हैदराबाद। भारतीय सिनेमा जगत से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। अपनी दमदार आवाज, प्रभावशाली स्क्रीन प्रेजेंस और यादगार खलनायक किरदारों के लिए मशहूर वरिष्ठ अभिनेता प्रदीप रावत का कैंसर से लंबी लड़ाई के बाद 74 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके निधन की खबर सामने आते ही बॉलीवुड, टॉलीवुड और पूरे फिल्म जगत में शोक की लहर दौड़ गई। प्रशंसकों के साथ-साथ फिल्म इंडस्ट्री के कई बड़े कलाकारों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके साथ बिताए पलों को याद किया।
प्रदीप रावत उन चुनिंदा कलाकारों में शामिल थे जिन्होंने हिंदी सिनेमा के साथ-साथ तेलुगु, तमिल, कन्नड़ और मलयालम फिल्मों में भी अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने अपने तीन दशक से अधिक लंबे करियर में ऐसे कई किरदार निभाए, जो आज भी दर्शकों के दिलों में जीवित हैं। विशेष रूप से ‘गजनी’ में निभाया गया उनका खलनायक का किरदार भारतीय सिनेमा के सबसे यादगार विलेनों में गिना जाता है।
एक महीने तक अस्पताल में चले इलाज के बाद ली अंतिम सांस
प्रदीप रावत के मैनेजर सिद्धार्थ आर. तिवारी के अनुसार, अभिनेता पिछले कुछ समय से कैंसर से जूझ रहे थे। उनका इलाज मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में लगभग एक महीने तक चला। स्वास्थ्य में अपेक्षित सुधार न होने पर उन्हें बाद में भिवंडी स्थित कैंसर अस्पताल में स्थानांतरित किया गया, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली।
उनके परिवार में पत्नी कल्याणी रावत और बेटे विक्रमादित्य रावत हैं। परिवार इस कठिन समय में गहरे सदमे में है। अंतिम संस्कार से जुड़ी औपचारिक जानकारी परिवार की ओर से जारी की जानी है।
फिल्म इंडस्ट्री में छाया मातम
प्रदीप रावत के निधन की खबर मिलते ही फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर फैल गई। सोशल मीडिया पर अभिनेता, निर्देशक, निर्माता और लाखों प्रशंसकों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।
‘लगान’ में उनके सह-कलाकार और करीबी मित्र यशपाल शर्मा ने भावुक संदेश साझा करते हुए लिखा कि प्रदीप रावत केवल एक शानदार अभिनेता ही नहीं, बल्कि बेहद सरल और स्नेही इंसान भी थे। उन्होंने लिखा कि उनकी कमी हमेशा महसूस की जाएगी।
वरिष्ठ अभिनेता गजेंद्र चौहान ने भी शोक व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने ‘महाभारत’ में अश्वत्थामा के रूप में प्रदीप रावत के साथ काम किया था और उनकी अभिनय प्रतिभा हमेशा याद रखी जाएगी।
वहीं, ऑल इंडियन सिने वर्कर्स एसोसिएशन (AICWA) ने भी आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि प्रदीप रावत की दमदार स्क्रीन उपस्थिति और उनके यादगार अभिनय को भारतीय सिनेमा कभी नहीं भूल पाएगा।
टीवी से शुरू हुआ अभिनय का सफर
बहुत कम लोग जानते हैं कि प्रदीप रावत ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत फिल्मों से नहीं, बल्कि टेलीविजन से की थी। बी.आर. चोपड़ा के ऐतिहासिक धारावाहिक ‘महाभारत’ में उन्होंने अश्वत्थामा का किरदार निभाया था।
इस भूमिका ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई। उनके गंभीर व्यक्तित्व और प्रभावशाली अभिनय ने दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींचा और यहीं से उनके फिल्मी सफर का रास्ता खुल गया।
‘मेरी जंग’ से बॉलीवुड में रखा कदम
