
तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा और ऐतिहासिक घटनाक्रम देखने को मिला है। मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने गुरुवार को अपने मंत्रिमंडल का बड़ा विस्तार करते हुए 23 विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई। इनमें उनकी पार्टी टीवीके (TVK) के 21 विधायक और सहयोगी कांग्रेस के 2 विधायक शामिल हैं। इस विस्तार के साथ विजय सरकार में मंत्रियों की संख्या बढ़कर 32 हो गई है। हालांकि सरकार को समर्थन दे रहे महत्वपूर्ण सहयोगी दल इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) और विदुथलाई चिरुथैगल काची (VCK) को फिलहाल मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली है।
तमिलनाडु की राजनीति में यह घटनाक्रम इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि अभिनेता से नेता बने विजय ने सत्ता संभालने के बाद तेजी से अपने राजनीतिक गठबंधन को मजबूत करने की कोशिश शुरू कर दी है। सूत्रों के अनुसार IUML और VCK दोनों दलों को एक-एक कैबिनेट पद देने पर सहमति बन चुकी है, लेकिन दोनों पार्टियों ने अभी तक अपने मंत्रियों के नाम तय नहीं किए हैं। बताया जा रहा है कि आने वाले दिनों में इन दलों को भी सरकार में शामिल किया जाएगा।
मुख्यमंत्री विजय ने इससे पहले 10 मई को नौ मंत्रियों के साथ शपथ ली थी। तमिलनाडु सरकार में कुल 35 मंत्री बनाए जा सकते हैं। अब 23 नए चेहरों को शामिल किए जाने के बाद केवल तीन मंत्री पद खाली बचे हैं, जिनमें सहयोगी दलों को जगह दिए जाने की संभावना है।
टीवीके नेतृत्व ने VCK, CPI, CPM और IUML जैसी पार्टियों को, जो फिलहाल सरकार को बाहरी समर्थन दे रही हैं, औपचारिक रूप से सरकार में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। राज्य के लोक निर्माण और खेल मंत्री आदव अर्जुन ने कहा कि मुख्यमंत्री चाहते हैं कि VCK प्रमुख थोल थिरुमावलवन भी सरकार में शामिल हों, ताकि गठबंधन और मजबूत हो सके।
शपथ लेने वाले मंत्रियों में श्रीनाथ, कमाली एस, सी विजयलक्ष्मी, आरवी रंजीतकुमार, विनोद, राजीव, बी राजकुमार, वी गांधीराज, मथन राजा पी, जगदेश्वरी के, राजेश कुमार एस, एम विजय बालाजी, लोगेश तमिलसेल्वन डी, विजय तमिलन पार्थिबन ए, रमेश, पी विश्वनाथन, कुमार आर, थेन्नारासु के, वी संपत कुमार, मोहम्मद फरवास जे, डी सरथकुमार, एन मैरी विल्सन और विग्नेश जैसे नाम शामिल हैं।
इस विस्तार की सबसे बड़ी राजनीतिक खासियत कांग्रेस की वापसी मानी जा रही है। विजय सरकार में शामिल होने वाले दो कांग्रेस विधायक राजेश कुमार और पी. विश्वनाथन हैं। लगभग छह दशकों बाद ऐसा हुआ है जब कांग्रेस तमिलनाडु सरकार का हिस्सा बनी है। इससे पहले कांग्रेस ने राज्य में एम. भक्तवत्सलम के नेतृत्व में सरकार चलाई थी, जिसका कार्यकाल मार्च 1967 में समाप्त हुआ था।
1967 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को सी॰एन॰ अन्नादुरै के नेतृत्व वाली डीएमके से हार का सामना करना पड़ा था। उसी चुनाव के बाद तमिलनाडु की राजनीति में द्रविड़ दलों का प्रभाव लगातार बढ़ता गया और कांग्रेस सत्ता से दूर होती चली गई। अब विजय सरकार में शामिल होकर कांग्रेस ने लंबे अंतराल के बाद सत्ता में वापसी की है, जिसे राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विजय अपनी सरकार को व्यापक सामाजिक और राजनीतिक समर्थन देने के लिए गठबंधन की राजनीति को प्राथमिकता दे रहे हैं। खासकर दलित, अल्पसंख्यक और वामपंथी दलों को साथ लाकर वे एक मजबूत राजनीतिक समीकरण बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
हालांकि IUML और VCK को अभी मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने से कुछ सवाल भी उठ रहे हैं। दोनों दल सरकार के बहुमत में अहम भूमिका निभा रहे हैं और उनके दो-दो विधायक सत्ता संतुलन के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में उनका सरकार में शामिल होना लगभग तय माना जा रहा है।
विजय के नेतृत्व वाली सरकार फिलहाल अपने शुरुआती दौर में है और जनता की नजर अब इस बात पर रहेगी कि यह नई कैबिनेट राज्य में प्रशासन, विकास और राजनीतिक स्थिरता को किस दिशा में ले जाती है। अभिनेता से नेता बने विजय के लिए यह राजनीतिक सफर अब एक बड़े नेतृत्व परीक्षण में बदलता दिखाई दे रहा है।



