By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
The Hill IndiaThe Hill IndiaThe Hill India
Notification Show More
Font ResizerAa
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Reading: मुंबई में जलभराव के लिए सिर्फ BMC जिम्मेदार नहीं, हमारी ही आदतें वजह: बॉम्बे हाई कोर्ट की नागरिकों को दो टूक— ‘हम खुद अपनी मातृभूमि को लूट रहे हैं’
Share
Font ResizerAa
The Hill IndiaThe Hill India
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Search
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Have an existing account? Sign In
Follow US
The Hill India > Blog > देश > मुंबई में जलभराव के लिए सिर्फ BMC जिम्मेदार नहीं, हमारी ही आदतें वजह: बॉम्बे हाई कोर्ट की नागरिकों को दो टूक— ‘हम खुद अपनी मातृभूमि को लूट रहे हैं’
देशफीचर्ड

मुंबई में जलभराव के लिए सिर्फ BMC जिम्मेदार नहीं, हमारी ही आदतें वजह: बॉम्बे हाई कोर्ट की नागरिकों को दो टूक— ‘हम खुद अपनी मातृभूमि को लूट रहे हैं’

The Hill India News
Last updated: July 8, 2026 1:54 am
The Hill India News
Published: July 8, 2026
Share
SHARE

मुंबई: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में हर साल मानसून के दौरान होने वाला जलभराव (Waterlogging) और बाढ़ जैसी स्थिति सिर्फ एक प्रशासनिक विफलता नहीं है, बल्कि यह नागरिकों की नागरिक समझ और आदतों का भी नतीजा है। बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay High Court) ने मंगलवार को एक मामले की सुनवाई के दौरान मुंबई की इस पुरानी और गंभीर समस्या पर बेहद तीखी और आंखें खोलने वाली टिप्पणी की है।

Contents
‘थोड़ी सी बारिश में सड़कें जाम होना हमारी ही करतूत’फुटपाथ पर पाव-भाजी के स्टॉल: इंफ्रास्ट्रक्चर का गलत इस्तेमालमंडला गांव सड़क चौड़ीकरण परियोजना: क्या है पूरा कानूनी मामला?परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) को नोटिस जारीएक कड़ा संदेश: जवाबदेही सिर्फ सिस्टम की नहीं, हमारी भी है

हाई कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि मुंबई में मानसून के दौरान बार-बार होने वाले जल-जमाव के लिए सिर्फ बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (BMC) को कटघरे में नहीं खड़ा किया जा सकता। कोर्ट ने रेखांकित किया कि अनियंत्रित अतिक्रमण (Encroachment), कचरे से बंद पड़ी नालियां और पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का आम लोगों द्वारा किया जाने वाला गलत इस्तेमाल इस महानगर में बाढ़ की समस्याओं की सबसे बड़ी वजहें हैं।

‘थोड़ी सी बारिश में सड़कें जाम होना हमारी ही करतूत’

यह पूरा मामला सायन-ट्रॉम्बे स्ट्रेच पर स्थित मंडला गांव में सड़क चौड़ी करने से जुड़ी एक याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया। मामले की गंभीरता को देखते हुए एक्टिंग चीफ जस्टिस रवींद्र वी. घुगे और जस्टिस गौतम अंखाड की बेंच ने सख्त रुख अपनाया। बेंच ने कहा कि जल-जमाव की कई समस्याएं सिर्फ सिविक अथॉरिटीज (नगर निकायों) की लापरवाही के कारण पैदा नहीं होतीं, बल्कि इसमें लोगों की गैर-जिम्मेदाराना हरकतें भी बराबर की हिस्सेदार हैं।

‘बार एंड बेंच’ की रिपोर्ट के मुताबिक, एक्टिंग चीफ जस्टिस घुगे ने समाज के रवैए पर चोट करते हुए कहा:

“सड़कों पर बारिश का पानी दिखना तय है। भौगोलिक और प्राकृतिक स्थितियों के आगे हम कुछ नहीं कर सकते। लेकिन, हमारे भीतर ज़मीन हड़पने की एक अजीब और घातक आदत विकसित हो गई है। हम नालियों को कचरे से बंद कर देते हैं। नतीजा यह होता है कि थोड़ी सी बारिश से ही सड़कें जाम हो जाती हैं। यह सब किसी और की नहीं, बल्कि हमारी ही करतूत है।”

