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मध्य पूर्व में शांति की आहट: इजरायल-लेबनान सीजफायर के बीच डोनाल्ड ट्रंप का ‘ईरान’ और ‘हिजबुल्लाह’ पर बड़ा प्रहार

वॉशिंगटन/बेरुत/तेहरान। मध्य पूर्व (Middle East) के सुलगते हालात के बीच एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। इजरायल और लेबनान के बीच औपचारिक रूप से युद्धविराम (सीजफायर) की घोषणा कर दी गई है। इस ऐतिहासिक मोड़ पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक बेहद आक्रामक और चर्चाओं से भरा बयान सामने आया है, जिसने वैश्विक कूटनीति में हलचल पैदा कर दी है। ट्रंप ने न केवल हिजबुल्लाह को ‘अच्छे व्यवहार’ की नसीहत दी है, बल्कि ईरान के साथ अपने पुराने टकरावों को याद दिलाते हुए एक चौंकाने वाला दावा भी किया है।

डोनाल्ड ट्रंप का ईरान पर बड़ा खुलासा: “गुस्से में डुबो दिए 158 जहाज”

अमेरिकी राजनीति में अपने बेबाक अंदाज के लिए मशहूर डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान युद्ध के संदर्भ में अब तक का सबसे बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने ईरान के 158 जहाजों को समुद्र की तलहटी में डुबो दिया था। ट्रंप के अनुसार, “मुझे गुस्सा आ गया था, इसलिए मैंने उन जहाजों को नष्ट करने का आदेश दिया। हम उन जहाजों का इस्तेमाल कर सकते थे, लेकिन उस वक्त क्रोध और परिस्थितियों के कारण उन्हें खत्म करना ही सही लगा।”

ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब दुनिया इजरायल लेबनान सीजफायर के बाद ईरान की अगली प्रतिक्रिया का इंतजार कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह पुराना संदर्भ देना ईरान को एक सख्त चेतावनी है कि अमेरिका की सैन्य शक्ति और कड़ा रुख किसी भी समय वापस लौट सकता है।

हिजबुल्लाह को नसीहत: “अब और हत्याएं नहीं, शांति का समय है”

सीजफायर लागू होने के तुरंत बाद ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर हिजबुल्लाह को संबोधित करते हुए एक पोस्ट साझा किया। उन्होंने लिखा, मुझे उम्मीद है कि हिजबुल्लाह इस महत्वपूर्ण समय में अच्छा व्यवहार करेगा। यदि वे ऐसा करते हैं, तो यह उनके लिए एक बड़ा अवसर होगा। अब और हत्याएं नहीं होनी चाहिए। आखिरकार शांति की स्थापना होनी चाहिए!

हवाइट हाउस द्वारा साझा किए गए इस संदेश को शांति की दिशा में ट्रंप का पहला बड़ा कूटनीतिक हस्तक्षेप माना जा रहा है। ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया कि यदि हिजबुल्लाह इस शांति समझौते का सम्मान करता है, तो क्षेत्र में स्थिरता की नई नींव रखी जा सकती है।

लेबनान में जश्न और ईरान का पलटवार

युद्धविराम की खबर मिलते ही लेबनान की राजधानी बेरुत सहित कई शहरों में लोग सड़कों पर उतर आए। महीनों से बमबारी और विस्थापन का दंश झेल रहे लोग अपनी कारों में झंडे लेकर निकले और आतिशबाजी कर जश्न मनाया। स्थानीय लोगों के लिए यह सीजफायर मौत के साये से बाहर निकलने जैसा है।

दूसरी ओर, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने इस घटनाक्रम को अलग नजरिए से पेश किया। उन्होंने अपनी जनता को संबोधित करते हुए कहा कि, “यह हमारे नागरिकों के 40 दिनों के दृढ़ संकल्प का परिणाम है कि हमलावरों को पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ा।” पेजेश्कियन का यह बयान यह दर्शाता है कि ईरान इस युद्धविराम को अपनी और अपने सहयोगियों की प्रतिरोध क्षमता (Resistance) की जीत के रूप में देख रहा है।

संयुक्त राष्ट्र का स्वागत: “स्थायी शांति का मार्ग प्रशस्त हो”

संयुक्त राष्ट्र (UN) के महासचिव एंटोनियो गुटरेस ने इस युद्धविराम की घोषणा का पुरजोर स्वागत किया है। गुटरेस ने अमेरिका द्वारा इस समझौते में निभाई गई मध्यस्थ की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा, मैं सभी पक्षों से आग्रह करता हूं कि वे इस युद्धविराम का पूरी तरह सम्मान करें और अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करें। मुझे आशा है कि यह कदम क्षेत्र में लंबे समय से चले आ रहे संघर्षों के समाधान के लिए बातचीत का रास्ता खोलेगा।”

क्या टिक पाएगी यह शांति?

हालांकि इजरायल लेबनान सीजफायर की घोषणा हो चुकी है, लेकिन विश्लेषकों के मन में अब भी कई सवाल हैं। क्या इजरायली सेना पूरी तरह पीछे हटेगी? क्या हिजबुल्लाह अपनी सैन्य गतिविधियों को पूरी तरह बंद कर देगा? और सबसे महत्वपूर्ण, क्या डोनाल्ड ट्रंप की वापसी के बाद अमेरिका की मध्य पूर्व नीति में आने वाला बदलाव इस शांति को मजबूती देगा या नए तनाव को जन्म देगा?

फिलहाल, लेबनान की सड़कों पर गूंजता जश्न और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बदलती बयानबाजी यह संकेत दे रही है कि दुनिया एक और बड़े युद्ध को टालने की दिशा में आगे बढ़ चुकी है।

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