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अल्मोड़ा पुलिस की त्वरित कार्रवाई: गुड़गांव से नाबालिग किशोरी सकुशल बरामद, बिहार का आरोपी पुलिस की गिरफ्त में

अल्मोड़ा। उत्तराखंड के अल्मोड़ा जनपद में पुलिस ने महिला और बाल सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। राजस्व पुलिस क्षेत्र से लापता हुई एक नाबालिग किशोरी को पुलिस ने 1000 किलोमीटर से अधिक की दूरी और तीन राज्यों में सघन तलाशी अभियान चलाने के बाद हरियाणा के गुड़गांव (गुरुग्राम) से सकुशल बरामद कर लिया है। इस मामले में पुलिस ने बिहार के एक युवक को गिरफ्तार किया है, जिस पर अपहरण और यौन शोषण जैसी गंभीर धाराओं के साथ-साथ पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

क्या है पूरा मामला?

मामले की पृष्ठभूमि 27 जनवरी 2026 से शुरू होती है, जब द्वाराहाट क्षेत्र के एक गांव निवासी व्यक्ति ने राजस्व पुलिस को तहरीर दी थी कि उनकी नाबालिग पुत्री संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गई है। पहाड़ी क्षेत्रों में राजस्व पुलिस (पटवारी पुलिस) की व्यवस्था होने के कारण शुरुआती जांच वहीं शुरू हुई, लेकिन मामले की गंभीरता और अंतरराज्यीय कड़ियों की संभावना को देखते हुए इसे 29 जनवरी को नियमित पुलिस (सिविल पुलिस) को हस्तांतरित कर दिया गया।

एसएसपी अल्मोड़ा, देवेंद्र पींचा ने मामले को प्राथमिकता पर लेते हुए तत्काल कोतवाली द्वाराहाट को प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए। नाबालिग की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंता के बीच पुलिस ने युद्ध स्तर पर अपनी टीमें सक्रिय कीं।

चार टीमें, तीन राज्य और हाई-टेक सर्विलांस

नाबालिग की तलाश के लिए एसएसपी के निर्देश पर अपर पुलिस अधीक्षक हरबंस सिंह और क्षेत्राधिकारी रानीखेत विमल प्रसाद के पर्यवेक्षण में एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई। जांच के लिए चार अलग-अलग पुलिस टीमें गठित की गईं, जिनका नेतृत्व प्रभारी निरीक्षक द्वाराहाट विनोद जोशी और एसओजी (SOG) प्रभारी सुनील धानिक कर रहे थे।

पुलिस ने अपनी जांच के केंद्र में तीन बिंदुओं को रखा:

  1. सीसीटीवी फुटेज: क्षेत्र के बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों और संदिग्ध रास्तों के सैकड़ों कैमरों की फुटेज खंगाली गई।

  2. सर्विलांस टीम: साइबर सेल और सर्विलांस टीम की मदद से मोबाइल लोकेशन और कॉल डिटेल्स का गहन विश्लेषण किया गया।

  3. मैनुअल इंटेलिजेंस: संदिग्ध के संभावित ठिकानों पर मुखबिरों को सक्रिय किया गया।

जांच के दौरान पुलिस को सुराग मिले कि आरोपी किशोरी को लेकर उत्तराखंड की सीमा से बाहर निकल चुका है। इसके बाद टीमें दिल्ली, गुड़गांव और आरोपी के गृह राज्य बिहार के सुपौल जिले (माधोपुर क्षेत्र) के लिए रवाना हुईं।

गुड़गांव में छापेमारी और आरोपी की गिरफ्तारी

तकनीकी साक्ष्यों और धरातलीय सूचनाओं के आधार पर पुलिस टीमों ने 31 जनवरी को गुड़गांव में एक गुप्त ठिकाने पर छापेमारी की। यहाँ से पुलिस ने गुमशुदा किशोरी को सकुशल बरामद कर लिया। मौके से ही आरोपी खुशदिल (20 वर्ष), पुत्र मोहम्मद मुस्ताक, निवासी माधोपुर, थाना छातापुर, जिला सुपौल (बिहार) को गिरफ्तार किया गया।

पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई ने आरोपी को पीड़िता के साथ और दूर ले जाने या ठिकाना बदलने का मौका नहीं दिया। किशोरी को वापस अल्मोड़ा लाया गया और आवश्यक चिकित्सकीय परीक्षण व काउंसलिंग के बाद परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया।

कानूनी कार्रवाई: पॉक्सो एक्ट और BNS की धाराएं

पीड़िता के मजिस्ट्रेट के समक्ष दिए गए बयानों और चिकित्सकीय रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने मामले को बेहद गंभीर माना है। पहले से दर्ज गुमशुदगी के मामले को अब गंभीर आपराधिक धाराओं में तब्दील कर दिया गया है।

आरोपी खुशदिल के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 137(2) (अपहरण) और धारा 64 (दुष्कर्म) के साथ-साथ पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) की धारा 3/4 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। इन धाराओं के तहत दोषी पाए जाने पर कठोर कारावास का प्रावधान है।

पुलिस टीम की सराहना

अल्मोड़ा पुलिस की इस पेशेवर कार्यशैली की स्थानीय जनता और उच्चाधिकारियों ने सराहना की है। सफल अभियान चलाने वाली टीम में मुख्य रूप से शामिल रहे:

  • विनोद जोशी (प्रभारी निरीक्षक, द्वाराहाट)

  • मीना आर्या (महिला उपनिरीक्षक)

  • सुनील धानिक (एसओजी प्रभारी)

  • बृजमोहन भट्ट और धरम सिंह (उपनिरीक्षक)

  • एसओजी के हेड कांस्टेबल अवधेश कुमार, कांस्टेबल गणेश पाण्डे, इरशाद उल्ला और अन्य।

सुरक्षा संदेश

यह मामला एक बार फिर सोशल मीडिया और अपरिचितों के साथ बढ़ते संपर्कों के खतरों की ओर इशारा करता है। पुलिस अधिकारियों ने अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखें और किसी भी संदिग्ध परिस्थिति में तुरंत पुलिस को सूचित करें। अल्मोड़ा पुलिस ने स्पष्ट किया है कि महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध होने वाले अपराधों पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जा रही है।

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