भुवनेश्वर/कोरापुट: ओडिशा के कोरापुट जिले से भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बेहद चौंकाने वाली और बड़ी कार्रवाई सामने आई है। ओडिशा विजिलेंस (Odisha Vigilance) की टीम ने एक हाई-प्रोफाइल छापेमारी में जयपुर (Jeypore) में तैनात डिप्टी डायरेक्टर (जियोलॉजी)-कम-डिप्टी डायरेक्टर ऑफ माइंस सत्यजीत राउत को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी अधिकारी को एक लीजधारक से ₹2 लाख की रिश्वत लेते हुए दबोचा गया।
इस कार्रवाई की गूंज पूरे राज्य के प्रशासनिक महकमे में सुनाई दे रही है। गिरफ्तारी के तुरंत बाद जब विजिलेंस की टीमों ने आरोपी अधिकारी के विभिन्न ठिकानों पर दबिश दी, तो नोटों की गड्डियां देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए। तलाशी के दौरान सत्यजीत राउत के घर से ₹2.90 लाख की अतिरिक्त नकदी बरामद हुई है। इस पूरी कार्रवाई में अब तक कुल ₹4.90 लाख का कैश जब्त किया जा चुका है।
रेत घाट की लीज के लिए मांगी थी ‘मोटी रकम’
यह पूरा मामला सरकारी तंत्र में बैठे अधिकारियों की मनमानी और भ्रष्टाचार की जड़ों को उजागर करता है। जानकारी के अनुसार, सत्यजीत राउत जयपुर स्थित डिप्टी डायरेक्टर ऑफ माइंस कार्यालय में एक रसूखदार पद पर बैठे थे। उन पर आरोप है कि उन्होंने एक स्थानीय लीजधारक को परेशान करना शुरू कर दिया था।
दरअसल, पीड़ित के रेत घाट (Sand Ghat) की लीज अवधि समाप्त हो चुकी थी। इस लीज के एक्सटेंशन (अवधि विस्तार) को मंजूरी देने और भविष्य में होने वाली ‘स्पॉट ऑक्शन’ (मौके पर नीलामी) की प्रक्रिया में अनुचित लाभ पहुंचाने के एवज में डिप्टी डायरेक्टर ने ₹2 लाख की रिश्वत की मांग की थी। पीड़ित कारोबारी अधिकारी के इस रवैए और भ्रष्टाचार के आगे झुकने को तैयार नहीं था, जिसके बाद उसने इसकी शिकायत विजिलेंस विभाग से कर दी।
भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार: “सरकारी विभागों में जनता और व्यापारियों को परेशान कर जेब भरने वाले अधिकारियों के खिलाफ ओडिशा विजिलेंस अब जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है।”
विजिलेंस का चक्रव्यूह: ऐसे जाल में फंसा भ्रष्ट अधिकारी
शिकायत मिलने के बाद कोरापुट विजिलेंस की टीम ने बेहद गोपनीय तरीके से एक ठोस रणनीति तैयार की। आरोपी अधिकारी को भनक तक नहीं थी कि उसकी हर हरकत पर नजर रखी जा रही है। योजना के मुताबिक, शिकायतकर्ता को केमिकल लगे हुए नोटों के साथ सत्यजीत राउत के पास भेजा गया।
जैसे ही पीड़ित ने ₹2 लाख की रिश्वत की रकम डिप्टी डायरेक्टर के हाथों में थमाई, पहले से ही आसपास सादे कपड़ों में मुस्तैद विजिलेंस की टीम ने धावा बोल दिया। आरोपी अधिकारी को मौके पर ही रंगे हाथों (Red Handed) गिरफ्तार कर लिया गया। जब सत्यजीत राउत के हाथ धुलवाए गए, तो उनका रंग बदल गया, जो इस बात का पुख्ता वैज्ञानिक सबूत है कि उन्होंने रिश्वत के पैसों को छुआ था। मौके से रिश्वत की पूरी रकम बरामद कर ली गई।
एक साथ कई ठिकानों पर छापेमारी, अलमारी से निकला कैश
सत्यजीत राउत की गिरफ्तारी महज एक शुरुआत थी। विजिलेंस के आला अधिकारियों को अंदेशा था कि इतने बड़े पद पर बैठे अधिकारी ने काली कमाई से भारी संपत्ति अर्जित की होगी। इसके बाद कोर्ट से अनुमति लेकर विजिलेंस की अलग-अलग टीमों ने आरोपी के तीन बड़े ठिकानों पर एक साथ ताबड़तोड़ छापेमारी शुरू की:
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जयपुर (Jeypore): लिंगराज नगर स्थित उनका वर्तमान आवास।
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कटक (Cuttack): विद्याधरपुर स्थित उनका निजी घर।
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महांगा (Mahanga): ओलकना स्थित पैतृक मकान।
जब विजिलेंस की टीम जयपुर स्थित लिंगराज नगर वाले घर की तलाशी ले रही थी, तो वहां से ₹500-500 के नोटों की गड्डियों के रूप में ₹2.90 लाख का अतिरिक्त कैश बरामद हुआ। इस कैश के बारे में आरोपी अधिकारी या उनके परिजन कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।
कानूनी शिकंजा: दर्ज हुआ केस, आय से अधिक संपत्ति की जांच शुरू
इस बड़ी कार्रवाई के बाद कोरापुट विजिलेंस पुलिस स्टेशन में भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2018 (Prevention of Corruption Act) की धारा 7 के तहत केस नंबर 14/2026 दर्ज किया गया है।
विजिलेंस के सूत्रों का कहना है कि यह मामला सिर्फ ₹2 लाख की रिश्वत तक सीमित नहीं रहने वाला है। अब आरोपी अधिकारी सत्यजीत राउत के खिलाफ ‘आय से अधिक संपत्ति’ (Disproportionate Assets – DA) के एंगल से भी व्यापक जांच शुरू कर दी गई है। कटक और महांगा में संपत्तियों के दस्तावेजों, बैंक खातों, लॉकरों और निवेशों की स्क्रूटनी की जा रही है, जिससे आने वाले दिनों में कई और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।
जनता में भरोसा, भ्रष्टाचारियों में खौफ
इस कार्रवाई ने एक बार फिर साबित किया है कि कानून के हाथ कितने लंबे होते हैं। कोरापुट और जयपुर के स्थानीय निवासियों और व्यापारियों ने विजिलेंस की इस त्वरित कार्रवाई की सराहना की है। लोगों का कहना है कि खनन और रेत जैसे विभागों में भ्रष्टाचार के कारण आम आदमी और ईमानदार ठेकेदारों का दम घुट रहा था। इस तरह की गिरफ्तारियां सरकारी सिस्टम में आम जनता के विश्वास को बहाल करने का काम करती हैं। फिलहाल आरोपी अधिकारी से गुप्त स्थान पर पूछताछ जारी है और उन्हें जल्द ही विशेष विजिलेंस कोर्ट में पेश किया जाएगा।
