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The Hill India > Blog > उत्तराखंड > महाशक्तियों की नई जुगलबंदी: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो का बड़ा बयान—’भारत जितना चाहेगा, हम उतनी ऊर्जा बेचने को तैयार’
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महाशक्तियों की नई जुगलबंदी: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो का बड़ा बयान—’भारत जितना चाहेगा, हम उतनी ऊर्जा बेचने को तैयार’

The Hill India News
Last updated: May 22, 2026 2:58 am
The Hill India News
Published: May 22, 2026
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Photo: DD
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वॉशिंगटन/नई दिल्ली: वैश्विक भू-राजनीति (जियोपॉलिटिक्स) और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार के बदलते समीकरणों के बीच अमेरिका ने भारत के साथ अपने रणनीतिक और व्यापारिक संबंधों को एक नए शिखर पर ले जाने के स्पष्ट संकेत दिए हैं। अपने चार दिवसीय द्विपक्षीय भारत दौरे से ठीक पहले, अमेरिका के नवनियुक्त विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने एक ऐतिहासिक बयान देते हुए कहा है कि वाशिंगटन नई दिल्ली की ऊर्जा सुरक्षा को शत-प्रतिशत सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। रुबियो के अनुसार, भारत अपनी बढ़ती अर्थव्यवस्था की जरूरतों के लिए जितना भी ईंधन (तेल और गैस) खरीदना चाहेगा, अमेरिका उसकी आपूर्ति करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

Contents
23 मई से चार शहरों का महादौरा: व्यापार, ऊर्जा और रक्षा पर होगी नजरहोर्मुज जलडमरूमध्य संकट के बीच भारत की ‘ऊर्जा कूटनीति’ की सराहनानई दिल्ली में सजेगा ‘क्वाड’ (QUAD) का मंच, वेनेजुएला पर भी टिकी नजरेंबदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत की बहुआयामी रणनीति

मियामी में आयोजित एक उच्च स्तरीय प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती धमक और दोनों देशों के बीच प्रगाढ़ होते ‘भारत अमेरिका ऊर्जा सहयोग’ को रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस समय अमेरिका रिकॉर्ड स्तर पर कच्चे तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) का उत्पादन और निर्यात कर रहा है, और इस अभूतपूर्व क्षमता का सबसे बड़ा लाभ वे अपने सबसे भरोसेमंद मित्र भारत को देना चाहते हैं।

23 मई से चार शहरों का महादौरा: व्यापार, ऊर्जा और रक्षा पर होगी नजर

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो का यह बयान ऐसे समय में आया है जब वे 23 से 26 मई 2026 तक भारत के एक अत्यंत महत्वपूर्ण और विस्तृत दौरे पर आ रहे हैं। अपने इस चार दिवसीय आधिकारिक प्रवास के दौरान रुबियो भारत के चार प्रमुख और रणनीतिक रूप से अहम शहरों—कोलकाता, आगरा, जयपुर और राजधानी नई दिल्ली का दौरा करेंगे।

“इस हाई-प्रोफाइल यात्रा के एजेंडे में द्विपक्षीय व्यापारिक गतिरोधों को दूर करना, हिंद-प्रशांत (इंडो-पैसिफिक) क्षेत्र में रक्षा सहयोग को मजबूत करना और भारत अमेरिका ऊर्जा सहयोग के पोर्टफोलियो को बहुआयामी बनाना सबसे ऊपर शामिल है। वाशिंगटन की नीति अब यह है कि भारत को मध्य-पूर्व (मिडल ईस्ट) या अन्य तनावग्रस्त क्षेत्रों पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए अमेरिकी ऊर्जा को अपने आयात बास्केट का मुख्य हिस्सा बनाना चाहिए।”

रुबियो ने एक और बड़ा रणनीतिक संकेत देते हुए कहा कि अमेरिका और भारत के बीच वेनेजुएला के तेल को लेकर भी व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने कहा, “हम भारत के साथ अपने हाइड्रोकार्बन और रिन्यूएबल एनर्जी सहयोग को एक नए स्तर पर ले जाना चाहते हैं। इस दिशा में परदे के पीछे लंबे समय से बातचीत चल रही है। हमें पूरा विश्वास है कि वेनेजुएला के तेल आयात को लेकर जो प्रतिबंधात्मक जटिलताएं थीं, उनमें भारत के लिए नए अवसर तलाशे जा सकते हैं।”

