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भारत-कनाडा संबंधों में नए युग का सूत्रपात: पीएम मोदी और मार्क कार्नी के बीच 50 बिलियन डॉलर के व्यापारिक लक्ष्य पर सहमति

The Hill India News
Last updated: March 2, 2026 9:47 am
The Hill India News
Published: March 2, 2026
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नई दिल्ली: भारत और कनाडा के बीच कूटनीतिक संबंधों में एक नए और ऊर्जावान अध्याय की शुरुआत हो गई है। कनाडा के नवनियुक्त प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की चार दिवसीय भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने न केवल पुराने गतिरोधों को पीछे छोड़ा, बल्कि भविष्य की रणनीतिक साझेदारी के लिए एक ठोस रोडमैप भी तैयार किया। सोमवार को नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में हुई द्विपक्षीय बैठक के बाद आयोजित साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट किया कि दोनों देशों के बीच संबंधों में अब “परस्पर विश्वास और सकारात्मकता” की नई लहर है।

Contents
लोकतांत्रिक मूल्यों और मानवता के साझा विजन पर जोरआर्थिक महाशक्ति बनने का लक्ष्य: 2030 तक $50 बिलियन का व्यापारभविष्य की तकनीकें: AI, क्वांटम और सेमीकंडक्टर्स पर दांवऊर्जा सुरक्षा और ‘ग्रीन ट्रांजिशन’क्रिटिकल मिनरल्स और सप्लाई चेन पर ऐतिहासिक MoUCEPA और पल्स प्रोटीन पर महत्वपूर्ण प्रगतिएक नई रणनीतिक दिशा

लोकतांत्रिक मूल्यों और मानवता के साझा विजन पर जोर

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत दोनों देशों के साझा लोकतांत्रिक मूल्यों से की। उन्होंने कहा, “कनाडा के पीएम मार्क कार्नी के साथ हमारी पहली ही बैठक में संबंधों में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ है। भारत और कनाडा दोनों ही लोकतंत्र और कानून के शासन में अटूट विश्वास रखते हैं। मानवता की भलाई हमारा साझा विजन है, और अब समय आ गया है कि हम इस विजन को एक ‘नेक्स्ट लेवल पार्टनरशिप’ में ट्रांसफॉर्म करें।”

आर्थिक महाशक्ति बनने का लक्ष्य: 2030 तक $50 बिलियन का व्यापार

इस शिखर सम्मेलन का सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक पहलू व्यापारिक लक्ष्यों को लेकर रहा। पीएम मोदी ने घोषणा की कि भारत और कनाडा का लक्ष्य वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 50 बिलियन डॉलर तक पहुँचाना है।

  • निवेश की मजबूती: वर्तमान में कनाडा के पेंशन फंड्स ने भारत के विभिन्न क्षेत्रों में लगभग 100 बिलियन डॉलर का निवेश किया है।

  • पोटेंशियल अनलॉक करना: पीएम मोदी ने जोर दिया कि दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग की असीम संभावनाएं हैं, जिन्हें पूरी तरह से ‘अनलॉक’ करना सरकार की प्राथमिकता है। इससे न केवल दोनों देशों की जीडीपी को मजबूती मिलेगी, बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

भविष्य की तकनीकें: AI, क्वांटम और सेमीकंडक्टर्स पर दांव

तकनीकी मोर्चे पर भारत और कनाडा ने एक दूरदर्शी कदम उठाया है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि दोनों देश भविष्य की उन तकनीकों पर निवेश करेंगे जो आने वाली सदी को परिभाषित करेंगी।

  1. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सुपरकंप्यूटिंग: दोनों देश AI के नैतिक और औद्योगिक उपयोग के लिए डेटा शेयरिंग और रिसर्च में सहयोग करेंगे।

  2. क्वांटम कंप्यूटिंग: साइबर सुरक्षा और डेटा प्रोसेसिंग के क्षेत्र में क्वांटम तकनीक पर संयुक्त शोध किया जाएगा।

  3. सेमीकंडक्टर्स: भारत के उभरते सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम में कनाडा की तकनीकी विशेषज्ञता एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

  4. अंतरिक्ष क्षेत्र: दोनों देशों के स्पेस स्टार्टअप्स और निजी उद्योगों को एक मंच पर लाने की योजना है, जिससे ‘न्यू स्पेस एज’ में दोनों की भागीदारी बढ़े।

ऊर्जा सुरक्षा और ‘ग्रीन ट्रांजिशन’

जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में भी बड़े ऐलान हुए। ऊर्जा सहयोग को एक नए स्तर पर ले जाने के लिए हाइड्रोकार्बन्स, रिन्यूएबल एनर्जी (नवीकरणीय ऊर्जा), ग्रीन हाइड्रोजन और एनर्जी स्टोरेज पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

इस दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, इसी वर्ष ‘भारत-कनाडा रिन्यूएबल एनर्जी और स्टोरेज समिट’ का आयोजन किया जाएगा। पीएम मोदी ने कनाडा के ‘अंतरराष्ट्रीय सोलर अलायंस’ (ISA) और ‘ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस’ में शामिल होने के निर्णय की सराहना करते हुए इसे वैश्विक स्थिरता के लिए एक बड़ा कदम बताया।

क्रिटिकल मिनरल्स और सप्लाई चेन पर ऐतिहासिक MoU

आर्थिक और सामरिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, दोनों देशों ने क्रिटिकल मिनरल्स (महत्वपूर्ण खनिजों) पर एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। लिथियम, कोबाल्ट और निकल जैसे खनिज भविष्य की क्लीन एनर्जी और इलेक्ट्रॉनिक इंडस्ट्री के लिए अनिवार्य हैं। कनाडा इन खनिजों का धनी है, जबकि भारत को अपनी मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों के लिए इनकी निरंतर आपूर्ति की आवश्यकता है। यह समझौता वैश्विक सप्लाई चेन की मजबूती के लिए मील का पत्थर साबित होगा।

CEPA और पल्स प्रोटीन पर महत्वपूर्ण प्रगति

वाणिज्यिक संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने के लिए, कनाडा के अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धू और भारत के केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने Comprehensive Economic Partnership Agreement (CEPA) के लिए ‘टर्म्स ऑफ रेफरेंस’ के दस्तावेजों का आदान-प्रदान किया। साथ ही, ‘जॉइंट पल्स प्रोटीन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ पर भी सहमति बनी, जो खाद्य सुरक्षा और कृषि निर्यात के क्षेत्र में दोनों देशों को लाभान्वित करेगा।

एक नई रणनीतिक दिशा

प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की यह यात्रा दर्शाती है कि भारत और कनाडा अब एक-दूसरे की पूरकता को समझ रहे हैं। जहाँ कनाडा को भारत के विशाल बाजार और युवा वर्कफोर्स की जरूरत है, वहीं भारत को कनाडा की उच्च तकनीक, निवेश और संसाधनों की आवश्यकता है।

पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि वह अपनी संप्रभुता और सुरक्षा चिंताओं के साथ-साथ आर्थिक विकास के लिए वैश्विक साझेदारियों को नया रूप देने के लिए तैयार है।


भारत-कनाडा के बीच हुई यह वार्ता केवल व्यापारिक समझौता नहीं है, बल्कि यह दो बड़े लोकतंत्रों के बीच आपसी सम्मान और साझा भविष्य की नींव है। अगर दोनों देश 2030 तक $50 बिलियन के लक्ष्य को हासिल करने में सफल रहते हैं, तो यह वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक नया पावर-सेंटर साबित होगा।

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