कानपुर के स्वरूप नगर SBI शाखा का हैरान करने वाला मामला, 2011 के बाद लॉकर तक नहीं पहुंची महिला; चार महीने पहले बैंक पहुंचने पर सामने आया पूरा मामला, शाखा प्रबंधक और संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ FIR
कानपुर: बैंक लॉकर को आमतौर पर लोग अपनी सबसे कीमती संपत्ति को सुरक्षित रखने का भरोसेमंद माध्यम मानते हैं। लेकिन कानपुर में सामने आया एक मामला इसी भरोसे पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। शहर के स्वरूप नगर स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की शाखा में एक महिला के लॉकर से करीब 50 लाख रुपये कीमत के पुश्तैनी सोने-चांदी के जेवर गायब मिलने का आरोप है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि महिला के बचत खाते से वर्षों तक लॉकर का सालाना किराया नियमित रूप से कटता रहा, लेकिन जब कई साल बाद लॉकर खोला गया तो उसमें रखे कीमती आभूषण गायब थे।
मामले की शिकायत के बाद पुलिस ने बैंक के शाखा प्रबंधक और संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब जांच का सबसे अहम हिस्सा यह पता लगाना है कि आखिर इतने लंबे समय तक लॉकर का रिकॉर्ड कैसे बना रहा, किराया कैसे कटता रहा और लॉकर में रखे जेवर आखिर कब और कैसे गायब हुए।
2003 में खुला था लॉकर, नंबर था 23
मामला कौशलपुरी निवासी रश्मि अरोड़ा से जुड़ा बताया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक उन्होंने वर्ष 2003 में स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर में खाता खुलवाया था। बाद में बैंक का विलय स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में हो गया। रश्मि को बैंक की ओर से लॉकर नंबर-23 आवंटित किया गया था।
लॉकर में उन्होंने अपने परिवार के पुश्तैनी और कीमती आभूषण सुरक्षित रखे थे। बताया जा रहा है कि इन जेवरों की मौजूदा कीमत करीब 50 लाख रुपये है।
लेकिन वर्ष 2011 में उनके पति के निधन के बाद रश्मि अपनी बेटी के पास लखनऊ चली गईं। इसके बाद लंबे समय तक वह कानपुर स्थित बैंक शाखा में नहीं पहुंचीं। हालांकि इस दौरान उनके बचत खाते से लॉकर का वार्षिक किराया लगातार कटता रहा।
यही वजह थी कि उन्हें यह भरोसा बना रहा कि बैंक में रखा उनका कीमती सामान सुरक्षित है।
सालों बाद बैंक पहुंचीं तो पहले लॉकर होने से ही किया इनकार
करीब चार महीने पहले जब रश्मि बैंक पहुंचीं और अपने लॉकर के बारे में जानकारी मांगी, तो कथित तौर पर बैंक कर्मचारियों ने उन्हें बताया कि उनके नाम पर कोई लॉकर दर्ज नहीं है।
यह सुनकर वह हैरान रह गईं। उनका कहना था कि उनके पास लॉकर होने से संबंधित पुरानी जानकारी मौजूद थी और वर्षों से उसके किराये की राशि भी उनके खाते से कट रही थी।
इसके बाद बैंक रिकॉर्ड खंगाले गए। काफी प्रयास के बाद बैंक के रिकॉर्ड में लॉकर नंबर-23 का पता चला। इसके बाद रश्मि को उम्मीद हुई कि शायद उनका कीमती सामान सुरक्षित होगा।
लेकिन असली झटका इसके बाद लगा।
27 जुलाई को लॉकर खुला तो अंदर नहीं थे जेवर
जानकारी के मुताबिक, 27 जुलाई को बैंक कर्मचारियों की मौजूदगी में लॉकर खोला गया। लॉकर खुलने के बाद रश्मि को पता चला कि उसमें रखे उनके कीमती आभूषण मौजूद नहीं हैं।
महिला के मुताबिक लॉकर में करीब 50 लाख रुपये मूल्य के पुश्तैनी और कीमती जेवर रखे गए थे, लेकिन लॉकर खोलने पर वे पूरी तरह गायब मिले।
इतने वर्षों तक बैंक में लॉकर का किराया जमा होने और लॉकर के रिकॉर्ड में मौजूद रहने के बावजूद उसके अंदर से सामान गायब मिलने की घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
रश्मि ने बैंक प्रबंधन और संबंधित कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस से शिकायत की। इसके बाद मामले ने तूल पकड़ लिया।
सबसे बड़ा सवाल—बिना चाबी के कैसे खुला लॉकर?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल लॉकर के संचालन को लेकर है। महिला का कहना है कि वर्ष 2011 के बाद उन्होंने लंबे समय तक लॉकर नहीं खुलवाया था। ऐसे में सवाल यह उठता है कि यदि लॉकर के अंदर रखे जेवर गायब हैं, तो उसे कब और कैसे खोला गया?