होर्मुज जलडमरूमध्य संकट के बीच भारत की ‘ऊर्जा कूटनीति’ की सराहना

अपने संबोधन के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री ने मध्य-पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और विशेष रूप से ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) में जारी संकट का भी जिक्र किया। उन्होंने मुक्त कण्ठ से स्वीकार किया कि इस वैश्विक ऊर्जा संकट और आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) में आए व्यवधानों के बावजूद भारत ने अपनी आंतरिक ऊर्जा सुरक्षा और घरेलू तेल की कीमतों को बेहद परिपक्वता और बेहतर तरीके से संभाला है।

वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत द्वारा तेल आयात के लिए अलग-अलग विकल्पों (डाइवर्सिफिकेशन रणनीति) को तलाशने की सराहना करते हुए रुबियो ने भारत-अमेरिका संबंधों को ’21वीं सदी की सबसे महत्वपूर्ण साझेदारी’ करार दिया। उन्होंने भारत को एक ‘महान सहयोगी और अत्यंत मजबूत रणनीतिक साझेदार’ के रूप में परिभाषित किया।

रुबियो ने भारत की तारीफ में कहा:

“भारत हमारा एक शानदार और अपरिहार्य साझेदार है। तकनीकी नवाचार से लेकर अंतरिक्ष, और रक्षा से लेकर स्वच्छ ऊर्जा तक, हम दोनों लोकतांत्रिक देश साथ मिलकर कई बेहतरीन काम कर रहे हैं। यही कारण है कि मेरा यह भारत दौरा हमारे द्विपक्षीय संबंधों के भविष्य के लिए बेहद अहम है। हमारे पास टेबल पर बातचीत करने के लिए कई ठोस और दूरगामी मुद्दे हैं।”

नई दिल्ली में सजेगा ‘क्वाड’ (QUAD) का मंच, वेनेजुएला पर भी टिकी नजरें

अमेरिकी विदेश मंत्री ने इस बात की भी पुष्टि की कि उनके इस भारत दौरे के दौरान नई दिल्ली में क्वाड (QUAD) देशों के विदेश मंत्रियों की एक बेहद महत्वपूर्ण रणनीतिक बैठक आयोजित होने जा रही है। उन्होंने याद दिलाया कि अमेरिकी विदेश मंत्री का पदभार संभालने के बाद उनकी जो सबसे पहली आधिकारिक बहुपक्षीय बैठक हुई थी, वह क्वाड समूह के साथ ही थी। ऐसे में भारत की मेजबानी में एक बार फिर इस समूह का जुटना रणनीतिक रूप से चीनी आक्रामकता के खिलाफ बड़ा संदेश है। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि इस साल (2026) के अंत में एक और राष्ट्राध्यक्षों के स्तर की पूर्ण क्वाड बैठक आयोजित की जाएगी।

क्वाड और वेनेजुएला कनेक्शन के मुख्य बिंदु:

  • क्षेत्रीय सुरक्षा: क्वाड समूह (भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया) हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक स्वतंत्र, खुले और नियम-आधारित व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।

  • वेनेजुएला की राष्ट्रपति का दौरा: मार्को रुबियो ने एक बड़ा कूटनीतिक खुलासा करते हुए बताया कि वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज भी अगले सप्ताह भारत के दौरे पर आ सकती हैं।

  • त्रिकोणीय समीकरण: रुबियो के अनुसार, यदि वेनेजुएला की राष्ट्रपति भारत आती हैं, तो इससे भारत और वेनेजुएला के बीच ऊर्जा सहयोग के नए और अप्रत्याशित रास्ते खुलेंगे, जिसे अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील के बाद वाशिंगटन का भी परोक्ष समर्थन प्राप्त होगा।

बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत की बहुआयामी रणनीति

अमेरिकी विदेश मंत्री का यह खुला प्रस्ताव और भारत के प्रति झुकाव ऐसे समय में सामने आया है जब भारत अपनी तेजी से बढ़ती औद्योगिक और घरेलू ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए किसी एक क्षेत्र पर निर्भर न रहकर रूस, अमेरिका, अफ्रीका और लैटिन अमेरिकी देशों से तेल और गैस आयात बढ़ाने की ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ (Strategic Autonomy) की नीति पर काम कर रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि रुबियो के इस दौरे के बाद भारत अमेरिका ऊर्जा सहयोग महज़ एक क्रेता-विक्रेता (बायर्स-सेलर्स) के रिश्ते से आगे बढ़कर रणनीतिक भंडारण (Strategic Reserves) और संयुक्त रिफाइनिंग परियोजनाओं तक विस्तृत हो सकता है। अब पूरी दुनिया की नजरें आगामी 23 मई से शुरू होने वाले रुबियो के भारत दौरे और नई दिल्ली में होने वाले समझौतों पर टिक गई हैं।

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