उत्तराखंडफीचर्ड

Ankita Bhandari Case: अंकिता हत्याकांड पर गणेश गोदियाल का बड़ा सियासी धमाका, बोले- ‘सत्ता में बैठे लोग हर कदम पर जांच भटकाने की करेंगे कोशिश’

देहरादून (7 जनवरी 2026): उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में ‘वीआईपी’ विवाद ने एक बार फिर प्रदेश की सियासत में भूचाल ला दिया है। बुधवार को देहरादून स्थित कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित एक अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष (PCC Chief) गणेश गोदियाल ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और भाजपा सरकार पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला। गोदियाल ने दावा किया कि जब तक वर्तमान नेतृत्व सत्ता में है, अंकिता को न्याय मिलना असंभव है।

मुख्यमंत्री की ‘असहजता’ पर सवाल: क्या सरकार कुछ छिपा रही है?

गणेश गोदियाल ने मंगलवार (6 जनवरी) को एक पत्रकार द्वारा पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया का हवाला देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री काफी असहज नजर आए। गोदियाल ने आरोप लगाया, “मुख्यमंत्री की असहजता यह दर्शाती है कि वह पहले दिन से ही इस मामले को भटकाने और प्रभावित करने का प्रयास कर रहे हैं। जब सवाल सीधा था, तो जवाब देने का तरीका इतना रक्षात्मक क्यों था?”


रिजॉर्ट पर बुलडोजर: ‘मर्डर मिस्ट्री’ की सबसे बड़ी गुत्थी

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान गणेश गोदियाल ने मर्डर मिस्ट्री के केंद्र में रहे उस रिजॉर्ट के कमरे को लेकर सरकार को घेरा, जिसे घटना के तुरंत बाद ध्वस्त कर दिया गया था।

गोदियाल के 3 प्रमुख सवाल:

  1. विधायक का श्रेय: जब यमकेश्वर विधायक खुलेआम स्वीकार कर चुकी हैं कि रिजॉर्ट सीएम के आदेश पर तोड़ा गया, तो क्या एसआईटी (SIT) ने मुख्यमंत्री से इस बारे में पूछताछ की?

  2. मंशा क्या थी?: अंकिता के कमरे को बुलडोजर से तुड़वाने के पीछे असली मंशा क्या थी? क्या वहां मौजूद ‘वीआईपी’ से जुड़े सबूतों को मिटाना ही एकमात्र लक्ष्य था?

  3. गवाहों की स्थिति: एसआईटी जांच में 90 से अधिक गवाह बनाए गए थे, लेकिन अब तक कितनों की गवाही कोर्ट में हुई है, सरकार इसका ब्योरा क्यों नहीं देती?


बीजेपी नेतृत्व परिवर्तन की मांग: ‘जांच को प्रभावित कर रहे सत्ताधीश’

गणेश गोदियाल ने भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को चेतावनी भरे लहजे में कहा कि उत्तराखंड में निष्पक्ष जांच के लिए नेतृत्व परिवर्तन (Leadership Change) अनिवार्य हो गया है। उन्होंने कहा, “भाजपा के आलाकमान को प्रदेश नेतृत्व बदलना पड़ेगा, अन्यथा सत्ता की ताकत का इस्तेमाल कर कदम-कदम पर जांच को भटकाया जाता रहेगा। एक महीने के भीतर भाजपा को यह फैसला लेना ही होगा।”

गोदियाल ने सरकार के उस तर्क पर भी आपत्ति जताई जिसमें विपक्ष से सबूत मांगे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि साक्ष्य जुटाना जांच एजेंसियों का काम है, न कि विपक्ष का। सरकार अपनी विफलता छिपाने के लिए गेंद विपक्ष के पाले में डाल रही है।


मांग: न्यायिक निगरानी में सीबीआई जांच

कांग्रेस ने एक बार फिर दोहराया कि वह इस मामले की सीबीआई (CBI) जांच चाहती है, लेकिन उसकी निगरानी हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान न्यायाधीश को करनी चाहिए। गोदियाल ने कहा कि लोक सेवकों के माध्यम से जो प्रश्नावली पुलिस को सौंपी गई थी, उसका उत्तर आज तक नहीं मिला है, जो दर्शाता है कि व्यवस्था में पारदर्शिता की कमी है।

राजनीतिक विश्लेषकों का नजरिया

विशेषज्ञों का मानना है कि 11 जनवरी को प्रस्तावित ‘उत्तराखंड बंद’ से पहले गणेश गोदियाल का यह बयान कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा फूँकने का काम करेगा। सरकार के लिए अब अंकिता भंडारी मामले में उठ रहे इन तकनीकी सवालों का जवाब देना अनिवार्य हो गया है।


न्याय की मांग या सत्ता का संघर्ष?

अंकिता भंडारी हत्याकांड अब केवल एक कानूनी मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह उत्तराखंड की राजनीति की धुरी बन चुका है। एक ओर जहाँ कांग्रेस इसे ‘सबूत मिटाने’ का मामला बता रही है, वहीं सरकार इसे ‘राजनीतिक प्रोपेगेंडा’ करार दे रही है। सच क्या है, यह तो न्यायिक प्रक्रिया ही तय करेगी, लेकिन गणेश गोदियाल के हमलों ने धामी सरकार की घेराबंदी तेज कर दी है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button