
देहरादून। उत्तराखंड के पर्वतीय अंचलों में एक बार फिर कुदरत का मिजाज बदलने वाला है। राज्य मौसम विज्ञान केंद्र द्वारा जारी ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, आगामी 8 मार्च से प्रदेश के मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। जहां एक ओर मैदानी इलाकों में सूरज की तपिश बढ़ने लगी है, वहीं उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता के चलते बारिश और बर्फबारी की संभावना जताई गई है।
8 मार्च से शुरू होगा बदलाव का सिलसिला
मौसम विभाग के बुलेटिन के अनुसार, आज और कल यानी अगले 48 घंटों तक पूरे प्रदेश में मौसम शुष्क बना रहेगा। हालांकि, रविवार 8 मार्च से उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ जैसे सीमांत जिलों में बादलों का डेरा डलना शुरू हो जाएगा।
प्रमुख जिलों में ‘येलो अलर्ट’
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8 मार्च: उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश और गर्जना के साथ बिजली चमकने की संभावना है। 4000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले स्थानों पर हिमपात (Snowfall) देखने को मिल सकता है।
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9 से 11 मार्च: सोमवार से बारिश का दायरा बढ़ेगा। इसमें रुद्रप्रयाग और बागेश्वर जिले भी शामिल हो जाएंगे। इन दिनों 3800 मीटर और उससे अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मध्यम बर्फबारी का अनुमान है।
तपते मैदान और ठिठुरते पहाड़: तापमान का विरोधाभास
उत्तराखंड इस समय दोहरी मौसमी मार झेल रहा है। एक तरफ मैदानी इलाकों में तापमान सामान्य से कहीं अधिक दर्ज किया जा रहा है, जिससे गर्मी का अहसास समय से पहले होने लगा है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले 2-3 दिनों में अधिकतम तापमान में 1 से 2 डिग्री सेल्सियस की और वृद्धि होने की संभावना है।
दूसरी ओर, उच्च हिमालयी क्षेत्रों और चारधाम सर्किट में हाड़ कंपाने वाली ठंड का प्रकोप जारी है। केदारनाथ और बदरीनाथ जैसे धामों में अधिकतम तापमान बमुश्किल फ्रीजिंग पॉइंट (Freezing Point) के ऊपर बना हुआ है।
चारधाम यात्रा 2026: बर्फ की आगोश में देवभूमि के धाम
अप्रैल माह से शुरू होने वाली विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा के लिए तैयारियां जोरों पर हैं, लेकिन मौसम की बेरुखी चुनौतियों को बढ़ा सकती है। चारों धामों में वर्तमान में न्यूनतम तापमान शून्य से कई डिग्री नीचे (-10°C तक) बना हुआ है।
धामों की वर्तमान स्थिति पर एक नज़र:
| धाम का नाम | अधिकतम तापमान | न्यूनतम तापमान | भौगोलिक प्रभाव |
| गंगोत्री | -1°C | -10°C | अत्यधिक बर्फबारी और शीत लहर |
| यमुनोत्री | 6°C | -3°C | ठंडी हवाओं का प्रभाव |
| केदारनाथ | 1°C | -8°C | मंदाकिनी नदी की निकटता से बढ़ती ठंड |
| बदरीनाथ | 1°C | -7°C | अलकनंदा और सतोपंथ की सर्द हवाएं |
केदारनाथ और बदरीनाथ का हाल: केदारनाथ धाम में मंदाकिनी नदी और बदरीनाथ में अलकनंदा नदी के किनारे होने के कारण वहां की ठंड और भी घातक हो जाती है। ग्लेशियरों से पिघलकर आने वाला पानी इन क्षेत्रों में नमी और गलन को बढ़ा देता है, जिससे यात्रा की तैयारियों में जुटे प्रशासन को खासी मशक्कत करनी पड़ रही है।
विशेषज्ञों की राय और सावधानियां
मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि मार्च के दूसरे सप्ताह में होने वाली यह बारिश और बर्फबारी कृषि के लिहाज से कुछ हद तक फायदेमंद हो सकती है, लेकिन ऊंची चोटियों पर ट्रेकिंग और यात्रा करने वालों के लिए जोखिम बढ़ सकता है।
“अगले चार दिनों तक 3800 मीटर से ऊंचे क्षेत्रों में जाने वाले पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को सतर्क रहने की आवश्यकता है। विशेषकर बिजली चमकने और अचानक तापमान गिरने की स्थिति में सुरक्षित स्थानों पर शरण लें।” – मौसम विभाग, उत्तराखंड
उत्तराखंड में 8 से 11 मार्च तक का समय मौसम के लिहाज से संवेदनशील रहने वाला है। एक तरफ जहां चारधाम यात्रा के मार्गों से बर्फ हटाने का काम चुनौतीपूर्ण होगा, वहीं बारिश के चलते भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में भी सतर्कता बरतनी होगी। यदि आप इस दौरान उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों की यात्रा का प्लान बना रहे हैं, तो मौसम की ताजा अपडेट लेकर ही घर से निकलें।



