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Reading: लोकसभा का विस्तार 815 सीटों तक, 33% महिला आरक्षण लागू करने की तैयारी: किसी राज्य या पुरुषों को नुकसान नहीं—मेघवाल
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लोकसभा का विस्तार 815 सीटों तक, 33% महिला आरक्षण लागू करने की तैयारी: किसी राज्य या पुरुषों को नुकसान नहीं—मेघवाल

The Hill India News
Last updated: April 16, 2026 10:00 am
The Hill India News
Published: April 16, 2026
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नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने देश की राजनीति में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव लाने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए लोकसभा की कुल सीटों को बढ़ाकर 815 करने का प्रस्ताव रखा है। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने गुरुवार को लोकसभा में यह जानकारी देते हुए कहा कि इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को उनका उचित प्रतिनिधित्व देना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस नई व्यवस्था से न तो किसी राज्य को नुकसान होगा और न ही पुरुषों के अधिकारों में कोई कमी आएगी।

लोकसभा में पेश किए गए प्रस्ताव के अनुसार, कुल 815 सीटों में से 272 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी, जो कि कुल सीटों का लगभग 33 प्रतिशत है। यह व्यवस्था नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 के तहत लागू की जाएगी। मेघवाल ने इसे एक “सरल और न्यायसंगत फार्मूला” बताया, जिससे देश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी को मजबूती मिलेगी।

मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान लोकसभा की सीटों की संख्या में लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि की जाएगी, जिससे नई जनसंख्या संरचना और लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व को बेहतर तरीके से समायोजित किया जा सके। उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि यह वृद्धि किसी भी मौजूदा सीट को घटाकर नहीं की जा रही है, बल्कि नई सीटें जोड़कर की जाएगी। इसका मतलब है कि कोई भी राज्य अपनी मौजूदा राजनीतिक शक्ति नहीं खोएगा।

इस पूरे प्रस्ताव का एक महत्वपूर्ण हिस्सा परिसीमन प्रक्रिया से जुड़ा है। सरकार परिसीमन आयोग के गठन के माध्यम से नई सीटों का निर्धारण करेगी। परिसीमन का आधार जनगणना के आंकड़े होंगे, जो 2026 के बाद उपलब्ध होंगे। इसी कारण, मंत्री ने स्पष्ट किया कि महिला आरक्षण का वास्तविक क्रियान्वयन 2029 के आम चुनावों से पहले संभव होगा।

मेघवाल ने बताया कि इस आरक्षण व्यवस्था के तहत अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग की महिलाओं को भी उनके कोटे के भीतर आरक्षण मिलेगा। इससे सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों की महिलाओं को भी राजनीतिक प्रतिनिधित्व में उचित अवसर मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि यह कदम सामाजिक न्याय और समानता की दिशा में एक बड़ा सुधार है।

इतिहास का जिक्र करते हुए मेघवाल ने बताया कि भारत उन देशों में शामिल है जहां महिलाओं को शुरू से ही मतदान का अधिकार प्राप्त था। उन्होंने तुलना करते हुए कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका में महिलाओं को पुरुषों के 144 साल बाद मतदान का अधिकार मिला, जबकि यूनाइटेड किंगडम में 1918 में सीमित और 1928 में पूर्ण मतदान अधिकार मिला। इसके विपरीत भारत में पहले आम चुनाव से ही महिलाओं को पुरुषों के समान मतदान का अधिकार प्राप्त था, जो भारतीय लोकतंत्र की प्रगतिशील सोच को दर्शाता है।

लोकसभा में इस प्रस्ताव पर करीब 40 मिनट तक तीखी बहस हुई। विपक्षी दलों ने जहां महिला आरक्षण का समर्थन किया, वहीं परिसीमन से जुड़े प्रावधानों पर अपनी आपत्तियां जताईं। कई विपक्षी नेताओं ने आशंका व्यक्त की कि परिसीमन के चलते कुछ राज्यों की राजनीतिक स्थिति प्रभावित हो सकती है, हालांकि सरकार ने इन आशंकाओं को खारिज किया है।

संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 को पेश करने के दौरान मतदान भी कराया गया, जिसमें 251 सदस्यों ने इसके पक्ष में और 185 सदस्यों ने इसके विरोध में मतदान किया। इसके साथ ही केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 और परिसीमन विधेयक, 2026 पर भी चर्चा की गई।

प्रस्तावित विधेयकों के अनुसार, लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षित सीटें अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों में बारी-बारी से आवंटित की जाएंगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी एक क्षेत्र में लगातार आरक्षण न रहे और सभी क्षेत्रों को समान अवसर मिल सके।

मेघवाल ने सभी राजनीतिक दलों और सांसदों से इस विधेयक का समर्थन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक राजनीतिक सुधार नहीं, बल्कि महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है, जो देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को और मजबूत करेगा।

कुल मिलाकर, यह प्रस्ताव भारतीय राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत देता है। यदि यह विधेयक पूरी तरह पारित होकर लागू होता है, तो देश की संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, जिससे नीति-निर्माण में महिलाओं की आवाज और अधिक प्रभावी रूप से सुनी जा सकेगी।

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