By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
The Hill IndiaThe Hill IndiaThe Hill India
Notification Show More
Font ResizerAa
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Reading: SBI लॉकर में 50 लाख के जेवर गायब! 2003 से कटता रहा किराया, फिर भी लॉकर में नहीं मिला सामान; बिना चाबी खुला ताला तो उठे बड़े सवाल
Share
Font ResizerAa
The Hill IndiaThe Hill India
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Search
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Have an existing account? Sign In
Follow US
The Hill India > Blog > क्राइम > SBI लॉकर में 50 लाख के जेवर गायब! 2003 से कटता रहा किराया, फिर भी लॉकर में नहीं मिला सामान; बिना चाबी खुला ताला तो उठे बड़े सवाल
क्राइमदेशफीचर्ड

SBI लॉकर में 50 लाख के जेवर गायब! 2003 से कटता रहा किराया, फिर भी लॉकर में नहीं मिला सामान; बिना चाबी खुला ताला तो उठे बड़े सवाल

The Hill India News
Last updated: August 11, 2026 5:36 am
The Hill India News
Published: August 11, 2026
Share
SHARE

कानपुर के स्वरूप नगर SBI शाखा का हैरान करने वाला मामला, 2011 के बाद लॉकर तक नहीं पहुंची महिला; चार महीने पहले बैंक पहुंचने पर सामने आया पूरा मामला, शाखा प्रबंधक और संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ FIR

कानपुर: बैंक लॉकर को आमतौर पर लोग अपनी सबसे कीमती संपत्ति को सुरक्षित रखने का भरोसेमंद माध्यम मानते हैं। लेकिन कानपुर में सामने आया एक मामला इसी भरोसे पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। शहर के स्वरूप नगर स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की शाखा में एक महिला के लॉकर से करीब 50 लाख रुपये कीमत के पुश्तैनी सोने-चांदी के जेवर गायब मिलने का आरोप है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि महिला के बचत खाते से वर्षों तक लॉकर का सालाना किराया नियमित रूप से कटता रहा, लेकिन जब कई साल बाद लॉकर खोला गया तो उसमें रखे कीमती आभूषण गायब थे।

Contents
कानपुर के स्वरूप नगर SBI शाखा का हैरान करने वाला मामला, 2011 के बाद लॉकर तक नहीं पहुंची महिला; चार महीने पहले बैंक पहुंचने पर सामने आया पूरा मामला, शाखा प्रबंधक और संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ FIR2003 में खुला था लॉकर, नंबर था 23सालों बाद बैंक पहुंचीं तो पहले लॉकर होने से ही किया इनकार27 जुलाई को लॉकर खुला तो अंदर नहीं थे जेवरसबसे बड़ा सवाल—बिना चाबी के कैसे खुला लॉकर?बैंक रिकॉर्ड और कर्मचारियों की भूमिका जांच के घेरे मेंपुलिस ने दर्ज की FIRलॉकर में सामान रखने वालों के लिए भी बड़ा सबकअब जांच से खुलेगा 50 लाख के जेवरों का राज

मामले की शिकायत के बाद पुलिस ने बैंक के शाखा प्रबंधक और संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब जांच का सबसे अहम हिस्सा यह पता लगाना है कि आखिर इतने लंबे समय तक लॉकर का रिकॉर्ड कैसे बना रहा, किराया कैसे कटता रहा और लॉकर में रखे जेवर आखिर कब और कैसे गायब हुए।

2003 में खुला था लॉकर, नंबर था 23

मामला कौशलपुरी निवासी रश्मि अरोड़ा से जुड़ा बताया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक उन्होंने वर्ष 2003 में स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर में खाता खुलवाया था। बाद में बैंक का विलय स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में हो गया। रश्मि को बैंक की ओर से लॉकर नंबर-23 आवंटित किया गया था।

लॉकर में उन्होंने अपने परिवार के पुश्तैनी और कीमती आभूषण सुरक्षित रखे थे। बताया जा रहा है कि इन जेवरों की मौजूदा कीमत करीब 50 लाख रुपये है।

लेकिन वर्ष 2011 में उनके पति के निधन के बाद रश्मि अपनी बेटी के पास लखनऊ चली गईं। इसके बाद लंबे समय तक वह कानपुर स्थित बैंक शाखा में नहीं पहुंचीं। हालांकि इस दौरान उनके बचत खाते से लॉकर का वार्षिक किराया लगातार कटता रहा।

यही वजह थी कि उन्हें यह भरोसा बना रहा कि बैंक में रखा उनका कीमती सामान सुरक्षित है।

सालों बाद बैंक पहुंचीं तो पहले लॉकर होने से ही किया इनकार

करीब चार महीने पहले जब रश्मि बैंक पहुंचीं और अपने लॉकर के बारे में जानकारी मांगी, तो कथित तौर पर बैंक कर्मचारियों ने उन्हें बताया कि उनके नाम पर कोई लॉकर दर्ज नहीं है।

