चेन्नई: दक्षिण भारत के सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक रणक्षेत्र, तमिलनाडु में विधानसभा चुनावों की बिसात बिछ चुकी है। जैसे-जैसे मतदान की तारीखें करीब आ रही हैं, राज्य के सत्ताधारी गठबंधन में दरारें चौड़ी होती दिख रही हैं। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन (M.K. Stalin) और कांग्रेस के कद्दावर नेता पी. चिदंबरम (P. Chidambaram) के बीच हुई हालिया मुलाकात ने राज्य की सियासत में उबाल ला दिया है। करीब एक घंटे तक चली इस हाई-प्रोफाइल मीटिंग में सीटों के बंटवारे (Seat Sharing) पर गहन मंथन हुआ, लेकिन सूत्रों का कहना है कि पेच अभी भी फंसा हुआ है।
चिदंबरम की ‘एंट्री’ और बदली हुई रणनीति
अब तक तमिलनाडु में कांग्रेस की ओर से एआईसीसी (AICC) प्रभारी गिरीश चोडांकर सीट शेयरिंग कमेटी के प्रमुख के तौर पर DMK से बातचीत कर रहे थे। हालांकि, सूत्रों के मुताबिक, चोडांकर के सख्त रुख और बातचीत के लहजे पर मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई थी। गठबंधन में बढ़ती कड़वाहट को देखते हुए कांग्रेस हाईकमान ने अपनी रणनीति बदली और अनुभवी संकटमोचक पी. चिदंबरम को मोर्चे पर तैनात किया।
सोमवार को चेन्नई स्थित स्टालिन के आवास पर हुई इस मुलाकात को बेहद गोपनीय रखा गया। बैठक के बाद चिदंबरम बिना मीडिया से बात किए रवाना हो गए, जो इस बात का संकेत है कि गठबंधन के भीतर सबकुछ सामान्य नहीं है।
सीटों का गणित: 41 से 25 पर आई बात
कांग्रेस और DMK के बीच विवाद की मुख्य जड़ सीटों की संख्या है। पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 25 सीटों पर चुनाव लड़ा था। इस बार कांग्रेस की महत्वाकांक्षाएं बढ़ी हुई हैं:
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शुरुआती मांग: कांग्रेस ने शुरुआत में 41 सीटों की मांग रखी थी और सरकार में ‘सत्ता की साझेदारी’ (Cabinet Berth) का मुद्दा भी उठाया था।
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ताजा रुख: भारी दबाव के बाद कांग्रेस अब 36 सीटों तक नीचे आई है।
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DMK का स्टैंड: मुख्यमंत्री स्टालिन की पार्टी DMK का रुख बेहद कड़ा है। पार्टी नेतृत्व का कहना है कि वे पिछली बार दी गई 25 सीटों से एक भी सीट ज्यादा देने की स्थिति में नहीं हैं।
DMK का ‘अल्टीमेटम’: साथ रहें या रास्ता चुनें
मंगलवार की बैठक के बाद छनकर आई खबरों के मुताबिक, DMK ने कांग्रेस के सामने अपना ‘फाइनल ऑफर’ रख दिया है। सूत्रों का कहना है कि स्टालिन ने कांग्रेस को 29 विधानसभा सीटें और 2 राज्यसभा सीटें देने का प्रस्ताव दिया है।
इससे पहले सोमवार को DMK की ओर से कांग्रेस को दो टूक शब्दों में कह दिया गया था कि यदि उन्हें 25-29 सीटों का फॉर्मूला मंजूर नहीं है, तो वे गठबंधन से बाहर जाने और अकेले या अन्य साथियों के साथ चुनाव लड़ने के लिए स्वतंत्र हैं। यह अल्टीमेटम कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि तमिलनाडु में कांग्रेस का अपना कोई मजबूत कैडर आधार नहीं बचा है और वह पूरी तरह DMK के कंधों पर सवार है।
क्यों कड़ा है स्टालिन का रुख?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एमके स्टालिन इस बार किसी भी कीमत पर अपनी पार्टी की सीटों की संख्या कम नहीं करना चाहते। DMK को डर है कि अगर वह कांग्रेस को ज्यादा सीटें देती है और कांग्रेस का स्ट्राइक रेट खराब रहता है, तो इसका सीधा फायदा विपक्षी AIADMK और बीजेपी गठबंधन को मिल सकता है।
इसके अलावा, स्थानीय निकाय चुनावों में DMK के शानदार प्रदर्शन ने स्टालिन के आत्मविश्वास को बढ़ाया है। उन्हें लगता है कि राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं (जैसे महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा और मासिक सहायता) के दम पर वे अपने दम पर बहुमत के करीब पहुंच सकते हैं।
आगे की राह: दिल्ली में होगा अंतिम फैसला
पी. चिदंबरम अब चेन्नई की रिपोर्ट लेकर दिल्ली रवाना होंगे, जहां मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी के साथ इस पर चर्चा की जाएगी। कांग्रेस के सामने अब दो ही रास्ते बचे हैं:
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समझौता: DMK के 29 सीटों वाले ऑफर को स्वीकार कर गठबंधन को बचाए रखना।
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जोखिम: ज्यादा सीटों की जिद पर अड़कर अकेले चुनाव लड़ना, जो कांग्रेस के लिए आत्मघाती साबित हो सकता है।
तमिलनाडु की जनता और राजनीतिक पंडितों की निगाहें अब दिल्ली से आने वाले फैसले पर टिकी हैं। क्या पी. चिदंबरम अपनी कूटनीति से इस डूबते गठबंधन को बचा पाएंगे, या दक्षिण के इस किले में ‘इंडिया’ गठबंधन बिखर जाएगा? यह आने वाले कुछ दिनों में साफ हो जाएगा।



