तेहरान/दुबई: मध्य-पूर्व (Middle East) में महीनों से जारी भारी तनाव और युद्ध की आहट के बीच वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक संजीवनी भरी खबर सामने आई है। ईरान ने रणनीतिक रूप से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) को कमर्शियल जहाजों के लिए पूरी तरह से खोलने का बड़ा निर्णय लिया है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने आधिकारिक घोषणा करते हुए कहा कि अब वाणिज्यिक जहाज इस मार्ग से बिना किसी बाधा के गुजर सकेंगे। हालांकि, इस ‘राहत’ के पीछे ईरान ने अपनी कूटनीतिक शर्तों का एक घेरा भी खींच दिया है।
लेबनान सीजफायर से जुड़ा है होर्मुज का भविष्य
ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर इस ऐतिहासिक फैसले की जानकारी साझा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह निर्णय लेबनान में हुए हालिया सीजफायर के सकारात्मक परिणामों का हिस्सा है। अराघची ने लिखा, “लेबनान में हुए संघर्ष विराम के अनुरूप, ईरान इस्लामी गणराज्य ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले सभी वाणिज्यिक जहाजों के लिए मार्ग को फिर से खोल दिया है। यह छूट सीजफायर की शेष अवधि तक प्रभावी रहेगी।”
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ने इस मार्ग को खोलकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह क्षेत्रीय शांति की स्थिति में वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा का समर्थन करने को तैयार है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था की ‘धमनी’ है होर्मुज
Strait of Hormuz Opening News इसलिए भी पूरी दुनिया की सुर्खियों में है क्योंकि यह जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की रीढ़ माना जाता है। भौगोलिक दृष्टि से ओमान और ईरान के बीच स्थित यह संकरा समुद्री मार्ग दुनिया के कुल कच्चे तेल और एलएनजी (LNG) व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा संभालता है।
सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कुवैत, इराक और कतर जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देशों का अधिकांश निर्यात इसी रास्ते से होकर गुजरता है। पिछले कुछ समय से तनाव के कारण इस मार्ग पर छाये अनिश्चितता के बादलों ने वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों को अस्थिर कर दिया था। अब इस मार्ग के खुलने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और स्थिरता आने की प्रबल संभावना है।
ईरान की ‘कड़ी शर्त’: संप्रभुता और नियंत्रण का संदेश
भले ही ईरान ने मार्ग को खोल दिया है, लेकिन उसने ‘फ्री पास’ नहीं दिया है। विदेश मंत्री अराघची ने साफ कर दिया कि यह मार्ग पूरी तरह से ईरान के बंदरगाह और समुद्री संगठन (Port and Maritime Organization) के दिशा-निर्देशों के अधीन होगा।
जहाजों के लिए अनिवार्य शर्तें:
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समन्वित मार्ग (Coordinated Route): किसी भी जहाज को अपनी मर्जी से मार्ग चुनने की आजादी नहीं होगी। उन्हें ईरान द्वारा निर्धारित ‘कोऑर्डिनेटेड रूट’ का पालन करना अनिवार्य होगा।
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ईरानी निगरानी: समुद्री यातायात पर ईरान का कड़ा नियंत्रण रहेगा और सुरक्षा के नाम पर ईरान इन जहाजों की आवाजाही को मॉनिटर करेगा।
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सीजफायर की अनिवार्यता: यह मार्ग तभी तक खुला रहेगा जब तक लेबनान में सीजफायर का पालन होता रहेगा। यदि वहां तनाव बढ़ता है, तो ईरान दोबारा इस मार्ग को बाधित कर सकता है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार पर संभावित प्रभाव
आर्थिक विश्लेषकों का कहना है कि Strait of Hormuz Opening News के बाद एशियाई और यूरोपीय देशों को सबसे अधिक लाभ होगा। भारत, चीन और जापान जैसे देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इसी मार्ग पर निर्भर हैं। जहाजों के बीमा प्रीमियम (Insurance Premium) में कमी आने से शिपिंग लागत घटेगी, जिसका सीधा असर आने वाले हफ्तों में आम जनता की जेब पर पड़ सकता है।
कूटनीति का नया खेल या स्थायी शांति?
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान का यह कदम केवल व्यापारिक नहीं बल्कि गहरा रणनीतिक है। ईरान ने दुनिया को दिखा दिया है कि ‘होर्मुज’ की चाबी उसके पास है। लेबनान सीजफायर के साथ इस मार्ग को जोड़कर ईरान ने इजराइल और पश्चिमी देशों पर एक मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया है कि यदि क्षेत्र में शांति भंग हुई, तो वैश्विक ऊर्जा सप्लाई लाइन फिर से खतरे में पड़ सकती है।
इसमें कोई दो राय नहीं है कि ईरान का यह फैसला वैश्विक मंदी के डर के बीच एक बड़ी राहत है। लेकिन ‘होर्मुज की शर्त’ यह भी याद दिलाती है कि मध्य-पूर्व की शांति कितनी नाजुक है। जब तक जहाजों के सायरन इस संकरे जलडमरूमध्य में गूँजते रहेंगे और तेल के टैंकर सुरक्षित गुजरते रहेंगे, तब तक दुनिया चैन की सांस लेगी।
अब दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले हफ्तों में सीजफायर की स्थिति क्या रहती है और क्या ईरान इस ‘खिड़की’ को स्थायी रूप से खुला रखने का मन बनाएगा।



