
रुड़की/देहरादून | विशेष संवाददाता उत्तराखंड के नौनिहालों और धात्री महिलाओं के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वाले सफेदपोश कारोबारियों के खिलाफ देहरादून जिलाधिकारी (DM) सविन बंसल ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। गुरुवार को डीएम सविन बंसल ने अपनी टीम के साथ रुड़की स्थित ‘सेंट्रल गोदाम’ पर औचक छापेमारी की, जहां से पूरे प्रदेश के आंगनबाड़ी केंद्रों को राशन और पोषक आहार की आपूर्ति की जाती है। इस कार्रवाई ने विभाग में हड़कंप मचा दिया है।
छापेमारी की बड़ी बातें: एक्सपायरी डेट का ‘खेल’ और संदिग्ध गुणवत्ता
जिलाधिकारी को लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं कि आंगनबाड़ी केंद्रों पर भेजी जाने वाली सामग्री की गुणवत्ता बेहद खराब है। जब डीएम सविन बंसल रुड़की के माडी चौक स्थित गोदाम पहुंचे, तो वहां का नजारा देख अधिकारी भी दंग रह गए।
निरीक्षण के दौरान पाया गया कि खजूर और केले के चिप्स के पैकेटों पर मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी तिथि पूरी तरह संदिग्ध थी। पैकेट पर स्थायी प्रिंटिंग के बजाय हाथ से ‘स्टैंप’ लगाकर तारीखें बदली गई थीं। यह सीधे तौर पर मासूम बच्चों के जीवन को खतरे में डालने जैसा गंभीर अपराध है।
दिसंबर के अंडे मार्च में बांटने की तैयारी!
जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि जो अंडे दिसंबर और जनवरी के महीने के थे, उन्हें मार्च के महीने में वितरित करने के लिए लोड किया जा रहा था। गोदाम के भीतर तापमान (Temperature) नियंत्रण की कोई व्यवस्था नहीं थी, जिसके कारण अंडों और अन्य खाद्य सामग्रियों की गुणवत्ता पूरी तरह से संदिग्ध पाई गई।
ऑन-द-स्पॉट एक्शन: गाड़ियां रुकवाकर कराई सैंपलिंग
डीएम सविन बंसल केवल निरीक्षण तक ही सीमित नहीं रहे। उन्होंने मौके से टिहरी, उत्तरकाशी और डोईवाला के लिए रवाना हो रहे राशन के वाहनों को बीच रास्ते में रुकवा दिया। डीएम ने खुद खड़े होकर इन सामग्रियों की सैंपलिंग करवाई और उन्हें लैब भेजने के निर्देश दिए।
“हम बच्चों और गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य के साथ रत्ती भर भी समझौता नहीं करेंगे। जो सामग्री मानकों के अनुरूप नहीं है, उसे तुरंत सीज किया जाए और जिम्मेदार लोगों पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो।” – सविन बंसल, डीएम देहरादून
गोदाम में मिले ‘बाल श्रमिक’, दर्ज होगा मुकदमा
निरीक्षण के दौरान डीएम बंसल ने एक और काला सच पकड़ा। गोदाम के भीतर छोटे बच्चों से मजदूरी कराई जा रही थी। बाल श्रम कानून के उल्लंघन को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने गोदाम स्वामी के विरुद्ध तत्काल मुकदमा दर्ज करने के कड़े निर्देश दिए हैं।
गोदाम की अव्यवस्थाओं की लंबी फेहरिस्त:
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दस्तावेजों का अभाव: मौके पर कोई भी रजिस्टर अपडेट (अद्यतन) नहीं मिला।
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क्वालिटी सर्टिफिकेट गायब: सामग्री की गुणवत्ता प्रमाणित करने वाले सर्टिफिकेट्स आपूर्ति कर्ता द्वारा उपलब्ध नहीं कराए गए थे।
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मानकों की धज्जियां: पूरे गोदाम का संचालन किसी भी सरकारी या सुरक्षा मानक के अनुरूप नहीं पाया गया।
कुमाऊं और गढ़वाल तक फैला है आपूर्ति का जाल
यह गोदाम केवल एक जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां से पूरे गढ़वाल और कुमाऊं मंडल के आंगनबाड़ी केंद्रों को अंडा, दालें और अन्य पोषक तत्व भेजे जाते हैं। छापेमारी के दौरान मिली गड़बड़ियों से संकेत मिल रहे हैं कि यह एक बड़े सिंडिकेट का हिस्सा हो सकता है जो सरकार के “पोषण अभियान” को पलीता लगा रहा है।

मौके पर मौजूद रही अधिकारियों की भारी फौज
इस बड़ी कार्रवाई के दौरान जिलाधिकारी के साथ प्रशासनिक अमला भी मुस्तैद रहा। मौके पर उप जिलाधिकारी सदर हरी गिरी, जिला कार्यक्रम अधिकारी (बाल विकास) जितेंद्र कुमार, तहसीलदार सुरेंद्र देव, और कानूनगो संजय कुमार समेत कई पुलिस बल और राजस्व विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।
अगला कदम: विभाग में बड़ी सफाई की तैयारी
डीएम सविन बंसल की इस कार्रवाई ने उन अधिकारियों की नींद उड़ा दी है जो इस आपूर्ति श्रृंखला की निगरानी के लिए जिम्मेदार थे। सूत्रों की मानें तो जल्द ही बाल विकास विभाग के कुछ बड़े अधिकारियों पर भी गाज गिर सकती है। डीएम ने स्पष्ट किया है कि जब तक सैंपलिंग की रिपोर्ट नहीं आती, तब तक संदिग्ध बैच की आपूर्ति पर रोक रहेगी।
सविन बंसल का यह एक्शन प्रशासन की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है जहां जनता के स्वास्थ्य और सरकारी धन के सही उपयोग को प्राथमिकता दी जाती है। रुड़की सेंट्रल गोदाम पर हुई यह छापेमारी राज्य के अन्य आपूर्तिकर्ताओं के लिए एक कड़ा संदेश है।



