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Uttarakhand: वर्दी घोटाले पर सख्त कार्रवाई, DIG स्तर के अधिकारी निलंबित, CM धामी का भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस से कोई समझौता नहीं

The Hill India News
Last updated: January 24, 2026 6:00 am
The Hill India News
Published: January 24, 2026
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देहरादून। उत्तराखंड में सरकारी खरीद प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। होमगार्ड्स एवं नागरिक सुरक्षा विभाग में वर्दी सामग्री की खरीद से जुड़े बहुचर्चित घोटाले में संलिप्त पाए जाने पर निदेशक होमगार्ड्स (डिप्टी कमांडेंट/डीआईजी स्तर) अमिताभ श्रीवास्तव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और गहन जांच के लिए संयुक्त जांच समिति गठित करने के निर्देश भी जारी किए हैं।

Contents
महानिदेशक की रिपोर्ट से खुला मामलासंयुक्त जांच समिति गठितमुख्यमंत्री का सख्त संदेशप्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चापहले भी हो चुकी हैं सख्त कार्रवाइयांआगे की राह

यह मामला वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान होमगार्ड्स के लिए वर्दी सामग्री की खरीद प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है। शुरुआती जांच में टेंडर प्रक्रिया में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं, नियमों के उल्लंघन और पारदर्शिता के अभाव के आरोप सामने आए थे। शासन स्तर पर पहुंची रिपोर्ट में संकेत मिले कि वर्दी सामग्री की खरीद में निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया और संभावित रूप से सरकारी धन को नुकसान पहुंचाया गया।

महानिदेशक की रिपोर्ट से खुला मामला

महानिदेशक, होमगार्ड्स एवं नागरिक सुरक्षा, देहरादून द्वारा शासन को भेजी गई विस्तृत रिपोर्ट में टेंडर प्रक्रिया की खामियों को रेखांकित किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, खरीद प्रक्रिया में न तो प्रतिस्पर्धात्मक निविदाओं की शर्तों का पूरी तरह पालन हुआ और न ही वित्तीय मानकों की समुचित जांच की गई। कुछ मामलों में दरों के निर्धारण, आपूर्ति की गुणवत्ता और अनुमोदन प्रक्रिया को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हुए।

महानिदेशक की इस रिपोर्ट और संस्तुति के आधार पर मुख्यमंत्री ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित अधिकारी को निलंबित करने का निर्णय लिया। साथ ही, यह भी स्पष्ट किया कि जांच पूरी होने तक किसी भी स्तर पर दबाव या प्रभाव स्वीकार नहीं किया जाएगा।

संयुक्त जांच समिति गठित

मुख्यमंत्री के निर्देश पर गठित की जा रही संयुक्त जांच समिति में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया जाएगा, ताकि जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरी हो सके। समिति को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वह टेंडर प्रक्रिया से जुड़े सभी दस्तावेजों, भुगतान विवरण, आपूर्ति से संबंधित रिकॉर्ड और निर्णय प्रक्रिया की गहराई से जांच करे।

जांच समिति यह भी देखेगी कि क्या इस घोटाले में अन्य अधिकारी या कर्मचारी भी संलिप्त हैं और क्या किसी बाहरी एजेंसी या आपूर्तिकर्ता ने नियमों का दुरुपयोग किया। दोष सिद्ध होने की स्थिति में संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ न केवल विभागीय कार्रवाई, बल्कि कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।

मुख्यमंत्री का सख्त संदेश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस कार्रवाई के साथ ही स्पष्ट शब्दों में कहा कि राज्य सरकार भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति पर पूरी मजबूती से काम कर रही है। उन्होंने कहा, “सरकारी धन जनता की गाढ़ी कमाई है। इसमें किसी भी तरह की अनियमितता या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। चाहे अधिकारी कितना ही बड़ा क्यों न हो, दोषी पाए जाने पर उसके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उत्तराखंड सरकार प्रशासन में पारदर्शिता, ईमानदारी और जवाबदेही को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। हाल के वर्षों में कई मामलों में उच्च पदस्थ अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई इसका प्रमाण है कि सरकार केवल बयानबाजी नहीं, बल्कि ठोस कदम उठा रही है।

प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा

DIG स्तर के अधिकारी के निलंबन के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में इस फैसले की व्यापक चर्चा है। इसे सरकार की सख्त कार्यशैली और भ्रष्टाचार के खिलाफ स्पष्ट संदेश के रूप में देखा जा रहा है। जानकारों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई से न केवल प्रशासनिक तंत्र में अनुशासन बढ़ेगा, बल्कि भविष्य में सरकारी खरीद प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने में भी मदद मिलेगी।

विपक्षी दलों की ओर से भी इस मामले पर नजर रखी जा रही है। हालांकि, सरकार का कहना है कि जांच पूरी होने तक किसी भी तरह के राजनीतिक निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा और सभी तथ्यों के सामने आने के बाद ही अंतिम कार्रवाई की जाएगी।

पहले भी हो चुकी हैं सख्त कार्रवाइयां

यह पहला मौका नहीं है जब मुख्यमंत्री धामी ने भ्रष्टाचार के मामलों में उच्च स्तर के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की हो। इससे पहले भी विभिन्न विभागों में अनियमितताओं के आरोपों पर अधिकारियों को निलंबित किया गया है और कई मामलों में विजिलेंस तथा जांच एजेंसियों को सक्रिय किया गया है।

सरकार का दावा है कि इन कार्रवाइयों का सकारात्मक असर जमीन पर दिखाई दे रहा है और प्रशासनिक तंत्र में पारदर्शिता को लेकर जागरूकता बढ़ी है।

आगे की राह

अब सबकी नजर संयुक्त जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी है। यह रिपोर्ट तय करेगी कि वर्दी सामग्री खरीद घोटाले में किस स्तर तक लापरवाही या भ्रष्टाचार हुआ और इसमें कौन-कौन जिम्मेदार हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि जांच में दोषी पाए जाने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि उत्तराखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार का रुख सख्त है और ‘जीरो टॉलरेंस ऑन करप्शन’ केवल नारा नहीं, बल्कि कार्रवाई में भी दिख रहा है।

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