फुटपाथ पर पाव-भाजी के स्टॉल: इंफ्रास्ट्रक्चर का गलत इस्तेमाल

बेंच ने केवल नालियों के चोक होने का ही जिक्र नहीं किया, बल्कि सार्वजनिक संपत्तियों के दुरुपयोग की ओर भी कोर्ट का ध्यान आकर्षित किया। माननीय न्यायाधीश ने दैनिक जीवन के उदाहरण देते हुए कहा कि प्रशासन शहर को व्यवस्थित करने के लिए सुविधाएं देता है, लेकिन नागरिक उनका स्वरूप बदल देते हैं।

जस्टिस घुगे ने बेहद भावुक और कड़े लहजे में कहा, “कॉर्पोरेशन ने पैदल चलने वालों की सुरक्षा और सुविधा के लिए हमें फुटपाथ (Footpaths) दिए, लेकिन हमने उन पर पाव-भाजी के स्टॉल और दुकानें लगानी शुरू कर दीं।” कोर्ट ने आत्मचिंतन की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि हमारी आदत अपनी ही मातृभूमि को नुकसान पहुंचाने और लूटने की हो गई है।

मंडला गांव सड़क चौड़ीकरण परियोजना: क्या है पूरा कानूनी मामला?

हाई कोर्ट की यह ऐतिहासिक और व्यावहारिक टिप्पणी तब सामने आई, जब कोर्ट बीएमसी (BMC) की एक अहम अर्जी पर सुनवाई कर रहा था। नगर निकाय ने सायन-ट्रॉम्बे रोड के किनारे मंडला गांव में एक बेहद व्यस्त सड़क को मौजूदा 30 फीट से बढ़ाकर 50 फीट तक चौड़ा करने के लिए परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) से ज़मीन हस्तांतरण की मांग करते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया है।

परियोजना का विवरण वर्तमान स्थिति और आंकड़े
परियोजना का नाम मंडला गांव सड़क चौड़ीकरण (सायन-ट्रॉम्बे स्ट्रेच)
सड़क की वर्तमान चौड़ाई 30 फीट
प्रस्तावित चौड़ाई 50 फीट
बीएमसी की कार्रवाई अपने क्षेत्र से अतिक्रमण हटाया, 192 पेड़ काटे गए
पेन्डिंग ज़मीन का मालिकाना हक परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) / BARC

सुनवाई के दौरान बीएमसी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मिलिंद साठे ने कोर्ट को बताया कि नगर निकाय इस इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को लेकर बेहद गंभीर है। बीएमसी ने अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाली ज़मीन से सभी अवैध निर्माण और अतिक्रमण को पूरी तरह हटा दिया है। नागरिक हितों और यातायात को सुगम बनाने के लिए इस प्रक्रिया के दौरान लगभग 192 पेड़ों को भी काटना पड़ा।

परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) को नोटिस जारी

सीनियर एडवोकेट मिलिंद साठे ने आगे स्पष्ट किया कि हालांकि बीएमसी ने अपना काम पूरा कर लिया है, लेकिन सड़क को मानक के अनुसार 50 फीट तक चौड़ा करने के लिए आवश्यक अतिरिक्त भूमि परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) के नियंत्रण में आती है। यह विभाग पास ही स्थित देश के प्रतिष्ठित भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) के प्रशासनिक और सुरक्षा संबंधी कामकाज को देखता है। साठे ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि जैसे ही केंद्र सरकार के इस विभाग से आवश्यक ज़मीन का कब्जा मिल जाएगा, नगर निकाय तुरंत सड़क निर्माण और चौड़ीकरण का काम पूरा कर देगा।

बीएमसी के इन तर्कों और शहर की जरूरत को देखते हुए एक्टिंग चीफ जस्टिस रवींद्र वी. घुगे की बेंच ने परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) को औपचारिक नोटिस जारी कर इस मामले में अपना रुख स्पष्ट करने को कहा है।

