
उत्तराखंड की पवित्र चारधाम यात्रा का विधिवत शुभारंभ धर्मनगरी हरिद्वार से हो गया है। शनिवार सुबह हरिद्वार के प्रसिद्ध मायादेवी मंदिर परिसर से करीब 250 श्रद्धालुओं का पहला जत्था पूजा-अर्चना के बाद रवाना हुआ। पूरे शहर में भक्तिमय माहौल देखने को मिला, जहां श्रद्धालु “जय बदरी-विशाल” और “हर-हर गंगे” के जयकारों के साथ अपनी यात्रा पर निकले।
हरिद्वार को चारधाम यात्रा का प्रवेश द्वार माना जाता है और हर वर्ष यहां से हजारों श्रद्धालु चारधाम यात्रा के लिए प्रस्थान करते हैं। इस बार भी यात्रा शुरू होने से पहले श्रद्धालुओं ने मंदिरों में पूजा कर आशीर्वाद लिया और फिर अपने-अपने गंतव्य की ओर बढ़े। बताया जा रहा है कि पहले ही दिन हरिद्वार से लगभग 1000 वाहन चारधाम के लिए रवाना हुए हैं, जो इस यात्रा के प्रति लोगों के उत्साह को दर्शाता है।
हरिद्वार टूर ऑपरेटर्स एंड ट्रैवल एसोसिएशन के पदाधिकारियों के अनुसार, इस बार यात्रा को लेकर काफी सकारात्मक माहौल है। एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय शुक्ला ने कहा कि उत्तराखंड सरकार द्वारा यात्रा के लिए लागू यात्रियों की संख्या की सीमा (कैपिंग) हटाने का फैसला बेहद अहम साबित हुआ है। इससे श्रद्धालुओं के मन में जो संशय था, वह खत्म हो गया है और यात्रा के लिए बुकिंग में तेजी आई है। उनका मानना है कि इस बार चारधाम यात्रा पिछले वर्षों के सभी रिकॉर्ड तोड़ सकती है।
एसोसिएशन के सचिव गिरीश भाटिया ने बताया कि शनिवार को मायादेवी मंदिर परिसर से मां मायादेवी, मां मनसा देवी और मां गंगा का आशीर्वाद लेकर श्रद्धालुओं का पहला दल रवाना हुआ। उन्होंने कहा कि हरिद्वार शहर से करीब 1000 वाहन विभिन्न धामों की ओर निकल चुके हैं और आने वाले दिनों में यह संख्या और बढ़ेगी।
वहीं, टैक्सी मैक्सी ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय शर्मा ने भी सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यात्रियों की संख्या पर लगी पाबंदी हटाने से यात्रा को बड़ा बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि हरिद्वार के सभी ट्रैवल कारोबारी श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुगम यात्रा उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
चारधाम यात्रा के लिए देश के विभिन्न राज्यों—जैसे गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश—से बड़ी संख्या में श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचे हैं। सभी में यात्रा को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है। श्रद्धालुओं का कहना है कि इस बार व्यवस्थाएं पहले से बेहतर लग रही हैं और उन्हें यात्रा में किसी तरह की परेशानी की उम्मीद नहीं है।
चारधाम यात्रा में प्रमुख रूप से चार पवित्र धाम शामिल हैं—यमुनोत्री धाम, गंगोत्री धाम, केदारनाथ धाम और बदरीनाथ धाम। इन चारों धामों की यात्रा को हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है और हर साल लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
यात्रा के कार्यक्रम के अनुसार, 19 अप्रैल को यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। इसके बाद 22 अप्रैल को केदारनाथ धाम और 23 अप्रैल को बदरीनाथ धाम के कपाट खुलेंगे। चूंकि इन धामों तक पहुंचने में काफी समय और कठिन पहाड़ी रास्तों से गुजरना पड़ता है, इसलिए श्रद्धालु पहले ही यात्रा पर निकल जाते हैं, ताकि समय पर दर्शन कर सकें।
हरिद्वार में यात्रा शुरू होने से पहले श्रद्धालु हर की पैड़ी और मनसा देवी मंदिर जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों पर जाकर पूजा-अर्चना करते हैं। मान्यता है कि यहां पूजा करने से यात्रा सफल और मंगलमय होती है।
इस बार सरकार द्वारा व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। सड़क मार्ग, स्वास्थ्य सेवाएं, सुरक्षा व्यवस्था और रजिस्ट्रेशन सिस्टम को सरल बनाया गया है। खास बात यह है कि यात्रियों की संख्या पर लगी सीमा हटने के बाद यात्रा में भाग लेने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में तेजी से इजाफा होने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर, हरिद्वार से चारधाम यात्रा का शुभारंभ बेहद उत्साह और श्रद्धा के साथ हुआ है। श्रद्धालुओं और ट्रैवल कारोबारियों दोनों में इस बार यात्रा को लेकर खासा जोश देखने को मिल रहा है। आने वाले दिनों में जैसे-जैसे सभी धामों के कपाट खुलेंगे, वैसे-वैसे श्रद्धालुओं की संख्या में और बढ़ोतरी होने की संभावना है, जिससे उत्तराखंड की आस्था और पर्यटन दोनों को बड़ा लाभ मिलेगा।



