयोजन ने आने वाली यात्रा के सफल और निर्विघ्न होने की कामना की।

मंदिर प्रभारी विजेंद्र बिष्ट ने जानकारी दी कि इस पूजा में स्थानीय लोगों ने नए अनाज का भोग अर्पित किया, जो समृद्धि और शुभता का प्रतीक माना जाता है। उन्होंने बताया कि हर वर्ष की तरह इस बार भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस आयोजन में शामिल हुए और भगवान से यात्रा की सफलता के लिए प्रार्थना की।

अब अगला महत्वपूर्ण चरण 19 अप्रैल को होगा, जब भगवान केदारनाथ की पंचमुखी चल विग्रह उत्सव डोली उखीमठ से केदारनाथ धाम के लिए रवाना होगी। सेना के बैंड की मधुर धुनों और श्रद्धालुओं के जयकारों के बीच यह डोली यात्रा शुरू होगी। यह डोली विभिन्न पड़ावों से गुजरते हुए श्रद्धालुओं को आशीर्वाद देती हुई 21 अप्रैल को केदारनाथ धाम पहुंचेगी।

डोली केदारनाथ पहुंचने के बाद भगवान की मूर्ति को भंडार गृह में विराजमान किया जाएगा। इसके पश्चात 22 अप्रैल की सुबह वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक विधि-विधान के साथ केदारनाथ मंदिर के कपाट ग्रीष्मकाल के लिए श्रद्धालुओं के दर्शन हेतु खोल दिए जाएंगे। यह क्षण लाखों भक्तों के लिए अत्यंत पवित्र और प्रतीक्षित होता है।

इस बीच, केदारनाथ यात्रा में शामिल होने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु उखीमठ पहुंच चुके हैं। तीर्थयात्रियों में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। कई श्रद्धालु पैदल यात्रा के लिए तैयार हैं और यात्रा मार्ग पर पड़ने वाले विभिन्न पड़ावों पर रुकते हुए भगवान केदारनाथ के दर्शन करने के लिए उत्सुक हैं।

यात्रा की व्यवस्थाओं को लेकर भी प्रशासन और मंदिर समिति पूरी तरह सक्रिय है। केदारनाथ धाम में व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने के लिए एडवांस टीम पहले ही पहुंच चुकी है। समिति के सदस्य डीएस भुजवाण ने बताया कि यात्रा को सुव्यवस्थित और सुरक्षित बनाने के लिए सभी आवश्यक इंतजाम किए जा रहे हैं और तय समयसीमा के भीतर सभी तैयारियां पूरी कर ली जाएंगी।

इसके अलावा, जल संस्थान द्वारा गौरीकुंड से केदारनाथ तक लगभग 18 किलोमीटर लंबे पैदल मार्ग पर पेयजल की व्यवस्था सुचारू कर दी गई है। रास्ते में विभिन्न स्थानों पर पानी की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है, जिससे तीर्थयात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

यात्रा मार्ग पर व्यापारिक गतिविधियां भी धीरे-धीरे बढ़ने लगी हैं। स्थानीय दुकानदार, होटल संचालक और अन्य व्यवसायी अपनी तैयारियों में जुट गए हैं। इससे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को भी गति मिलने की उम्मीद है।

चारधाम यात्रा हर वर्ष उत्तराखंड की आस्था और पर्यटन का सबसे बड़ा केंद्र होती है। केदारनाथ धाम की यात्रा विशेष रूप से कठिन मानी जाती है, लेकिन इसके बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं आती। इस बार भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।

इस तरह ओंकारेश्वर मंदिर में भुकुंट भैरव की पूजा के साथ शुरू हुई यह पावन यात्रा अब अपने अगले चरण में प्रवेश कर चुकी है। आने वाले दिनों में केदारनाथ धाम में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ने की उम्मीद है, जिससे पूरा क्षेत्र एक बार फिर भक्ति और आस्था के रंग में रंग जाएगा।

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