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उत्तराखंड: किच्छा एम्स सैटेलाइट सेंटर का 85% काम पूरा, मुख्य सचिव ने दिया अगस्त से OPD शुरू करने का ‘डेडलाइन’

किच्छा (ऊधमसिंह नगर)। उत्तराखंड के तराई क्षेत्र और कुमाऊं मंडल के लिए स्वास्थ्य सेवाओं के मोर्चे पर एक बड़ी और सुखद खबर सामने आई है। किच्छा में निर्माणाधीन बहुप्रतीक्षित एम्स सैटेलाइट सेंटर (AIIMS Satellite Centre Kichha) अब अपने अंतिम चरण में है। गुरुवार को प्रदेश के मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने निर्माण कार्य का स्थलीय निरीक्षण किया और स्पष्ट निर्देश दिए कि आगामी जुलाई 2026 तक हर हाल में निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया जाए, ताकि अगस्त माह से यहाँ ओपीडी (OPD) सेवाओं का संचालन शुरू किया जा सके।

351 करोड़ का प्रोजेक्ट: कुमाऊं की बदलेगी तस्वीर

लगभग 351 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से बन रहा यह 280 बेड का अस्पताल न केवल ऊधमसिंह नगर, बल्कि पड़ोसी जिलों और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए भी लाइफलाइन साबित होगा। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने निरीक्षण के दौरान कार्य की प्रगति पर संतोष व्यक्त किया, लेकिन साथ ही हिदायत भी दी कि फिनिशिंग के काम में तेजी लाई जाए। उन्होंने सीपीडब्ल्यूडी (CPWD) के अभियंताओं को निर्देश दिए कि साइट पर श्रमिकों की संख्या और आधुनिक उपकरणों की तैनाती बढ़ाई जाए ताकि किसी भी तकनीकी देरी से बचा जा सके।

अगस्त से गूंजेगी ओपीडी की दस्तक: क्या है तैयारी?

निरीक्षण के दौरान मुख्य सचिव ने कहा कि चिकित्सालय के मुख्य भवनों को प्राथमिकता के आधार पर तैयार किया जाए। उनका विजन स्पष्ट है कि इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ चिकित्सा सुविधाओं का सेटअप भी समानांतर रूप से चले। एम्स सैटेलाइट सेंटर किच्छा को लेकर एम्स ऋषिकेश की निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने भी आश्वस्त किया कि यदि जुलाई के अंत तक भवन हैंडओवर हो जाता है, तो अगस्त के प्रथम या द्वितीय सप्ताह से विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में ओपीडी शुरू कर दी जाएगी।

इंजीनियरिंग रिपोर्ट: 85 प्रतिशत लक्ष्य हासिल

सीपीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता उत्पल त्रिपाठी ने मुख्य सचिव को प्रोजेक्ट का विस्तृत ब्यौरा पेश किया। रिपोर्ट के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • आवासीय ब्लॉक: डॉक्टरों और स्टाफ के लिए आवासीय भवनों का 85% से अधिक कार्य पूर्ण हो चुका है, जिसे मई तक शत-प्रतिशत पूरा कर लिया जाएगा।

  • कनेक्टिविटी: अस्पताल परिसर की आंतरिक सड़कों का निर्माण भी मई के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य है।

  • सौंदर्यीकरण: जून माह में पूरे परिसर में सघन वृक्षारोपण (Plantation) कर इसे ‘ग्रीन कैंपस’ के रूप में विकसित किया जाएगा।

  • एप्रोच रोड: सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता ने बताया कि हाईवे की तरफ से तीन एप्रोच गेट बनाए जा रहे हैं, जिनके पास नाला निर्माण और पुलिया का काम जुलाई से पहले निपटा लिया जाएगा।

सुपर स्पेशियलिटी सुविधाओं से लैस होगा सेंटर

किच्छा का यह सैटेलाइट सेंटर केवल एक सामान्य अस्पताल नहीं, बल्कि एक सुपर स्पेशियलिटी हब होगा। यहाँ मिलने वाली प्रमुख सुविधाओं में शामिल हैं:

  • बेड क्षमता: 250 सामान्य बेड और 30 हाई-टेक आईसीयू (ICU) बेड।

  • ऑपरेशन थिएटर: जटिल सर्जरी के लिए 10 अत्याधुनिक मॉड्यूलर ओटी (OT)।

  • विशेषज्ञ विभाग: कार्डियोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, यूरोलॉजी, न्यूरोलॉजी और जनरल मेडिसिन जैसे महत्वपूर्ण विभाग।

  • अन्य सुविधाएं: अत्याधुनिक डायग्नोस्टिक्स लैब, इमरजेंसी एवं ट्रॉमा सेंटर, और दूर-दराज से आने वाले तीमारदारों के लिए ‘सराय’ व शॉपिंग कॉम्प्लेक्स का निर्माण भी किया जा रहा है।

प्रशासनिक अमला रहा मुस्तैद

निरीक्षण के दौरान मुख्य सचिव के साथ कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत और जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने परिसर में पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया। मुख्य सचिव ने जिला प्रशासन को निर्देश दिए कि अस्पताल तक पहुंचने वाले रास्तों और बिजली-पानी की निर्बाध आपूर्ति को लेकर अभी से माइक्रो-प्लानिंग कर ली जाए, ताकि अगस्त में जब मरीज आएं तो उन्हें किसी असुविधा का सामना न करना पड़े।

कुमाऊं के लिए वरदान साबित होगा यह केंद्र

अब तक कुमाऊं के गंभीर मरीजों को बेहतर इलाज के लिए ऋषिकेश एम्स या दिल्ली के चक्कर काटने पड़ते थे, लेकिन एम्स सैटेलाइट सेंटर किच्छा के शुरू होने से यह दूरी और दर्द दोनों कम होंगे। 280 बेड के इस अस्पताल से क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास को भी नई गति मिलेगी। सरकार की सक्रियता और मुख्य सचिव की सीधी मॉनिटरिंग यह संकेत दे रही है कि उत्तराखंड स्वास्थ्य के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है।

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