एक कड़ा संदेश: जवाबदेही सिर्फ सिस्टम की नहीं, हमारी भी है

बॉम्बे हाई कोर्ट का यह फैसला और टिप्पणी मुंबई के उन लाखों नागरिकों के लिए एक आईने की तरह है जो हर साल मानसून में जलभराव (Waterlogging) होने पर सोशल मीडिया और सड़कों पर उतरकर केवल नगर निगम को कोसते हैं। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि जब तक नागरिक कचरा प्रबंधन, प्लास्टिक के इस्तेमाल और अवैध अतिक्रमण को लेकर खुद जागरूक नहीं होंगे, तब तक दुनिया की कोई भी सिविक बॉडी मुंबई को डूबने से नहीं बचा सकती। इंफ्रास्ट्रक्चर का सम्मान और कानून का पालन ही मुंबई को इस सालाना त्रासदी से मुक्ति दिला सकता है।

You Might Also Like

केंद्रीय मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला ने किया ब्राजील का दौरा
फर्जी मुकदमे का कबूलनामा आशुतोष ब्रह्मचारी बोले- ‘रामचंद्र दास के कहने पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ दर्ज कराया केस’
22 सितंबर से सस्ती होंगी बाइक-स्कूटी! GST रेट कटौती का टू-व्हीलर खरीदारों को मिलेगा बड़ा फायदा
नई दिल्ली : एकलव्य की तरह सरकार युवाओं का अंगूठा काट रही – राहुल गांधी
उत्तर प्रदेश: वाराणसी में विकास की रफ्तार तेज, 6-लेन हाईवे से लहरतारा–मोहनसराय का सफर होगा महज 15 मिनट में पूरा
TAGGED:BMC Encroachment Action MumbaiBombay High Court Mumbai FloodingMandala Village Road WideningMumbai Civic Infrastructure IssuesMumbai Monsoon Waterlogging Case
Share This Article
Facebook Email Print
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
YoutubeSubscribe
TelegramFollow
Popular News
देशफीचर्ड

जेपी नड्डा और CJP के बीच बैठक: ‘धरना प्रदर्शन समाप्त’ करने के लिए प्रदर्शनकारियों ने रखीं तीन बड़ी शर्तें, दिल्ली में तनाव बरकरार

The Hill India News
The Hill India News
July 20, 2026
बदरीनाथ धाम दान चोरी मामला: गणेश गोदियाल और BKTC अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी में आर-पार, ‘संगठित अपराध’ के आरोपों से गरमाई उत्तराखंड की सियासत
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: सुप्रीम कोर्ट सख्त, नई SIT गठित करने के निर्देश, वरिष्ठ IPS अधिकारी करेंगे जांच की अगुवाई
उत्तराखंड में बारिश का कहर: रेड अलर्ट के बीच 24 घंटे में तीन मौतें, भूस्खलन और हादसों से कई जिले प्रभावित
संसद मार्च पर बवाल: CJP प्रदर्शन के बीच पुलिस की सख्ती, नड्डा से वार्ता के बाद खत्म हुआ अनशन, कई नेताओं और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया
50 कोशिशें, गोल्ड मेडल और टूटा सपना: सरकारी नौकरी की दौड़ में हारकर होनहार इंजीनियर ने दी जान
बरसात में मकड़ी ने काट लिया तो घबराएं नहीं! WHO के तकनीकी सलाहकार ने बताए सही इलाज के तरीके और खतरे के संकेत
उत्तराखंड में सुपरफूड किनोवा की दस्तक: थलीसैंण से शुरू होगा खेती का नया अध्याय, कम पानी में अधिक मुनाफे की उम्मीद
बेटी का भविष्य संवारने निकला परिवार काल के मुंह में समाया: समृद्धि हाईवे पर भीषण हादसे में 6 लोगों की जिंदा जलकर मौत
रुद्रप्रयाग में बारिश का रौद्र रूप: उफनाईं अलकनंदा-मंदाकिनी, हाईवे बंद, भूस्खलन से बढ़ा खतरा; प्रशासन ने जारी किया हाई अलर्ट
© The Hill India. All Rights Reserved | Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?