
अल्मोड़ा: कहते हैं कि जुर्म की बुनियाद चाहे कितनी भी शातिर सोच पर क्यों न रखी जाए, कानून के लंबे हाथ देर-सबेर मुजरिम के गिरेबां तक पहुंच ही जाते हैं। उत्तराखंड के सांस्कृतिक दिल कहे जाने वाले अल्मोड़ा जिला मुख्यालय से एक ऐसा ही बेहद चौंकाने वाला और फिल्मी अंदाज का मामला सामने आया है, जिसने पूरे प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारे में हड़कंप मचा दिया है। फर्जी दस्तावेजों के दम पर राष्ट्रीयकृत बैंक को लाखों रुपये की चपत लगाने के इस खेल का जब पर्दाफाश हुआ, तो पैर तले जमीन खिसकने जैसी स्थिति पैदा हो गई। इस पूरे हाई-प्रोफाइल ‘अल्मोड़ा बैंक लोन फर्जीवाड़ा’ का सबसे हैरान कर देने वाला पहलू यह है कि जो शख्स खुद को पीड़ित और पाक-साफ बताकर पुलिस के पास न्याय की गुहार लगाने पहुंचा था, तफ्तीश की आंच बढ़ने पर वही इस पूरी बिसात का असली मास्टरमाइंड निकला।
दरअसल, यह पूरा मामला किसी रैंडम क्राइम का हिस्सा नहीं, बल्कि एक बेहद सोची-समझी और सलीके से बुनी गई वित्तीय साजिश थी। शातिरों ने इतनी सफाई से दस्तावेजों में हेरफेर किया था कि एक लंबे समय तक संबंधित बैंक प्रबंधन को भी इस महाफर्जीवाड़े की भनक तक नहीं लगी। लेकिन, जब पाप का घड़ा भरा और इस वित्तीय घोटाले की पोल खुलने का वक्त नजदीक आया, तो खुद को कानून की सख्त नजरों से बचाने के लिए भंडारी गांव (जैचोली, सोमेश्वर) निवासी और कांग्रेस सेवादल के जिलाध्यक्ष दिनेश नेगी ने एक बेहद शातिर चाल चली। उसे लगा कि पहले खुद ही शिकायतकर्ता बनकर वह पुलिस को गुमराह कर देगा और खुद को इस कानूनी पचड़े से सुरक्षित बाहर निकाल लेगा।
एक झूठी तहरीर और पुलिस को उलझाने की नाकाम कोशिश
पटकथा के मुताबिक, मुख्य सूत्रधार दिनेश नेगी ने बीते साल 19 सितंबर 2025 को कोतवाली अल्मोड़ा में खुद उपस्थित होकर एक लिखित तहरीर सौंपी। इस तहरीर में उसने दो रसूखदार लोगों—ग्राम बग्वाली पोखर (द्वाराहाट) निवासी सुनील सिंह (पुत्र चन्दन सिंह) और लोअर माल रोड निवासी धीरेन्द्र सिंह गैलाकोटी (पुत्र राजेन्द्र सिंह गैलाकोटी) पर बेहद गंभीर आरोप मढ़े। नेगी का दावा था कि इन दोनों व्यक्तियों ने उसकी व्यावसायिक फर्म ‘जय गोलू ट्रेडर्स’ के नाम का दुरुपयोग किया है। शिकायत में कहा गया कि आरोपियों ने फर्म के नाम से फर्जी कोटेशन बिल, प्रयोगशाला (लैब) का कूट रचित प्रमाण पत्र और अन्य आवश्यक दस्तावेज तैयार किए और यूनियन बैंक की नगर शाखा के प्रबंधकों की आंखों में धूल झोंककर लाखों रुपये का लोन डकार लिया।
“शुरुआती शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामले को एक सामान्य वित्तीय धोखाधड़ी मानते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) के तहत मुकदमा पंजीकृत कर लिया और मामले की फाइल जांच विंग को सौंप दी।”
धारानौला चौकी प्रभारी की पैनी नजर: ऐसे खुला राज
मुकदमा दर्ज होने के बाद जब धारानौला चौकी प्रभारी और वरिष्ठ उपनिरीक्षक (SI) आनन्द बल्लभ कश्मीरा ने इस संवेदनशील मामले की विवेचना अपने हाथों में ली, तो कड़ियां बिखरने लगीं। पुलिस की तफ्तीश जैसे-जैसे आगे बढ़ी, इस अल्मोड़ा बैंक लोन फर्जीवाड़ा की पूरी कहानी ही पूरी तरह पलट गई। जांच में जो कड़वा सच सामने आया, उसने जांच अधिकारियों के भी होश उड़ा दिए।
पुलिस के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इस गिरोह की कार्यप्रणाली बेहद चौंकाने वाली थी:
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असली लैब से डेटा की चोरी: आरोपियों ने अल्मोड़ा नगर के ही एक प्रतिष्ठित व्यक्ति की असली प्रयोगशाला (लैब) का चयन किया। वहां जाकर उन्होंने बेहद शातिराना तरीके से और बिना किसी की नजर में आए, वहां के असली और वैध प्रमाणपत्रों की अपने मोबाइल से चोरी-छिपे तस्वीरें खींचीं।
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डिजिटल हेरफेर (कूटरचना): इन तस्वीरों को हासिल करने के बाद, मूल लैब स्वामी का नाम डिजिटल सॉफ्टवेयर के जरिए पूरी तरह साफ कर दिया गया। उस खाली जगह पर कूटरचित और फर्जी तरीके से सह-आरोपी सुनील सिंह का नाम दर्ज कर दिया गया।