यह सुनकर वह हैरान रह गईं। उनका कहना था कि उनके पास लॉकर होने से संबंधित पुरानी जानकारी मौजूद थी और वर्षों से उसके किराये की राशि भी उनके खाते से कट रही थी।

इसके बाद बैंक रिकॉर्ड खंगाले गए। काफी प्रयास के बाद बैंक के रिकॉर्ड में लॉकर नंबर-23 का पता चला। इसके बाद रश्मि को उम्मीद हुई कि शायद उनका कीमती सामान सुरक्षित होगा।

लेकिन असली झटका इसके बाद लगा।

27 जुलाई को लॉकर खुला तो अंदर नहीं थे जेवर

जानकारी के मुताबिक, 27 जुलाई को बैंक कर्मचारियों की मौजूदगी में लॉकर खोला गया। लॉकर खुलने के बाद रश्मि को पता चला कि उसमें रखे उनके कीमती आभूषण मौजूद नहीं हैं।

महिला के मुताबिक लॉकर में करीब 50 लाख रुपये मूल्य के पुश्तैनी और कीमती जेवर रखे गए थे, लेकिन लॉकर खोलने पर वे पूरी तरह गायब मिले।

इतने वर्षों तक बैंक में लॉकर का किराया जमा होने और लॉकर के रिकॉर्ड में मौजूद रहने के बावजूद उसके अंदर से सामान गायब मिलने की घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

रश्मि ने बैंक प्रबंधन और संबंधित कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस से शिकायत की। इसके बाद मामले ने तूल पकड़ लिया।

सबसे बड़ा सवाल—बिना चाबी के कैसे खुला लॉकर?

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल लॉकर के संचालन को लेकर है। महिला का कहना है कि वर्ष 2011 के बाद उन्होंने लंबे समय तक लॉकर नहीं खुलवाया था। ऐसे में सवाल यह उठता है कि यदि लॉकर के अंदर रखे जेवर गायब हैं, तो उसे कब और कैसे खोला गया?

लॉकर खोलने की प्रक्रिया में ग्राहक की चाबी और बैंक की प्रक्रिया से जुड़े कई सुरक्षा प्रावधान होते हैं। ऐसे में पुलिस के सामने अब यह पता लगाना अहम होगा कि लॉकर के रिकॉर्ड में किसी तरह की एंट्री हुई थी या नहीं और लॉकर को खोलने की कोई प्रक्रिया बैंक स्तर पर दर्ज है या नहीं।

क्या लॉकर किसी आधिकारिक प्रक्रिया के तहत खोला गया? क्या उस समय कोई बैंक कर्मचारी मौजूद था? क्या लॉकर से संबंधित रिकॉर्ड में कोई छेड़छाड़ हुई? क्या चाबी के इस्तेमाल से जुड़ा कोई रिकॉर्ड मौजूद है? इन सभी सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आएंगे।

बैंक रिकॉर्ड और कर्मचारियों की भूमिका जांच के घेरे में

कानपुर पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब बैंक से लॉकर से जुड़े दस्तावेज, ग्राहक रिकॉर्ड, किराया भुगतान की जानकारी और लॉकर संचालन से संबंधित रिकॉर्ड जुटा सकती है।

इसके अलावा यह भी जांच का विषय होगा कि इतने वर्षों तक लॉकर का किराया किस तरह कटता रहा और बैंक के रिकॉर्ड में लॉकर की स्थिति क्या दर्ज थी।

पुलिस की जांच में यदि लॉकर खोलने से संबंधित कोई दस्तावेज या एंट्री सामने आती है तो उसकी भी पड़ताल की जाएगी। बैंक कर्मचारियों से पूछताछ के साथ-साथ लॉकर संचालन से जुड़े रिकॉर्ड की जांच इस मामले में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

पुलिस ने दर्ज की FIR

मामले की गंभीरता को देखते हुए कानपुर पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर स्वरूप नगर पुलिस ने शाखा प्रबंधक और संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है।

हालांकि FIR दर्ज होना किसी व्यक्ति के दोषी साबित होने के बराबर नहीं है। पुलिस अब उपलब्ध साक्ष्यों, बैंक रिकॉर्ड और संबंधित लोगों के बयानों के आधार पर पूरे मामले की जांच करेगी। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि महिला के जेवर आखिर किस परिस्थिति में गायब हुए।

लॉकर में सामान रखने वालों के लिए भी बड़ा सबक

यह मामला उन तमाम लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण है जो बैंक लॉकर में अपने जेवर, दस्तावेज और दूसरी कीमती वस्तुएं रखते हैं। अक्सर ग्राहक वर्षों तक लॉकर की तरफ ध्यान नहीं देते और केवल यह मानकर चलते हैं कि बैंक में रखा सामान पूरी तरह सुरक्षित है।