प्रदीप रावत ने वर्ष 1985 में फिल्म ‘मेरी जंग’ से हिंदी फिल्मों में डेब्यू किया। इस फिल्म में उन्होंने पुलिस इंस्पेक्टर की भूमिका निभाई। इसके बाद उन्होंने ‘समुंदर’, ‘अग्निपथ’, ‘सरफरोश’ जैसी फिल्मों में अपने अभिनय का लोहा मनवाया।
हालांकि शुरुआती दौर में उन्होंने कई तरह के किरदार निभाए, लेकिन धीरे-धीरे उनकी पहचान एक मजबूत और प्रभावशाली विलेन के रूप में बनने लगी। उनकी आवाज, व्यक्तित्व और अभिनय शैली उन्हें दूसरे कलाकारों से अलग बनाती थी।
आमिर खान के साथ बनी यादगार जोड़ी
प्रदीप रावत और आमिर खान की जोड़ी कई फिल्मों में देखने को मिली। वर्ष 1999 में रिलीज हुई फिल्म ‘सरफरोश’ में उन्होंने सुल्तान का किरदार निभाया, जिसे दर्शकों ने खूब पसंद किया।
इसके बाद 2001 में आई ऑस्कर नामांकित फिल्म ‘लगान’ में उन्होंने देवा सिंह सोढ़ी का किरदार निभाया। फिल्म में उनका अभिनय काफी सराहा गया और वे कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा बने।
लेकिन जिस फिल्म ने उन्हें भारतीय सिनेमा में अमर कर दिया, वह थी 2008 की ब्लॉकबस्टर ‘गजनी’। इस फिल्म में उन्होंने गजनी धर्मात्मा का दमदार किरदार निभाया। उनके खतरनाक अंदाज, संवाद अदायगी और प्रभावशाली अभिनय ने उन्हें भारतीय सिनेमा के सबसे चर्चित खलनायकों की सूची में शामिल कर दिया।
सिर्फ बॉलीवुड नहीं, साउथ सिनेमा में भी थे सुपरस्टार
प्रदीप रावत का अभिनय केवल हिंदी फिल्मों तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने तेलुगु, तमिल, कन्नड़ और मलयालम फिल्मों में भी शानदार काम किया।
उनकी लोकप्रिय फिल्मों में ‘सई’, ‘नायक’, ‘स्टालिन’, ‘वीरम’, ‘1: नेनोक्कडाइन’, ‘लोक्यम’, ‘नेनु शैलजा’, ‘सर्रेनोडु’, ‘नेने राजू नेने मंत्री’, ‘आयिरथिल इरुवर’, ‘मार्केट राजा एमबीबीएस’ और ‘मिस मैच’ जैसी कई सफल फिल्में शामिल हैं।
साउथ फिल्म इंडस्ट्री में भी उन्हें उतना ही सम्मान मिला, जितना हिंदी सिनेमा में। वहां भी उन्होंने कई यादगार नकारात्मक किरदार निभाए और दर्शकों के बीच खास लोकप्रियता हासिल की।
आखिरी फिल्म में भी छोड़ी गहरी छाप
प्रदीप रावत अपने अंतिम समय तक अभिनय से जुड़े रहे। उनकी हालिया फिल्मों में विक्की कौशल अभिनीत ‘छावा’ भी शामिल है, जिसमें उन्होंने येसाजी कंक का किरदार निभाया था।
यह दर्शाता है कि उम्र और बीमारी के बावजूद उनका अभिनय के प्रति समर्पण कभी कम नहीं हुआ। वे आखिरी समय तक अपने काम के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध रहे।
अभिनय के साथ इंसानियत के लिए भी याद किए जाएंगे
फिल्म इंडस्ट्री के कई कलाकारों ने कहा कि प्रदीप रावत जितने शानदार अभिनेता थे, उतने ही विनम्र और सहयोगी इंसान भी थे। नए कलाकारों की मदद करना, सेट पर सकारात्मक माहौल बनाए रखना और सभी के साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार करना उनकी सबसे बड़ी पहचान थी।
यही कारण है कि उनके निधन पर केवल प्रशंसक ही नहीं, बल्कि पूरी फिल्म इंडस्ट्री भावुक नजर आई।
भारतीय सिनेमा ने खोया एक दमदार कलाकार
प्रदीप रावत का निधन भारतीय सिनेमा के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। उन्होंने अपने अभिनय से यह साबित किया कि किसी कलाकार की पहचान केवल मुख्य भूमिका से नहीं, बल्कि उसके प्रभावशाली अभिनय से बनती है। उनके निभाए गए किरदार आने वाली पीढ़ियों के लिए अभिनय की एक मिसाल बने रहेंगे।
