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West Bengal Phase 2 Voting: बंगाल की 142 सीटों पर वोटिंग जारी, भवानीपुर की ‘जंग’ पर टिकी देश की निगाहें

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की सत्ता का सिंहासन किसके पास जाएगा, इसकी पटकथा आज लिखी जा रही है। विधानसभा चुनाव के दूसरे और सबसे निर्णायक चरण के लिए आज मतदान की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। सुबह से ही मतदान केंद्रों के बाहर मतदाताओं की मील लंबी कतारें इस बात का गवाह हैं कि बंगाल की जनता अपनी अगली सरकार चुनने के लिए कितनी उत्साहित है। West Bengal Phase 2 Voting के तहत आज कोलकाता समेत छह महत्वपूर्ण जिलों की 142 सीटों पर उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम (EVM) में कैद हो रही है।

142 सीटें और 3.21 करोड़ मतदाता: आंकड़ों में दूसरा चरण

चुनाव आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, यह चरण आकार और प्रभाव दोनों ही दृष्टि से अत्यंत विशाल है। राज्य के छह प्रमुख जिलों—नदिया, पूर्व बर्धमान, हुगली, दक्षिण 24 परगना, उत्तर 24 परगना, हावड़ा और राजधानी कोलकाता में आज चुनावी शोर थमा है और जनता का फैसला शुरू हुआ है।

  • पंजीकृत मतदाता: कुल 3,21,73,837 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं।

  • लिंग अनुपात: इसमें 1,64,35,627 पुरुष और 1,57,37,418 महिला मतदाता शामिल हैं, जबकि 792 थर्ड जेंडर मतदाता भी अपनी भागीदारी दर्ज करा रहे हैं।

  • उम्मीदवार: कुल 1,448 प्रत्याशी मैदान में हैं, जिनके भाग्य का फैसला आज होगा।

भवानीपुर: क्या दोहराया जाएगा नंदीग्राम का इतिहास?

इस दूसरे चरण की सबसे ‘हॉट सीट’ भवानीपुर बनी हुई है। यहाँ मुकाबला महज दो उम्मीदवारों के बीच नहीं, बल्कि दो विचारधाराओं और साख के बीच है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एक बार फिर अपने पारंपरिक गढ़ भवानीपुर से मैदान में हैं, लेकिन उनके सामने चुनौती पेश कर रहे हैं सुवेंदु अधिकारी।

राजनीतिक गलियारों में इस मुकाबले की तुलना 2021 के नंदीग्राम चुनाव से की जा रही है, जहाँ सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को एक कड़े मुकाबले में शिकस्त दी थी। भवानीपुर में सुवेंदु की मौजूदगी ने इस सीट को राष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया है। क्या ममता अपनी इस सीट को बचा पाएंगी या सुवेंदु एक बार फिर ‘जायंट किलर’ साबित होंगे, यह इस चुनाव का सबसे बड़ा सवाल है।

मतदान केंद्रों पर सुरक्षा का ‘लोहे का कवच’

पिछले चरणों में हुई छिटपुट हिंसा और बंगाल के चुनावी इतिहास को देखते हुए चुनाव आयोग ने सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए हैं। शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा का एक त्रिकोणीय घेरा तैयार किया गया है:

  1. केंद्रीय बल: सुरक्षा की कमान संभालने के लिए केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की रिकॉर्ड 2,407 कंपनियां तैनात की गई हैं।

  2. स्थानीय पुलिस: पश्चिम बंगाल पुलिस और कोलकाता पुलिस के हजारों जवान चप्पे-चप्पे पर निगरानी रख रहे हैं।

  3. तकनीकी निगरानी: चुनाव आयोग ने बताया कि सभी 41,001 मतदान केंद्रों (39,301 मुख्य और 1,700 सहायक) पर वेबकास्टिंग की व्यवस्था की गई है, जिससे दिल्ली और कोलकाता स्थित नियंत्रण कक्षों से सीधे नजर रखी जा रही है।

क्या टूटेगा पहले चरण का रिकॉर्ड?

West Bengal Phase 2 Voting में जिस तरह से सुबह से ही लोग घरों से बाहर निकल रहे हैं, उससे यह कयास लगाए जा रहे हैं कि इस बार मतदान प्रतिशत के पुराने सभी रिकॉर्ड ध्वस्त हो सकते हैं। गौरतलब है कि पहले चरण में 93.19 प्रतिशत की बंपर वोटिंग दर्ज की गई थी। ग्रामीण इलाकों के साथ-साथ शहरी क्षेत्रों जैसे कोलकाता और हावड़ा में भी युवाओं और बुजुर्गों में मतदान को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है।

जमीनी मुद्दे: विकास, पहचान और रोजगार

इन 142 सीटों पर मुख्य मुकाबला तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच ही नजर आ रहा है। जहाँ सत्ताधारी दल ‘लक्ष्मी भंडार’ और ‘स्वस्थ्य साथी’ जैसी कल्याणकारी योजनाओं के दम पर हैट्रिक लगाने की उम्मीद में है, वहीं विपक्ष ‘भ्रष्टाचार’ और ‘रोजगार’ के मुद्दों पर सरकार को घेर रहा है। उत्तर और दक्षिण 24 परगना जैसे जिलों में मतुआ समुदाय और अल्पसंख्यक वोटर्स की भूमिका भी निर्णायक साबित होने वाली है।

मतगणना और भविष्य का फैसला

आज की वोटिंग के साथ ही बंगाल की सत्ता की चाबी किसके पास होगी, इसकी आधी तस्वीर साफ हो जाएगी। 142 सीटों का यह विशाल ब्लॉक किसी भी पार्टी को बहुमत के करीब ले जाने या सत्ता से दूर करने की क्षमता रखता है। इन सभी सीटों समेत पूरे बंगाल चुनाव के परिणाम 4 मई को घोषित किए जाएंगे।

पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र की जड़ें कितनी गहरी हैं, यह आज की लंबी कतारें बता रही हैं। सुरक्षा बलों की भारी मौजूदगी के बीच जनता का यह निडर मतदान एक स्वस्थ लोकतंत्र की निशानी है। भवानीपुर से लेकर बर्धमान की गलियों तक, आज सिर्फ एक ही गूंज है—”अगली सरकार किसकी?” 4 मई को जब वोटों की गिनती होगी, तब पता चलेगा कि जनता ने ममता बनर्जी के ‘विकास’ को चुना है या सुवेंदु अधिकारी के ‘परिवर्तन’ के वादे को।

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