नैनीताल/हल्द्वानी: उत्तराखंड के शांत पर्यटन क्षेत्र नैनीताल के भवाली से देर रात एक बेहद सनसनीखेज और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। दुष्कर्म, ब्लैकमेलिंग और जबरन गर्भपात कराने जैसे संगीन आरोपों से घिरे भवाली व्यापार मंडल के अध्यक्ष नरेश पांडे को पुलिस की संयुक्त टीम ने भारी विरोध और हाई-वोल्टेज ड्रामे के बीच उनके आवास से हिरासत में ले लिया है।
इस पूरी कार्रवाई के दौरान तब हड़कंप मच गया जब खुद को पुलिस के घेरे में पाकर आरोपी नरेश पांडे ने न सिर्फ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर लाइव (Facebook Live) आकर पुलिस पर गंभीर आरोप मढ़े, बल्कि लाइव वीडियो के दौरान ही अचानक कोई जहरीला/जानलेवा पदार्थ गटक लिया। हालत बिगड़ने पर पुलिस उन्हें तुरंत बीडी पांडे चिकित्सालय लेकर दौड़ी, जहां से डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए हल्द्वानी के हायर सेंटर (सुशीला तिवारी अस्पताल) के लिए रेफर कर दिया है।
फेसबुक लाइव पर रोया रोना, पुलिस पर लगाए बेहद गंभीर आरोप
यह हाई-प्रोफाइल ड्रामा मंगलवार की देर रात तब शुरू हुआ जब नैनीताल, भवाली और हल्द्वानी पुलिस की संयुक्त टीम आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद आरोपी के भवाली स्थित घर पर दबिश देने पहुंची। पुलिस को देखकर नरेश पांडे ने आत्मसमर्पण करने के बजाय अपने मोबाइल से फेसबुक लाइव शुरू कर दिया और घर की बालकनी में आकर चीखने-चिल्लाने लगे।
लाइव वीडियो के माध्यम से लोगों से मदद की गुहार लगाते हुए नरेश पांडे ने पुलिस प्रशासन पर तीखे हमले किए। उन्होंने आरोप लगाया कि:
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पुलिस के पास उनकी गिरफ्तारी के लिए कोई वैध वारंट नहीं था।
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टीम ने घर में घुसकर उनकी नाबालिग बेटी के साथ अभद्रता की और उसके कपड़े तक फाड़ दिए।
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पुलिसकर्मियों ने उनके बुजुर्ग पिता, भाई और बेटे के साथ भी मारपीट और बदसलूकी की।
नरेश पांडे ने लाइव वीडियो में खुद को बेकसूर बताते हुए यह दावा भी किया कि पीड़ित युवती ने जिला न्यायालय में दर्ज कराए गए अपने बयानों में उनके पक्ष में बात कही है। हालांकि, इस दावे के बीच ही उन्होंने अचानक एक शीशी निकाली और उसमें रखा संदिग्ध पदार्थ पी लिया। इसके कुछ ही सेकंड बाद वीडियो अचानक बंद हो गया, क्योंकि अंदर दाखिल हुई पुलिस ने उन्हें अपनी कस्टडी में ले लिया था।
क्या है पूरा मामला और क्यों कसता गया कानून का शिकंजा?
यह पूरा मामला तब शुरू हुआ था जब क्षेत्र की ही एक युवती ने भवाली व्यापार मंडल के अध्यक्ष नरेश पांडे पर यौन शोषण और डरा-धमकाकर गर्भपात कराने का संगीन आरोप लगाते हुए पुलिस में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत के बाद नैनीताल पुलिस ने शुरुआती जांच के तहत नरेश पांडे को थाने बुलाकर करीब 24 घंटे तक कड़ी पूछताछ की थी और बाद में उन्हें छोड़ दिया था। इस बीच आरोपी ने खुद पर लगे आरोपों को मनगढ़ंत और राजनीति से प्रेरित बताते हुए जिला न्यायालय में अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) की याचिका दायर की थी। हालांकि, लोअर कोर्ट से उन्हें कोई राहत नहीं मिली, जिसके बाद उन्होंने उत्तराखंड हाई कोर्ट की शरण ली। वर्तमान में यह मामला हाई कोर्ट में विचाराधीन है।
BNSS की धारा 183 के तहत दर्ज हुए थे बयान
मामले में नया मोड़ तब आया जब पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए पीड़ित युवती के बयान जिला अदालत में दर्ज कराए। यह बयान भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 183 (जिसे पहले दंड प्रक्रिया संहिता यानी CrPC की धारा 164 के नाम से जाना जाता था) के तहत मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज किए गए। सूत्रों के मुताबिक, इन बयानों और पुलिस द्वारा जुटाए गए अन्य वैज्ञानिक व तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर ही नरेश पांडे की संलिप्तता पुख्ता हुई, जिसके बाद पुलिस ने उनकी धरपकड़ के लिए जाल बिछाया।
एसएसपी का दो टूक बयान: ‘हमारे पास हैं पुख्ता सबूत, कानून अपना काम करेगा’
इस पूरे घटनाक्रम और फेसबुक लाइव के दौरान पुलिस पर लगे आरोपों पर नैनीताल के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) मंजूनाथ टीसी ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लगाए गए आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि पुलिस पूरी तरह विधिक दायरे में रहकर काम कर रही थी।
एसएसपी मंजूनाथ टीसी ने कहा: “नरेश पांडे के खिलाफ दुष्कर्म, ब्लैकमेलिंग, रंगदारी और जबरन गर्भपात कराने जैसे बेहद गंभीर और संवेदनशील धाराओं में मुकदमा दर्ज है। वह इस केस में नामजद और वांछित आरोपी है। हमारी विवेचना के दौरान आरोपी के खिलाफ कई महत्वपूर्ण और पुख्ता साक्ष्य मिले हैं। इसी आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई और पूछताछ के लिए पुलिस टीम उसके आवास पर गई थी।”
मामले की वर्तमान स्थिति और प्रशासनिक सतर्कता
वर्तमान में भवाली और आसपास के क्षेत्रों में इस घटना को लेकर तनाव और चर्चाओं का बाजार गर्म है। व्यापार मंडल के अध्यक्ष से जुड़े होने के कारण मामले के राजनीतिक और सामाजिक मायने भी निकाले जा रहे हैं।
पुलिस अधिकारियों का साफ कहना है कि किसी भी तरह के दबाव या सोशल मीडिया ड्रामे के आगे पुलिस झुकने वाली नहीं है। मामले की जांच पूरी तरह से निष्पक्ष और पारदर्शिता के साथ की जा रही है। फिलहाल, पुलिस की एक टीम हल्द्वानी अस्पताल में तैनात है जहां आरोपी का इलाज चल रहा है। डॉक्टरों की हरी झंडी मिलते ही और आरोपी की स्थिति सामान्य होते ही पुलिस उसे कोर्ट में पेश कर आगे की रिमांड मांगेगी। स्थानीय जनता और व्यापारियों से भी शांति बनाए रखने की अपील की गई है।