लेकिन लंबे समय तक लॉकर का इस्तेमाल न करने की स्थिति में ग्राहकों को समय-समय पर अपने लॉकर की स्थिति, किराया भुगतान और बैंक रिकॉर्ड की जानकारी लेते रहना चाहिए। साथ ही लॉकर से जुड़े दस्तावेज और जरूरी रिकॉर्ड भी सुरक्षित रखना महत्वपूर्ण है।

अब जांच से खुलेगा 50 लाख के जेवरों का राज

कानपुर का यह मामला फिलहाल कई अनसुलझे सवाल अपने पीछे छोड़ गया है। 2003 में खुला लॉकर, 2011 के बाद ग्राहक की गैर-मौजूदगी, वर्षों तक नियमित रूप से कटता लॉकर किराया और फिर लॉकर के अंदर से करीब 50 लाख रुपये के जेवर गायब मिलना—इन सभी कड़ियों को जोड़ना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती होगी।

सबसे अहम सवाल यही है कि रश्मि अरोड़ा के लॉकर नंबर-23 को उनकी गैर-मौजूदगी में आखिर कब खोला गया और उसमें रखे जेवर कहां गए?

अब पुलिस की जांच और बैंक के रिकॉर्ड से ही इस पूरे मामले की सच्चाई सामने आने की उम्मीद है। फिलहाल FIR दर्ज होने के बाद बैंक कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है और सभी की नजर इस बात पर है कि जांच में आखिर कौन-कौन से चौंकाने वाले तथ्य सामने आते हैं।

You Might Also Like

ब्रिटेन करने जा रहा है दुनिया का पहला “AI सुरक्षा संस्थान” स्थापित, PM सुनक ने बताया प्लान
अगस्त के पहले दिन मिली खुशखबरी, 100 रुपये सस्ता हुआ LPG सिलेंडर
उत्तराखण्ड : में केवल जनता की सेवा के लिए और आमजन की आवाज बनने के लिए राजनीति में आया हूँ – विधायक उमेश कुमार शर्मा
डीएम लेटर मॉनिटरिंग सिस्टम प्रभावी, जनमन की समस्या का टाइम बाउंड समाधान
उत्तराखंड: विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका, कई दिग्गज नेताओं ने थामा बीजेपी का दामन
TAGGED:Bank FraudBank LockerCrimeinvestigationJewelryKanpurSBI
Share This Article
Facebook Email Print
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
YoutubeSubscribe
TelegramFollow
Popular News
उत्तराखंडफीचर्ड

देहरादून के फाइव स्टार होटलों में खाद्य सुरक्षा विभाग की दस्तक, किचन से स्टोर तक चला सघन अभियान; एनालॉग पनीर और गैर-दुग्ध उत्पादों पर खास नजर

The Hill India News
The Hill India News
August 11, 2026
15 अगस्त से पहले दिल्ली में हाई अलर्ट! 19 वांटेड आतंकियों के पोस्टर जारी, इंडियन मुजाहिदीन से लेकर अलकायदा और खालिस्तानी मॉड्यूल पर पुलिस की पैनी नजर
चंपावत में गीता धामी का बड़ा बयान: UCC से बेटियों के अधिकार से लेकर ‘लैंड जिहाद’ तक का मुद्दा उठा, बोलीं- सुरक्षित और सशक्त उत्तराखंड के लिए जरूरी है जागरूकता
SBI लॉकर में 50 लाख के जेवर गायब! 2003 से कटता रहा किराया, फिर भी लॉकर में नहीं मिला सामान; बिना चाबी खुला ताला तो उठे बड़े सवाल
टूटेगा या अमर रहेगा विराट कोहली का महारिकॉर्ड? भारत-श्रीलंका टेस्ट सीरीज में 610 रन का ऐसा पहाड़, जिसे पार करना आसान नहीं
झारखंड बंद से थमी रफ्तार! छात्रों पर लाठीचार्ज के विरोध में सड़कों पर उतरी BJP, जगह-जगह टायर जलाकर प्रदर्शन
अदाणी को अमेरिका से बड़ी कानूनी राहत! रिश्वत और धोखाधड़ी का आपराधिक केस खारिज, गौतम अदाणी बोले- ‘कानून में अटूट विश्वास’
‘तेरे घर के नीचे गड़ा है करोड़ों का खजाना…’ फ्रॉड बाबा का बड़ा खेल! 11 लोगों को बनाया शिकार, करीब 1 करोड़ की ठगी
ऋषभ पंत के पैतृक गांव पाली में फिर लौटेगी रौनक? पुश्तैनी मकान का निर्माण शुरू, मां ने सड़क को लेकर ग्रामीणों से की बातचीत
चमोली में कुदरत का रौद्र रूप! तमक नाले में आया भयानक जलसैलाब, वैली ब्रिज और वाहन बहे; BRO कर्मी लापता, नीती घाटी का संपर्क टूटा
© The Hill India. All Rights Reserved | Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?