लॉकर खोलने की प्रक्रिया में ग्राहक की चाबी और बैंक की प्रक्रिया से जुड़े कई सुरक्षा प्रावधान होते हैं। ऐसे में पुलिस के सामने अब यह पता लगाना अहम होगा कि लॉकर के रिकॉर्ड में किसी तरह की एंट्री हुई थी या नहीं और लॉकर को खोलने की कोई प्रक्रिया बैंक स्तर पर दर्ज है या नहीं।
क्या लॉकर किसी आधिकारिक प्रक्रिया के तहत खोला गया? क्या उस समय कोई बैंक कर्मचारी मौजूद था? क्या लॉकर से संबंधित रिकॉर्ड में कोई छेड़छाड़ हुई? क्या चाबी के इस्तेमाल से जुड़ा कोई रिकॉर्ड मौजूद है? इन सभी सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आएंगे।
बैंक रिकॉर्ड और कर्मचारियों की भूमिका जांच के घेरे में
कानपुर पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब बैंक से लॉकर से जुड़े दस्तावेज, ग्राहक रिकॉर्ड, किराया भुगतान की जानकारी और लॉकर संचालन से संबंधित रिकॉर्ड जुटा सकती है।
इसके अलावा यह भी जांच का विषय होगा कि इतने वर्षों तक लॉकर का किराया किस तरह कटता रहा और बैंक के रिकॉर्ड में लॉकर की स्थिति क्या दर्ज थी।
पुलिस की जांच में यदि लॉकर खोलने से संबंधित कोई दस्तावेज या एंट्री सामने आती है तो उसकी भी पड़ताल की जाएगी। बैंक कर्मचारियों से पूछताछ के साथ-साथ लॉकर संचालन से जुड़े रिकॉर्ड की जांच इस मामले में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
पुलिस ने दर्ज की FIR
मामले की गंभीरता को देखते हुए कानपुर पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर स्वरूप नगर पुलिस ने शाखा प्रबंधक और संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है।
हालांकि FIR दर्ज होना किसी व्यक्ति के दोषी साबित होने के बराबर नहीं है। पुलिस अब उपलब्ध साक्ष्यों, बैंक रिकॉर्ड और संबंधित लोगों के बयानों के आधार पर पूरे मामले की जांच करेगी। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि महिला के जेवर आखिर किस परिस्थिति में गायब हुए।
लॉकर में सामान रखने वालों के लिए भी बड़ा सबक
यह मामला उन तमाम लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण है जो बैंक लॉकर में अपने जेवर, दस्तावेज और दूसरी कीमती वस्तुएं रखते हैं। अक्सर ग्राहक वर्षों तक लॉकर की तरफ ध्यान नहीं देते और केवल यह मानकर चलते हैं कि बैंक में रखा सामान पूरी तरह सुरक्षित है।
लेकिन लंबे समय तक लॉकर का इस्तेमाल न करने की स्थिति में ग्राहकों को समय-समय पर अपने लॉकर की स्थिति, किराया भुगतान और बैंक रिकॉर्ड की जानकारी लेते रहना चाहिए। साथ ही लॉकर से जुड़े दस्तावेज और जरूरी रिकॉर्ड भी सुरक्षित रखना महत्वपूर्ण है।
अब जांच से खुलेगा 50 लाख के जेवरों का राज
कानपुर का यह मामला फिलहाल कई अनसुलझे सवाल अपने पीछे छोड़ गया है। 2003 में खुला लॉकर, 2011 के बाद ग्राहक की गैर-मौजूदगी, वर्षों तक नियमित रूप से कटता लॉकर किराया और फिर लॉकर के अंदर से करीब 50 लाख रुपये के जेवर गायब मिलना—इन सभी कड़ियों को जोड़ना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती होगी।
सबसे अहम सवाल यही है कि रश्मि अरोड़ा के लॉकर नंबर-23 को उनकी गैर-मौजूदगी में आखिर कब खोला गया और उसमें रखे जेवर कहां गए?
अब पुलिस की जांच और बैंक के रिकॉर्ड से ही इस पूरे मामले की सच्चाई सामने आने की उम्मीद है। फिलहाल FIR दर्ज होने के बाद बैंक कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है और सभी की नजर इस बात पर है कि जांच में आखिर कौन-कौन से चौंकाने वाले तथ्य सामने आते हैं।
