
श्रीनगर (गढ़वाल), 23 अप्रैल 2026। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय ने शैक्षिक क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए विश्वविद्यालय में मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा केन्द्र (Open and Distance Learning Centre) की स्थापना की अधिसूचना जारी कर दी है। यह निर्णय विश्वविद्यालय की शैक्षणिक पहुँच को व्यापक बनाने और उन विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लिया गया है, जो किसी कारणवश नियमित कक्षाओं में शामिल नहीं हो पाते हैं।
विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इस केन्द्र की स्थापना का प्रस्ताव सबसे पहले विश्वविद्यालय की 24वीं विद्यापरिषद् (Academic Council) की बैठक में रखा गया था। विस्तृत विचार-विमर्श के बाद विद्यापरिषद् ने इस प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान करते हुए इसे आगे की प्रक्रिया के लिए कार्यपरिषद् (Executive Council) को भेजा था। इसके पश्चात विश्वविद्यालय की 32वीं कार्यपरिषद् बैठक में इस प्रस्ताव को औपचारिक रूप से अनुमोदन प्रदान कर दिया गया।
इस अनुमोदन के बाद कुलसचिव प्रोफेसर वाई.पी. रैवानी ने आधिकारिक अधिसूचना जारी करते हुए बताया कि यह मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा केन्द्र विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा जारी मुक्त एवं दूरस्थ ज्ञान अर्जन कार्यक्रम एवं ऑनलाइन कार्यक्रम विनियम 2020 के पूर्ण प्रावधानों के अनुरूप स्थापित किया गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केन्द्र का संचालन यूजीसी द्वारा निर्धारित सभी दिशा-निर्देशों, मानकों और गुणवत्ता मानकों के अनुरूप ही किया जाएगा, जिससे छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जा सके।
इस नए केन्द्र के माध्यम से विश्वविद्यालय का लक्ष्य ग्रामीण, दूरस्थ और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों तक उच्च शिक्षा की पहुँच सुनिश्चित करना है। साथ ही ऐसे विद्यार्थी जो नौकरी या अन्य कारणों से नियमित शिक्षा प्राप्त करने में असमर्थ हैं, उन्हें भी अब स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर की पढ़ाई का अवसर मिल सकेगा। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की भावना के अनुरूप भी मानी जा रही है, जिसमें शिक्षा को अधिक समावेशी, लचीला और सुलभ बनाने पर जोर दिया गया है।
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा केन्द्र के अंतर्गत विभिन्न पाठ्यक्रमों की शुरुआत की जाएगी, जिनमें कला, विज्ञान, वाणिज्य और सामाजिक विज्ञान सहित कई अन्य विषय शामिल हो सकते हैं। इसके साथ ही आने वाले समय में व्यावसायिक और कौशल आधारित पाठ्यक्रम भी शुरू किए जाने की संभावना है, जिससे छात्रों को रोजगारपरक शिक्षा का लाभ मिल सके।
कुलसचिव प्रो. रैवानी ने यह भी बताया कि केन्द्र के संचालन में डिजिटल तकनीक और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का विशेष रूप से उपयोग किया जाएगा, जिससे छात्रों को अध्ययन सामग्री, लेक्चर और मूल्यांकन प्रणाली में अधिक सुविधा मिल सके। इसके तहत ई-लर्निंग, वीडियो लेक्चर, ऑनलाइन असाइनमेंट और डिजिटल परीक्षा प्रणाली जैसी सुविधाएँ विकसित की जाएंगी।
विश्वविद्यालय के इस निर्णय का शैक्षिक जगत में स्वागत किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा केन्द्र की स्थापना से न केवल विश्वविद्यालय की पहुँच बढ़ेगी, बल्कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में शिक्षा के क्षेत्र में नई संभावनाएँ भी विकसित होंगी।
कुल मिलाकर, हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय का यह कदम उच्च शिक्षा को अधिक समावेशी और आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है, जो आने वाले वर्षों में हजारों विद्यार्थियों के लिए लाभकारी सिद्ध हो सकता है।



