देहरादून, 08 जुलाई 2026 उत्तराखंड में भारी बारिश और मानसून के आगमन के साथ ही राजधानी देहरादून का जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। आगामी मानसून सीजन के दौरान आम जनता को जलभराव, टूटी सड़कों और संक्रामक बीमारियों से बचाने के लिए जिलाधिकारी डॉ0 आशीष चौहान ने एक बेहद महत्वपूर्ण और उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित इस बैठक में शहर की बुनियादी व्यवस्थाओं, सड़क सुरक्षा, जल निकासी, बिजली और जनसुविधाओं से जुड़े हर पहलू पर बारीकी से मंथन किया गया।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में सभी अधिकारियों को चेतावनी दी है कि देहरादून मानसून तैयारियां में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि किसी विभाग की लापरवाही के कारण जनता को परेशानी होती है या कोई दुर्घटना होती है, तो संबंधित अधिकारी और ठेकेदार के खिलाफ सीधे तौर पर विधिक कार्रवाई की जाएगी।
नदियों के किनारे हाई अलर्ट और नालों की सफाई के निर्देश
देहरादून में मानसून के दौरान रिस्पना और बिंदाल नदियों का जलस्तर बढ़ना एक बड़ी चुनौती रहता है। जिलाधिकारी ने इन दोनों नदियों के तटों पर बसी संवेदनशील बस्तियों और वहां रहने वाले लोगों की सुरक्षा व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने सिंचाई विभाग और नगर निगम को निर्देश दिए कि इन क्षेत्रों पर चौबीसों घंटे निगरानी रखी जाए और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षा के सभी इंतजाम पहले से पूरे होने चाहिए।
इसके साथ ही, शहर में ड्रेनेज सिस्टम (जल निकासी) को दुरुस्त रखने के लिए जिलाधिकारी ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि शहर के सभी प्रमुख और छोटे नालों की नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए ताकि मूसलाधार बारिश के दौरान भी सड़कों पर पानी जमा न हो। उन्होंने अधिकारियों को पूर्व में जलभराव के लिए संवेदनशील रहे (Waterlogging hotspots) इलाकों को चिन्हित कर वहां पहले से ही पंपिंग सेट और आवश्यक संसाधन तैनात करने के निर्देश दिए। सिंचाई विभाग को शहर के भीतर स्थित नहरों और भूमिगत (अंडरग्राउंड) नहरों की वर्तमान स्थिति का पूरा विवरण प्रस्तुत करने के लिए भी कहा गया है।
सड़कों के गड्ढों और लापरवाह ठेकेदारों पर गिरेगी गाज
बैठक का एक बड़ा हिस्सा सड़कों की बदहाली और जगह-जगह हो रही रोड कटिंग पर केंद्रित रहा। देहरादून में विभिन्न परियोजनाओं (जैसे गैस पाइपलाइन, सीवरेज) के लिए खोदी गई सड़कों को लेकर डीएम ने गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने लोनिवि (PWD), नगर निगम और यूयूएसडीए (UUSDA) के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे संयुक्त रूप से सभी निर्माण कार्यों का स्थलीय निरीक्षण करें।
डीएम ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि सड़कों को तत्काल ‘गड्ढामुक्त’ कर यातायात के लिए पूरी तरह सुरक्षित बनाया जाए। खासकर गेल (GAIL) द्वारा संचालित पाइपलाइन कार्यों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी की शिकायत पर जिलाधिकारी ने संबंधित ठेकेदार के खिलाफ भारी अर्थदंड (जुर्माना) लगाने की कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने दोटूक कहा कि यदि ठेकेदार अपनी कार्यप्रणाली में सुधार नहीं करता है, तो उसे तुरंत ब्लैकलिस्ट किया जाए। जिलाधिकारी ने साफ किया कि अगर सड़क के गड्ढों की वजह से कोई दुर्घटना होती है या जान-माल का नुकसान होता है, तो संबंधित विभागीय अधिकारियों की जवाबदेही तय कर कानूनी कदम उठाए जाएंगे।
स्वास्थ्य सुरक्षा: हाईरिस्क गर्भवती महिलाओं की फोन पर ली सुध, स्कूलों में फुल स्लीव्स अनिवार्य
प्रशासनिक कड़ाई के बीच जिलाधिकारी का एक बेहद संवेदनशील और मानवीय चेहरा भी इस बैठक में देखने को मिला। उन्होंने मानसून के दौरान दुर्गम और पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाली हाईरिस्क प्रेगनेंसी (उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं) की स्थिति की समीक्षा की। डीएम ने खुद ऐसी कई महिलाओं से फोन (दूरभाष) पर बातचीत कर उनके स्वास्थ्य और व्यवस्थाओं का हाल जाना।
