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उत्तराखंडफीचर्ड

एम्स ऋषिकेश के दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति का संबोधन: टेलीमेडिसिन की सराहना, छात्रों को बांटी डिग्रियां

The Hill India News
Last updated: April 23, 2026 9:59 am
The Hill India News
Published: April 23, 2026
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ऋषिकेश: देश के उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने उत्तराखंड के प्रमुख स्वास्थ्य संस्थान अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश (एम्स ऋषिकेश) के छठे दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया और पासआउट छात्रों को डिग्रियां प्रदान कीं। इस अवसर पर उन्होंने संस्थान की टेलीमेडिसिन पहल की विशेष रूप से सराहना करते हुए कहा कि आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं को केवल अस्पतालों तक सीमित नहीं रखा जा सकता, बल्कि इन्हें देश के दूरदराज और वंचित क्षेत्रों तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है।

Contents
टेलीमेडिसिन पर विशेष जोरछात्रों को दीक्षांत की शुभकामनाएंकड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच कार्यक्रमराज्यपाल और मुख्यमंत्री ने किया स्वागतपिछले वर्ष राष्ट्रपति का दौरा भी रहा खासस्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में नई दिशा

उपराष्ट्रपति का यह दौरा कई मायनों में महत्वपूर्ण रहा, जहां एक ओर उन्होंने चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में युवाओं को प्रोत्साहित किया, वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण और विस्तार पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि टेलीमेडिसिन जैसी पहलें भारत जैसे विशाल देश में स्वास्थ्य असमानताओं को कम करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।

टेलीमेडिसिन पर विशेष जोर

अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति ने कहा कि डिजिटल तकनीक के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ बनाना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है। उन्होंने एम्स ऋषिकेश द्वारा शुरू की गई टेलीमेडिसिन सेवाओं को “एक सराहनीय और दूरदर्शी पहल” बताया। उनका मानना है कि इससे उन लोगों को भी बेहतर इलाज मिल सकेगा जो भौगोलिक या आर्थिक कारणों से बड़े अस्पतालों तक नहीं पहुंच पाते।

उन्होंने आगे कहा कि डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों को केवल क्लिनिकल ज्ञान तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें तकनीकी नवाचारों को भी अपनाना होगा ताकि वे बेहतर और अधिक प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर सकें।

छात्रों को दीक्षांत की शुभकामनाएं

दीक्षांत समारोह के दौरान उपराष्ट्रपति ने सैकड़ों छात्रों को डिग्रियां प्रदान कीं और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि चिकित्सा पेशा केवल एक करियर नहीं, बल्कि सेवा का माध्यम है। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग समाज के सबसे कमजोर वर्गों की सेवा में करें।

इस अवसर पर छात्रों और उनके परिवारों में खासा उत्साह देखने को मिला। समारोह में पारंपरिक और आधुनिकता का सुंदर संगम देखने को मिला, जहां एक ओर अकादमिक उपलब्धियों का सम्मान हुआ, वहीं दूसरी ओर भारतीय संस्कृति की झलक भी दिखाई दी।

कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच कार्यक्रम

उपराष्ट्रपति के दौरे को लेकर प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए थे। पूरे क्षेत्र को तीन विशेष सुरक्षा जोन में विभाजित किया गया था ताकि कार्यक्रम सुचारू रूप से संपन्न हो सके।

पहला सुरक्षा जोन जॉलीग्रांट एयरपोर्ट पर बनाया गया, जहां उपराष्ट्रपति का विमान उतरा। दूसरा जोन एम्स के हेलीपैड क्षेत्र में और तीसरा मुख्य कार्यक्रम स्थल पर स्थापित किया गया। इन तीनों जोनों की जिम्मेदारी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को सौंपी गई थी।

सभी सुरक्षा कर्मियों को कार्यक्रम से कई घंटे पहले ही अपनी ड्यूटी पर तैनात होने के निर्देश दिए गए थे। पुलिस और प्रशासन ने मिलकर यह सुनिश्चित किया कि कार्यक्रम के दौरान किसी भी प्रकार की सुरक्षा चूक न हो।

राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने किया स्वागत

उपराष्ट्रपति के उत्तराखंड पहुंचने पर उनका भव्य स्वागत किया गया। गुरमीत सिंह और पुष्कर सिंह धामी ने जॉलीग्रांट एयरपोर्ट पर उनका स्वागत किया। इस दौरान उपराष्ट्रपति पारंपरिक उत्तराखंडी टोपी पहने हुए नजर आए, जिसने स्थानीय संस्कृति के प्रति उनके सम्मान को दर्शाया।

राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी और एम्स के प्रशासनिक अधिकारी भी इस मौके पर मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान कई गणमान्य अतिथियों ने भी शिरकत की।

पिछले वर्ष राष्ट्रपति का दौरा भी रहा खास

गौरतलब है कि इससे पहले नवंबर में देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भी उत्तराखंड दौरे पर आई थीं। उन्होंने कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में हिस्सा लिया था, जिनमें पतंजलि विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह भी शामिल था। इसके अलावा उन्होंने उत्तराखंड विधानसभा के विशेष सत्र में भी भाग लिया और संबोधन दिया।

राष्ट्रपति ने उस दौरान नैनीताल राजभवन के 125 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में भी शिरकत की थी। यह दौरा राज्य के लिए गौरव का विषय रहा था और इससे उत्तराखंड की राष्ट्रीय स्तर पर पहचान को और मजबूती मिली।

स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में नई दिशा

एम्स ऋषिकेश का यह दीक्षांत समारोह न केवल छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि का क्षण था, बल्कि यह देश के स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र के लिए भी एक प्रेरणादायक अवसर साबित हुआ। उपराष्ट्रपति के संबोधन ने यह स्पष्ट किया कि भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार तकनीक के साथ मिलकर ही संभव है।

टेलीमेडिसिन, डिजिटल हेल्थ और ग्रामीण क्षेत्रों तक चिकित्सा सुविधाओं की पहुंच जैसे विषय आने वाले समय में भारत के स्वास्थ्य तंत्र को नई दिशा देंगे। ऐसे में एम्स ऋषिकेश जैसे संस्थानों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

समारोह का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ और सभी उपस्थित लोगों ने इस ऐतिहासिक अवसर को यादगार बनाया।

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