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The Hill India > Blog > दिल्ली > विज्ञापनों के लिए इतना खर्च… तो राष्ट्रीय परियोजना के लिए क्यों नहीं, सुप्रीम कोर्ट का दिल्ली सरकार पर तंज
दिल्लीफीचर्ड

विज्ञापनों के लिए इतना खर्च… तो राष्ट्रीय परियोजना के लिए क्यों नहीं, सुप्रीम कोर्ट का दिल्ली सरकार पर तंज

The Hill India News
Last updated: November 21, 2023 10:23 am
The Hill India News
Published: November 21, 2023
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New Delhi: दिल्ली-मेरठ क्षेत्रीय रैपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम ( RRTS) परियोजना से जुड़े मामले में दिल्ली सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा  झटका लगा है. दरअसल रैपिड परियोजना को लेकर फंड ना देने से सुप्रीम कोर्ट नाराज है. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा एक हफ्ते के भीतर 415 करोड़ रुपये दे सरकार और अगर नहीं दिया तो दिल्ली सरकार के विज्ञापन बजट पर रोक लगाकर फंडिंग दे देंगे. इसके लिए बकायदा सुप्रीम कोर्ट ने एक हफ्ते का दिया अल्टीमेटम देते हुए कहा कि अगर नहीं दिया तो विज्ञापन बजट से पैसा दिया जाएगा. इस मामले में अगली सुनवाई 28 नवंबर को होगी.

बताते चले कि सुप्रीम कोर्ट ने 24 जुलाई को 415 करोड़ रुपये ना देने पर दिल्ली सरकार को घेरते हुए कहा कि अगर ये राशि नहीं दी तो हम दिल्ली सरकार के विज्ञापनों बजट पर रोक लगाकर अटैच कर लेंगे. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रदूषण को रोकने के लिए परियोजना भी जरूरी है. पिछले तीन साल का दिल्ली सरकार का विज्ञापन बजट 1100 करोड़ था, जबकि इस साल का बजट 550 करोड़ है. 24 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अगर दिल्ली सरकार तीन सालों में विज्ञापन के लिए ₹1100 करोड़ आवंटित कर सकती है तो बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए फंड भी जरूरी है.

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