उन्होंने मुख्य चिकित्साधिकारी (CMO) डॉ. मनोज शर्मा को निर्देश दिए कि वे जिले की सभी गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य की निरंतर मॉनिटरिंग करें। जिलाधिकारी ने एक महत्वपूर्ण नीतिगत निर्देश देते हुए कहा कि ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों की गर्भवती महिलाओं को उनकी संभावित प्रसव तिथि (Delivery Date) से कम से कम एक सप्ताह पहले ही नजदीकी सुरक्षित चिकित्सालयों या सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट कर दिया जाए, ताकि भारी बारिश या भूस्खलन के कारण रास्ते बंद होने पर भी उन्हें इलाज मिलने में कोई दिक्कत न हो।
इसके अलावा, वर्षाकाल में पैर पसारने वाले डेंगू और मलेरिया के डंक से बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए भी बड़े फैसले लिए गए। मुख्य शिक्षा अधिकारी को निर्देश दिए गए हैं कि जिले के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में छात्र-छात्राओं के लिए ‘फुल बाजू की ड्रेस’ (Full sleeves uniform) पहनकर आना अनिवार्य किया जाए। साथ ही, स्वास्थ्य और नगर निकाय की टीमें डेंगू प्रभावित इलाकों में नियमित फॉगिंग और लार्वा नष्ट करने का अभियान चलाएंगी।
जर्जर भवनों का ध्वस्तीकरण और बिजली सुरक्षा के लिए टास्क फोर्स
वर्षा ऋतु में पुराने और जर्जर मकानों के ढहने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। नगर निगम के अधिकारियों ने बैठक में बताया कि शहर के भीतर ऐसे 23 असुरक्षित भवनों की पहचान की जा चुकी है। इस पर जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि जो मामले माननीय न्यायालयों में लंबित हैं, उन्हें छोड़कर बाकी सभी जर्जर और खतरनाक भवनों को निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत तुरंत ध्वस्त किया जाए ताकि जनहानि को रोका जा सके।
बिजली के ढीले तारों और पेड़ों से सटकर गुजर रही हाईटेंशन लाइनों को लेकर भी यूपीसीएल (UPCL) को विशेष निर्देश दिए गए हैं। डीएम ने कहा कि लटकते हुए तार मानसून में करंट दौड़ने का बड़ा कारण बनते हैं। यूपीसीएल के अधिकारियों को बिजली लाइनों के सुधारीकरण और फॉल्ट को तुरंत ठीक करने के लिए एक विशेष ‘टास्क फोर्स’ (Task Force) गठित करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, चिन्हित क्षेत्रों में बिजली के तारों को भूमिगत (Underground cabling) करने के कार्य को योजनाबद्ध तरीके से पूरा करने को कहा गया है।
नागरिक सुविधाओं पर फोकस: स्ट्रीट लाइट और रैन बसेरे
रात्रि सुरक्षा और नागरिक सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए जिलाधिकारी ने नगर मजिस्ट्रेट और उप जिलाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में स्ट्रीट लाइटों का खुद निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जहां भी लाइटें खराब हैं, उन्हें 24 घंटे के भीतर ठीक किया जाए और अंधेरे वाले संवेदनशील चौराहों पर नई स्ट्रीट लाइटें लगाई जाएं। इसके अतिरिक्त, शहर के रैन बसेरों में सभी आवश्यक मूलभूत सुविधाएं (बिस्तर, साफ पानी, चिकित्सा) चाक-चौबंद रखने को कहा गया है ताकि बेसहारा लोगों को मानसून में सुरक्षित आश्रय मिल सके। पानी की शुद्धता जांचने के लिए जल संस्थान और होटलों में खाने की गुणवत्ता परखने के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग को निरंतर चेकिंग अभियान चलाने के आदेश दिए गए हैं।
आपसी समन्वय ही एकमात्र रास्ता बैठक के समापन पर जिलाधिकारी डॉ0 आशीष चौहान ने सभी विभागों को आपसी तालमेल (Inter-departmental coordination) से काम करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन और जनसुरक्षा के कार्यों में किसी भी प्रकार की ‘कागजी खानापूर्ति’ बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस महत्वपूर्ण बैठक में अपर जिलाधिकारी (वित्त/राजस्व) के.के. मिश्रा, पुलिस अधीक्षक नगर प्रमोद कुमार, सीएमओ डॉ. मनोज शर्मा, लोनिवि के अधीक्षण अभियंता ओमपाल सिंह सहित बिजली, सिंचाई और नगर निगम के तमाम आला अधिकारी मौजूद रहे।