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बैंक में धोखाधड़ी: इस पूरी तरह से जाली और फर्जी सर्टिफिकेट को बैंक के सामने इस तरह पेश किया गया जैसे यह शत-प्रतिशत असली हो। बैंक अधिकारी इस जालसाजी को भांप नहीं पाए और मई 2022 में लाखों रुपये का लोन धड़ल्ले से पास करा लिया गया।
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दस्तावेजों का अंबार: केवल लैब सर्टिफिकेट ही नहीं, बल्कि लोन फाइल को मजबूत करने के लिए तैयार किए गए रेंट एग्रीमेंट (किरायानामा) में भी मकान मालिक के फर्जी हस्ताक्षर किए गए थे और कागजों पर गवाह भी पूरी तरह फर्जी खड़े किए गए थे।
पीड़ित से मुख्य आरोपी बना कांग्रेस नेता: बढ़ाई गईं धाराएं
अल्मोड़ा पुलिस की टीम ने जब बैंक के लेन-देन, कॉल डिटेल्स और तकनीकी साक्ष्यों की कड़ियों को एक साथ जोड़ा, तो यह कड़वा सच सामने आया कि शिकायतकर्ता और कांग्रेस नेता दिनेश नेगी इस पूरे खेल से अलग नहीं था, बल्कि वह इस अपराध में बराबर का हिस्सेदार, वित्तीय लाभ पाने वाला और इस पूरी साजिश का मुख्य सूत्रधार था। उसने केवल अपने साथियों को फंसाने और खुद को कानूनन बेदाग साबित करने के लिए ही यह झूठा मुकदमा दर्ज कराया था।
जैसे ही यह अकाट्य सच फाइलों में दर्ज हुआ, पुलिस ने इस मुकदमे का दायरा बढ़ाते हुए इसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की अत्यंत गंभीर धाराएं 61(2) [आपराधिक साजिश], 336, 338 और 340 [दस्तावेजों की कूटरचना और धोखाधड़ी] की भारी बढ़ोतरी कर दी।
हाईकोर्ट से लगा बड़ा झटका और सलाखों के पीछे पहुंचे ‘सफेदपोश’
जब जमीनी स्तर पर पुलिस का शिकंजा कसने लगा और इस अल्मोड़ा बैंक लोन फर्जीवाड़ा का भंडाफोड़ सार्वजनिक हो गया, तो अन्य सह-आरोपियों सुनील सिंह और धीरेंद्र सिंह गैलाकोटी के पैरों तले जमीन खिसक गई। पुलिस की तत्काल गिरफ्तारी से बचने के लिए दोनों ने आनन-फानन में उत्तराखंड उच्च न्यायालय (नैनीताल हाईकोर्ट) की शरण ली और अग्रिम/अंतरिम जमानत के लिए अर्जी दाखिल की। हालांकि, मामले की गंभीरता और पुलिस द्वारा पेश किए गए पुख्ता सबूतों को देखते हुए माननीय न्यायालय ने दोनों ही आरोपियों को बड़ा झटका देते हुए उनकी याचिका को सिरे से खारिज कर दिया।
न्यायालय से हरी झंडी मिलते ही अल्मोड़ा पुलिस की विशेष टीम ने दबिश दी और 19 मई को इस पूरे सिंडिकेट को नेस्तनाबूद कर दिया। पुलिस ने मुख्य साजिशकर्ता कांग्रेस नेता दिनेश नेगी, धीरेंद्र सिंह गैलाकोटी और सुनील सिंह तीनों को गिरफ्तार कर लिया और कानूनी औपचारिकताओं के बाद जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया है।
अपराध और रसूख का गठजोड़: आरोपियों का प्रोफाइल
इस पूरे घटनाक्रम ने इस बात को एक बार फिर साबित किया है कि सफेदपोश अपराधी किस तरह सिस्टम में सेंध लगाते हैं। गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों का अपना-अपना मजबूत सामाजिक और राजनीतिक रसूख रहा है, जिसने क्षेत्र के लोगों को स्तब्ध कर दिया है:
| आरोपी का नाम | सामाजिक/राजनीतिक पृष्ठभूमि और पूर्व पद |
| दिनेश नेगी | जिलाध्यक्ष, कांग्रेस सेवादल (मामले का मुख्य शिकायतकर्ता व मास्टरमाइंड) |
| धीरेंद्र सिंह गैलाकोटी | पूर्व जिलाध्यक्ष, ग्राम प्रधान संगठन (क्षेत्रीय राजनीति में मजबूत पकड़) |
| सुनील सिंह | पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष, एसएसजे (SSJ) परिसर (युवा राजनीति का जाना-माना चेहरा) |
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बैंकिंग और वित्तीय संस्थानों के साथ धोखाधड़ी करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे उसका कद कितना भी बड़ा क्यों न हो। इस मामले में बैंक स्तर पर भी किसी की मिलीभगत थी या नहीं, इसकी भी आंतरिक जांच की जा रही है। पुलिस की इस त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई की स्थानीय जनता और जागरूक नागरिकों द्वारा जमकर सराहना की जा रही है।



