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असम, केरल और पुदुचेरी में आज थमेगा चुनाव प्रचार का शोर; 9 अप्रैल को जनता करेगी दिग्गजों के भाग्य का फैसला

नई दिल्ली/तिरुवनंतपुरम/गुवाहाटी: भारत के लोकतांत्रिक मानचित्र पर आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण है। असम, केरल और केंद्र शासित प्रदेश पुदुचेरी में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों के लिए जारी हाई-वोल्टेज प्रचार अभियान आज शाम पूरी तरह थम जाएगा। महीनों से जारी रैलियों, रोड शो और तीखी बयानबाजी के बाद अब बारी मतदाताओं की है। 9 अप्रैल को होने वाली वोटिंग के लिए प्रशासन ने कमर कस ली है, जहाँ लाखों मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर नई सरकारों की नींव रखेंगे।

9 अप्रैल: लोकतंत्र का महापर्व

निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार, 9 अप्रैल को होने वाले इस चुनावी महाकुंभ में असम की सभी 126 सीटों, केरल की 140 सीटों और पुदुचेरी की 30 सीटों पर एक ही चरण में मतदान संपन्न होगा। इस चरण की महत्ता इसी बात से समझी जा सकती है कि यह न केवल क्षेत्रीय दलों के अस्तित्व की लड़ाई है, बल्कि राष्ट्रीय दलों के लिए भी अपनी साख बचाने का बड़ा मंच है।

केरल: दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर, त्रिकोणीय मुकाबले के आसार

दक्षिण भारत के इस महत्वपूर्ण राज्य केरल में राजनीतिक पारा अपने चरम पर है। यहाँ कुल 2.71 करोड़ मतदाता (जिनमें 1.32 करोड़ पुरुष, 1.39 करोड़ महिलाएं और 273 तृतीय लिंग शामिल हैं) 890 उम्मीदवारों के भविष्य का फैसला करेंगे। केरल की राजनीति में इस बार 2.42 लाख से अधिक प्रवासी मतदाताओं की भूमिका भी निर्णायक मानी जा रही है।

केरल में विधानसभा चुनाव 2026 प्रचार अभियान के दौरान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वयं मोर्चा संभालते हुए एनडीए उम्मीदवारों के पक्ष में तूफानी रैलियां और रोड शो किए। उन्होंने एलडीएफ और यूडीएफ दोनों पर जमकर निशाना साधा। वहीं, कांग्रेस की ओर से राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने राज्य के कोने-कोने में जाकर जनता से संवाद किया और सत्ता परिवर्तन की अपील की।

दूसरी ओर, सत्तारूढ़ एलडीएफ का नेतृत्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन कर रहे हैं। वामपंथी गठबंधन अपनी लोककल्याणकारी योजनाओं के दम पर सत्ता में वापसी की उम्मीद लगाए बैठा है, जबकि कांग्रेस नीत यूडीएफ भ्रष्टाचार और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है।

असम और पुदुचेरी: सत्ता के नए समीकरण

असम में भी आज प्रचार का आखिरी दिन है। भाजपा यहाँ अपनी सत्ता बरकरार रखने के लिए ‘विकास और सुरक्षा’ का कार्ड खेल रही है, जबकि महाजोत (महागठबंधन) नागरिकता और स्थानीय पहचान के मुद्दों पर चुनावी वैतरणी पार करने की कोशिश में है। पुदुचेरी की 30 सीटों पर भी एनडीए और यूपीए के बीच सीधा मुकाबला देखा जा रहा है, जहाँ आज शाम शोर थमते ही घर-घर संपर्क का दौर शुरू हो जाएगा।

पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु: नामांकन प्रक्रिया में तेजी

एक ओर जहाँ तीन राज्यों में प्रचार थम रहा है, वहीं तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चुनावी प्रक्रिया अगले पड़ाव पर पहुँच गई है। आज तमिलनाडु की सभी 234 सीटों और पश्चिम बंगाल के पहले चरण के लिए दाखिल किए गए नामांकन पत्रों की जांच (Scrutiny) की जाएगी।

उल्लेखनीय है कि तमिलनाडु की सभी सीटों और पश्चिम बंगाल की 152 सीटों पर 23 अप्रैल को मतदान होना है। इसके बाद बंगाल में दूसरे चरण की वोटिंग 29 अप्रैल को होगी। निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि उम्मीदवार गुरुवार तक अपने नाम वापस ले सकते हैं, जिसके बाद चुनावी तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम और मतगणना की तारीख

9 अप्रैल को होने वाले मतदान के मद्देनजर चुनाव आयोग ने सुरक्षा के अभूतपूर्व प्रबंध किए हैं। संवेदनशील बूथों पर अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है। इस विधानसभा चुनाव 2026 प्रचार अभियान के समापन के साथ ही अब ‘साइलेंस पीरियड’ शुरू हो जाएगा, जिसमें किसी भी प्रकार की जनसभा या लाउडस्पीकर के प्रयोग पर पाबंदी रहेगी।

सभी की निगाहें अब 4 मई पर टिकी हैं, जब इन चारों राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के नतीजों की घोषणा होगी। क्या केरल में वामपंथ का किला सुरक्षित रहेगा? क्या असम में भाजपा दोबारा लौटेगी? या कांग्रेस दक्षिण से अपनी वापसी का बिगुल फूंकेगी? इन सभी सवालों के जवाब ईवीएम में 9 अप्रैल को कैद हो जाएंगे।

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