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उत्तराखंड: महिला आरक्षण बिल पर सियासी संग्राम तेज, देहरादून में कांग्रेस का जोरदार धरना

देहरादून: महिला आरक्षण बिल को लेकर देशभर में राजनीतिक बहस तेज होती जा रही है और इसी कड़ी में उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में कांग्रेस ने भाजपा सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। विधानसभा भवन के बाहर आयोजित इस धरने में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया और केंद्र व राज्य सरकार पर महिलाओं को उनका अधिकार देने में देरी करने का आरोप लगाया।

इस प्रदर्शन का नेतृत्व उत्तराखंड कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने किया। उनके साथ पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हरक सिंह रावत, चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह और विधायक ममता राकेश सहित कई प्रमुख नेता मौजूद रहे।

धरने को संबोधित करते हुए हरीश रावत ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 में संसद के दोनों सदनों—लोकसभा और राज्यसभा—से महिला आरक्षण बिल पारित हो चुका है, लेकिन सरकार ने अब तक इसे लागू नहीं किया है। रावत ने आरोप लगाया कि भाजपा शुरू से ही महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के पक्ष में नहीं रही और केवल जनदबाव के कारण ही यह बिल पारित किया गया।

उन्होंने आगे कहा कि जब जनता का दबाव दोबारा बढ़ा, तब सरकार ने इस बिल को परिसीमन (delimitation) के मुद्दे से जोड़ दिया, जिससे इसकी प्रक्रिया और जटिल हो गई। रावत के अनुसार, यह सरकार की एक सोची-समझी रणनीति थी ताकि बिल के क्रियान्वयन को टाला जा सके। उन्होंने इसे “सुनियोजित षड्यंत्र” बताते हुए कहा कि अगर महिला आरक्षण लागू नहीं हो पा रहा है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी भाजपा सरकार की है।

वहीं, गणेश गोदियाल ने भी सरकार को घेरते हुए कहा कि यह प्रदर्शन भाजपा के “झूठ का पर्दाफाश” करने के लिए किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार द्वारा विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया जाना भी केवल राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित है। उनके मुताबिक, यह सत्र कांग्रेस को निशाना बनाने और जनता का ध्यान असली मुद्दों से भटकाने के लिए बुलाया गया है।

गोदियाल ने कहा कि कांग्रेस हमेशा से महिला आरक्षण की समर्थक रही है और उसने अपने शासनकाल में पंचायतों और निकायों में महिलाओं को आरक्षण का लाभ दिलाया। उन्होंने यह भी कहा कि 2023 में संसद में महिला आरक्षण बिल पारित होने में कांग्रेस ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, लेकिन भाजपा अब इस मुद्दे पर भ्रम फैलाकर राजनीतिक लाभ लेना चाहती है।

धरने के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए सरकार से जल्द से जल्द महिला आरक्षण लागू करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व में बराबरी का हक मिलना चाहिए और इसमें किसी भी तरह की देरी लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महिला आरक्षण का मुद्दा आने वाले चुनावों में एक बड़ा चुनावी मुद्दा बन सकता है। एक ओर जहां कांग्रेस इसे महिला सशक्तिकरण से जोड़कर सरकार पर दबाव बना रही है, वहीं भाजपा भी अपने स्तर पर इस बिल को लेकर अपनी रणनीति स्पष्ट करने की कोशिश में है।

फिलहाल, उत्तराखंड में महिला आरक्षण को लेकर सियासी घमासान जारी है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीति और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। जनता की नजर अब इस बात पर टिकी है कि सरकार इस दिशा में क्या ठोस कदम उठाती है और महिलाओं को उनका बहुप्रतीक्षित अधिकार कब तक मिल पाता है।

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