देहरादून: देवभूमि उत्तराखंड एक बार फिर आस्था के सबसे बड़े महाकुंभ यानी ‘कांवड़ यात्रा’ की मेजबानी के लिए पूरी तरह तैयार है। इस वर्ष 30 जुलाई से शुरू हो रही कांवड़ यात्रा को लेकर उत्तराखंड शासन ने सुरक्षा, सुविधा और सुगम आवाजाही के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर ली है। सोमवार को सचिवालय में आयोजित एक महत्वपूर्ण उच्च-स्तरीय बैठक में मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने यात्रा की तैयारियों की समीक्षा की और सभी संबंधित विभागों को युद्धस्तर पर काम पूरा करने के कड़े निर्देश दिए।
भीड़ प्रबंधन और रूट प्लान पर विशेष फोकस
बैठक को संबोधित करते हुए मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि 30 जुलाई से 11 अगस्त तक चलने वाली यह यात्रा अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने विशेष रूप से ‘पंचक काल’ का जिक्र करते हुए कहा कि 31 जुलाई से 04 अगस्त के बीच कांवड़ मेले में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की प्रबल संभावना है। इसे देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस को विशेष रूट प्लान और क्राउड मैनेजमेंट (भीड़ प्रबंधन) की पुख्ता व्यवस्था करने को कहा गया है। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बैरिकेडिंग और डायवर्जन प्लान को अभी से अंतिम रूप दे दिया जाए ताकि स्थानीय लोगों और यात्रियों को असुविधा न हो।
पेयजल, स्वच्छता और स्वास्थ्य सेवाओं का ताना-बाना
मुख्य सचिव ने कांवड़ पटरियों और प्रमुख पड़ाव स्थलों पर बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि लाखों की संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पर्याप्त पेयजल की उपलब्धता और मोबाइल शौचालयों की तैनाती सुनिश्चित की जाए। स्वच्छता के मोर्चे पर किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी; इसके लिए नियमित कूड़ा उठान, फॉगिंग और कीटनाशक छिड़काव के निर्देश दिए गए हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ करते हुए उन्होंने यात्रा मार्गों पर अस्थायी सेक्टर चिकित्सालय बनाने को कहा है। इसके अलावा, आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए बेसिक लाइफ सपोर्ट (BLS) एम्बुलेंस और दुर्गम क्षेत्रों में त्वरित मदद के लिए ‘बाइक एम्बुलेंस’ तैनात करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
सड़क, पार्किंग और विद्युतीकरण का ऑडिट
यात्रा के सुचारू संचालन के लिए हरिद्वार आने वाले वाहनों की पार्किंग व्यवस्था पर भी मंथन किया गया। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि पार्किंग स्थलों की मरम्मत और उनके विस्तारीकरण का कार्य समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए। राष्ट्रीय राजमार्गों पर बैरिकेडिंग और मार्ग सुधारीकरण के कार्य को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने को कहा गया है।
इसके अलावा, उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPCL) को निर्देश दिए गए हैं कि वे यात्रा मार्गों का पावर सप्लाई ऑडिट कराएं। कांवड़ यात्रा के दौरान निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए विद्युतीकरण की स्थायी व्यवस्था बनाने पर जोर दिया गया है। मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि सड़कों पर रोशनी (स्ट्रीट लाइट) की उचित व्यवस्था होनी चाहिए ताकि रात के समय भी कांवड़ियों को कोई परेशानी न हो।
खाद्य सुरक्षा और अंतर्राज्यीय समन्वय
कांवड़ यात्रा के दौरान खाद्य पदार्थों की शुद्धता भी एक बड़ी चुनौती होती है। इसे ध्यान में रखते हुए मुख्य सचिव ने खाद्य सुरक्षा टीमों के गठन के निर्देश दिए हैं। ये टीमें होटलों, ढाबों, धार्मिक भण्डारों, स्थायी-अस्थायी खाद्य स्टॉलों और दुग्ध विक्रेताओं के यहाँ निरंतर निरीक्षण और सैंपलिंग का कार्य करेंगी।
कानून-व्यवस्था और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए अन्य राज्यों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने कहा कि पड़ोसी राज्यों के साथ जल्द ही अंतर्राज्यीय बैठकें आयोजित कर सहयोग मांगा जाए ताकि यात्रा को सकुशल संपन्न कराया जा सके।
बैठक में रहे ये अधिकारी मौजूद
इस महत्वपूर्ण बैठक में शासन के आला अधिकारी मौजूद रहे, जिनमें सचिव शैलेश बगौली, नितेश कुमार झा, विनोद कुमार सुमन, धीरज गर्ब्याल और अपर सचिव रीना जोशी शामिल थीं। इसके अलावा गढ़वाल कमिश्नर आनन्द स्वरूप, हरिद्वार के जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, देहरादून के डीएम आशीष चौहान, पौड़ी की डीएम स्वाति एस. भदौरिया और टिहरी की डीएम नीतिका खंडेलवाल सहित संबंधित जनपदों के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और पुलिस अधिकारी भी मौजूद रहे।
आने वाले दिनों में अब इन निर्देशों का जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन शुरू हो जाएगा, ताकि शिवभक्तों की यह यात्रा सुरक्षित और सुगम बनी रहे।
