
गंगोत्री धाम की पावन यात्रा के शुभारंभ का धार्मिक उत्साह चरम पर पहुंच गया है। आगामी चारधाम यात्रा 2026 के आगाज से पहले मां गंगा की भोग मूर्ति की डोली शनिवार को पूरे विधि-विधान और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मुखबा गांव से गंगोत्री धाम के लिए रवाना हुई। यह क्षण न केवल स्थानीय ग्रामीणों बल्कि देशभर से पहुंचे श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत भावुक और आस्था से भरा रहा।
शनिवार दोपहर 12 बजकर 15 मिनट पर अभिजीत मुहूर्त में मां गंगा की डोली को विधिवत पूजा-अर्चना के बाद विदा किया गया। इस दौरान गांव में भक्ति का अद्भुत माहौल देखने को मिला। सेना के बैंड, ढोल-दमाऊं की गूंज और “जय मां गंगे” के उद्घोष के बीच डोली ने अपनी यात्रा प्रारंभ की। डोली के साथ मुखबा-धराली के समेश्वर देवता की देवडोली भी चल रही थी, जो इस धार्मिक यात्रा को और भी विशेष बनाती है।
मुखबा गांव, जिसे मां गंगा का शीतकालीन निवास माना जाता है, वहां से हर वर्ष इस प्रकार डोली यात्रा का आयोजन किया जाता है। ग्रामीणों ने मां गंगा को पारंपरिक ‘कल्यो’ (कंडा) और स्थानीय व्यंजन ‘फाफरा’ का भोग लगाकर नम आंखों से विदाई दी। यह विदाई इसलिए भी भावुक होती है क्योंकि मां गंगा की यह यात्रा छह माह के लिए गंगोत्री धाम की ओर होती है और इस दौरान मुखबा गांव मां की उपस्थिति से वंचित रहता है।
डोली की यात्रा मार्ग भी अपने आप में चुनौतीपूर्ण है। मुखबा से जांगला तक लगभग सात किलोमीटर का रास्ता जोखिम भरा और पहाड़ी है। इसके बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं होता। डोली आज भैरों घाटी पहुंचेगी, जहां रात्रि विश्राम किया जाएगा। इसके बाद रविवार सुबह डोली पुनः गंगोत्री धाम के लिए रवाना होगी।
रविवार को विशेष रूप से अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर गंगोत्री धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। तय कार्यक्रम के अनुसार दोपहर 12 बजकर 15 मिनट पर विधिवत पूजा-अर्चना के बाद कपाट खोले जाएंगे। इसके साथ ही आगामी छह महीनों तक लाखों श्रद्धालु मां गंगा के दर्शन कर सकेंगे।
इस अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों से आए श्रद्धालुओं ने अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। मुंबई से आए एक श्रद्धालु ने कहा कि यह उनके जीवन का अत्यंत सौभाग्यपूर्ण क्षण है कि वे इस दिव्य यात्रा का हिस्सा बन सके। उन्होंने कहा कि इस आध्यात्मिक अनुभव को वह जीवनभर नहीं भूल पाएंगे।
इधर, यमुनोत्री धाम के कपाट भी इसी क्रम में खोले जाएंगे। यमुनोत्री मंदिर समिति के प्रवक्ता के अनुसार, मां यमुना की डोली खरसाली गांव से रविवार सुबह 8:45 बजे रवाना होगी। डोली के साथ स्थानीय वाद्ययंत्रों और जयकारों की गूंज के बीच यात्रा शुरू होगी। इस दौरान मां यमुना के भाई शनिदेव महाराज की डोली भी अपनी बहन को विदा करने के लिए यमुनोत्री तक जाएगी, जो इस परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
चारधाम यात्रा, जिसमें गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ शामिल हैं, हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र मानी जाती है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु इस यात्रा में भाग लेते हैं। उत्तराखंड सरकार और स्थानीय प्रशासन ने इस वर्ष भी यात्रा को सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाने के लिए व्यापक तैयारियां की हैं।
यात्रा मार्गों की सफाई, सुरक्षा व्यवस्था, स्वास्थ्य सुविधाएं और यातायात प्रबंधन को लेकर विशेष इंतजाम किए गए हैं। मुख्यमंत्री द्वारा भी श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे यात्रा के दौरान स्वच्छता बनाए रखें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।
इस प्रकार मां गंगा की डोली के गंगोत्री धाम के लिए प्रस्थान के साथ ही चारधाम यात्रा का आधिकारिक शुभारंभ हो गया है। यह यात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। आने वाले दिनों में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु इस दिव्य यात्रा में शामिल होकर पुण्य लाभ अर्जित करेंगे।



